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‘ऑपरेशन मैट्रिक्स’ के तहत क्राइम ब्रांच का बड़ा एक्शन: 13 राज्यों में फैला था ठगी का जाल

इंदौर (मध्य प्रदेश): ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी और अंतरराज्यीय साइबर अपराधों के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत इंदौर क्राइम ब्रांच को बड़ी सफलता हाथ लगी है।

 

क्राइम ब्रांच की टीम ने सोमवार को संगठित वित्तीय अपराध सिंडिकेट से जुड़े दो शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, इन दोनों आरोपियों के विरुद्ध देश के 13 से अधिक राज्यों में लगभग 5 करोड़ रुपये की ऑनलाइन ठगी से संबंधित दर्जनों आपराधिक शिकायतें दर्ज हैं।

 

पुलिस आयुक्त के निर्देशन और पुलिस उपायुक्त (अपराध) के कुशल मार्गदर्शन में क्राइम ब्रांच द्वारा ‘ऑपरेशन मैट्रिक्स’ संचालित किया जा रहा है। आरोपियों के कब्जे से चार स्मार्टफोन, आठ एक्टिवेटेड सिमकार्ड, विभिन्न बैंकों की 10 पासबुक और 11 एटीएम (ATM) कार्ड बरामद कर सुसंगत धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है।

🌐 गृह मंत्रालय के I4C और NCRP पोर्टल से मिला इनपुट: महू यूको बैंक शाखा से जुड़े तार

 

केंद्रीय जांच एजेंसियों से समन्वय और पड़ताल:

    • डिजिटल इनपुट: राज्य साइबर पुलिस मुख्यालय और केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कार्यरत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) तथा नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) से संदिग्ध म्यूल बैंक खातों का डेटा प्राप्त हुआ था।

       

 

    • म्यूल बैंक खाते की पहचान: प्राप्त तकनीकी डेटा के विश्लेषण पर इंदौर के महू स्थित यूको बैंक (UCO Bank) शाखा का एक संदिग्ध खाता जांच के दायरे में आया।

       

 

    • मल्टी-स्टेट नेटवर्क: जांच में पुष्टि हुई कि इस अकेले बैंक खाते का उपयोग तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, गुजरात, उत्तराखंड, दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, झारखंड, गोवा, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और बिहार समेत 13 से अधिक राज्यों के नागरिकों से ठगी गई 5 करोड़ रुपये की राशि को खपाने के लिए किया जा रहा था।

       

 

 

💳 एक मुख्य खाते से 5 करोड़ का संदिग्ध लेन-देन: सिम और बैंक खाते का सिंडिकेट

 

अपराध करने का तरीका और जांच का खुलासा:

    • म्यूल खाते का दुरुपयोग: क्राइम ब्रांच डीसीपी राजेश त्रिपाठी ने बताया कि मुख्य आरोपी दीपक राव ने अपने नाम से खोले गए बैंक खाते को म्यूल अकाउंट के तौर पर इस्तेमाल के लिए गिरोह को सौंपा था।

       

 

    • ओटीपी के लिए दिया अपना सिम: दीपक ने अपने नाम से जारी मोबाइल सिमकार्ड (जिस पर बैंक के सभी गोपनीय ओटीपी आते थे) दूसरे आरोपी गौरव राठौर को उपलब्ध कराया हुआ था, जिससे धोखाधड़ी की रकम को आसानी से इधर-उधर ट्रांसफर किया जा सके।

       

 

    • करोड़ों का ट्रांजेक्शन: प्राथमिक बैंक ऑडिट और स्टेटमेंट की पड़ताल में सामने आया कि यूको बैंक के इस मुख्य खाते के जरिए 5 करोड़ रुपये से अधिक का संदेहास्पद वित्तीय लेन-देन किया गया है।

       

 

 

⚖️ ठेला लगाने वाला और निजी कर्मचारी धराए: अंतरराज्यीय गिरोह की कड़ियां जोड़ने में जुटी पुलिस

 

आरोपियों की पृष्ठभूमि और आगे की तफ्तीश:

    • आरोपियों का विवरण: गिरफ्तार आरोपी दीपक राव महू का निवासी है, जो 12वीं तक पढ़ा-लिखा है और स्थानीय स्तर पर ठेला लगाता है। वहीं दूसरा मुख्य आरोपी गौरव राठौर लसूड़िया (इंदौर) का निवासी है, जिसने बी.कॉम तक पढ़ाई की है और एक निजी संस्थान में नौकरी करता है।

       

 

    • कमीशन का खेल: प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि साइबर ठगों के बड़े सिंडिकेट द्वारा इन जैसे स्थानीय लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते और सिमकार्ड हासिल किए जाते हैं।

       

 

    • नेटवर्क की पड़ताल जारी: क्राइम ब्रांच दोनों आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि देशव्यापी साइबर ठगी गिरोह के मुख्य सरगना कौन हैं और ठगी गई रकम का अंतिम स्रोत कहां है।

       

 

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