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जबलपुर: भड़पुरा घाट पर नर्मदा नदी में बहे महाराष्ट्र के पिता-पुत्र; 36 घंटे बाद भी सुराग नहीं, SDRF का रेस्क्यू जारी

जबलपुर (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में बरगी डैम के 9 गेट खोले जाने के बाद नर्मदा नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है और तेज बहाव के चलते विभिन्न घाटों पर स्थिति अत्यंत संवेदनशील बनी हुई है।

इसी दौरान चरगवां थाना क्षेत्र अंतर्गत भड़पुरा घाट पर एक दिल दहला देने वाला दर्दनाक हादसा पेश आया। नर्मदा नदी में डूब रहे अपने 10 वर्षीय मासूम बेटे को बचाने के लिए पिता ने गहरे पानी में छलांग लगा दी, किंतु नदी के प्रचंड वेग की चपेट में आने से पिता-पुत्र दोनों ही जलधारा में समा गए। हादसे के करीब 36 घंटे बीत जाने के बाद भी दोनों का कोई सुराग नहीं मिल सका है। रेस्क्यू टीमें लगातार सर्च ऑपरेशन में जुटी हैं, जबकि परिजन घाट किनारे बैठकर अपनों के मिलने की आस लगाए बैठे हैं।

पुलिस के अनुसार, महाराष्ट्र निवासी 34 वर्षीय गणेश कांताराम पाटिल अपने 10 वर्षीय पुत्र लकी पाटिल और परिवार के लगभग 15 सदस्यों के साथ भड़पुरा आश्रम में दर्शन-पूजन के लिए पहुंचे थे। धार्मिक अनुष्ठान के बाद परिवार के कुछ बच्चे नर्मदा नदी के किनारे पहुंच गए। खेलते समय अचानक लकी का पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में चला गया। बेटे को डूबते देख पिता गणेश पाटिल ने बिना सोचे-समझे नदी में छलांग लगा दी, लेकिन पानी के विकराल बहाव के आगे उनकी कोशिशें नाकाम रहीं और दोनों देखते ही देखते आंखों से ओझल हो गए।

🚨 स्थानीय गोताखोरों ने शुरू किया सर्च ऑपरेशन: तेज बहाव बना बड़ी चुनौती

प्राथमिक राहत और बचाव कार्य:

  • घाट पर मची चीख-पुकार: घटना के तुरंत बाद घाट पर मौजूद श्रद्धालुओं और परिजनों ने मदद के लिए शोर मचाया।

  • स्थानीय लोगों का प्रयास: स्थानीय तैराकों व ग्रामीणों ने तुरंत नदी में उतरकर पिता-पुत्र को खोजने का भरसक प्रयास किया, परंतु नदी की अगाध गहराई और तेज धारा के कारण कोई सफलता नहीं मिल सकी।

  • पुलिस बल की तैनाती: सूचना मिलते ही चरगवां थाना प्रभारी सरोजिनी चौकसे पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचीं और स्थानीय गोताखोरों की मदद से तत्काल रेस्क्यू अभियान प्रारंभ करवाया।

🦺 SDRF ने संभाला रेस्क्यू का मोर्चा: भड़पुरा आश्रम से नर्मदा तक व्यापक तलाशी अभियान

राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की कार्रवाई:

  • SDRF की टीमें तैनात: स्थिति की गंभीरता को देखते हुए SDRF के विशेषज्ञ गोताखोरों और रेस्क्यू बोट्स को मैदान में उतारा गया।

  • गहरे क्षेत्रों में सर्च ऑपरेशन: बचाव दल ने नदी के संभावित गहरे भंवरों, किनारों और बहाव के निचले हिस्सों में सघन सर्च ऑपरेशन चलाया।

  • अंधेरे के कारण रुकावट: रात के समय दृश्यता घटने और बहाव तेज होने के कारण अभियान में मुश्किलें आईं, जिसके बाद अगली सुबह पुनः बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया गया।

💔 घाट किनारे परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल: 36 घंटे बाद भी कोई सुराग नहीं

पीड़ित परिवार की स्थिति:

  • मातम में बदली धार्मिक यात्रा: महाराष्ट्र से पूरे उत्साह के साथ धार्मिक दर्शन के लिए आए परिवार की खुशियां पलक झपकते ही गहरे मातम में तब्दील हो गईं।

  • परिजन टकटकी लगाए बैठे: 36 घंटे से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी पिता-पुत्र का कोई पता न चलने से परिजनों की चिंताएं और निराशा लगातार बढ़ रही हैं।

  • प्रशासनिक सतर्कता: पुलिस और प्रशासन द्वारा नर्मदा किनारे बसे निचले गांवों को भी अलर्ट कर दिया गया है ताकि किसी भी स्थान पर जानकारी मिलते ही त्वरित कार्रवाई की जा सके।

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