Logo
ब्रेकिंग
Ludhiana Shocker: लुधियाना में हैवानियत की हदें पार, 3 साल की बच्ची से दरिंदगी करने वाला पड़ोसी दबोच... Punjab Congress Reshuffle: पंजाब कांग्रेस में बड़े फेरबदल की तैयारी, सचिन पायलट के साथ नई को-इंचार्ज... लधपालवां टोल बैरियर पर माइनिंग चेकिंग के दौरान भारी हंगामा: बूम बैरियर तोड़कर भागे टिपर बबरी बाईपास हाईटेक नाके पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 83 ग्राम हेरोइन के साथ महिला समेत 3 गिरफ्तार पंजाब और हरियाणा विधानसभा को बम से उड़ाने की धमकी: ई-मेल मिलते ही मचा हड़कंप Ludhiana Crime News: पक्खोवाल रोड पर बर्थडे पार्टी में खूनी संघर्ष, आहाते में फायरिंग से बीच-बचाव कर... Ludhiana F&CC Meeting: लुधियाना में 150 करोड़ के 187 विकास प्रस्तावों को मंजूरी की तैयारी, 14 सितंबर... Amity University Ranchi Violence: छात्र से मारपीट, नकदी-सोने का लॉकेट छीनने का आरोप; विधायक पुत्र सम... Ranchi Cyber Fraud: बैंक अफसर बनकर शेयर बाजार में निवेश का झांसा, कांके के मंगरा उरांव से 9.20 लाख क... Jharkhand Agriculture Scheme: महिला किसानों की आय बढ़ाएगी हेमंत सरकार, पशुपालन, मछली पालन और बागवानी...
Header Ad

BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के इस्तीफे की मांग: नालसार विवाद पर वकीलों का विरोध प्रदर्शन, CJI की फटकार के बाद भी बवाल

नई दिल्ली: बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के खिलाफ कानूनी और छात्र संगठनों की नाराजगी बढ़ती जा रही है। ‘ऑल इंडिया यंग एडवोकेट्स एसोसिएशन’ और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के लीगल विंग ने मनन मिश्रा के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन का ऐलान किया है। सीजेपी के सह-संयोजक सौरव दास के अनुसार, यह प्रदर्शन पद पर आसीन पदाधिकारियों की जवाबदेही और संवैधानिक आचरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित किया जा रहा है। यह संपूर्ण विवाद नालसार (NALSAR) यूनिवर्सिटी के विधि स्नातकों के नामांकन पर रोक लगाने संबंधी बीसीआई के पूर्व आदेश से जुड़ा हुआ है।

❓ मनन मिश्रा के इस्तीफे की मांग क्यों हो रही है?

विवाद का मुख्य कारण नालसार के छात्रों के पेशेवर पंजीकरण पर रोक लगाने का प्रयास था:

  • नामांकन पर रोक का निर्देश: बीसीआई अध्यक्ष द्वारा राज्य बार काउंसिलों को आदेश दिया गया था कि वे नालसार यूनिवर्सिटी के वर्ष 2026 बैच के विधि स्नातकों का वकील के रूप में पंजीकरण न करें।

  • व्यापक विरोध और वापसी: इस फैसले के खिलाफ छात्रों और वकीलों के कड़े विरोध के बाद बीसीआई को अपना आदेश वापस लेना पड़ा।

  • न्यायिक आपत्ति: इस पूरे प्रकरण में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) ने भी बीसीआई के दखल और अनुशासनात्मक रवैये पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी।

🏛️ क्या है नालसार यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह से जुड़ा पूरा विवाद?

इस विवाद की शुरुआत दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के चयन को लेकर उपजे असंतोष से हुई:

  • छात्रों का पत्र: नालसार यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में सीजेआई को मुख्य अतिथि बनाए जाने के प्रस्ताव पर कुछ छात्रों ने वाइस चांसलर और फैकल्टी को पत्र लिखकर अपनी असहमति दर्ज कराई थी।

  • BCI का कड़ा रुख: छात्रों के इस विरोध को अनुशासनहीनता मानते हुए बीसीआई ने सभी राज्य बार काउंसिलों को निर्देश जारी कर दिया कि जब तक जांच पूरी न हो, नालसार के इस बैच के किसी भी छात्र को अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत न किया जाए।

  • सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया: इस आदेश के सार्वजनिक होते ही विधिक समुदाय और सोशल मीडिया पर तीव्र प्रतिक्रियाएं सामने आईं, जिसके बाद बीसीआई बैकफुट पर आ गई और आदेश रद्द करना पड़ा।

👨‍⚖️ चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने BCI को लगाई कड़ी फटकार

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए स्पष्ट कानूनी रुख अपनाया:

  • दखल पर रोक: सीजेआई ने स्पष्ट किया कि यह मामला छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच का संवाद है, जिसमें बीसीआई को इस प्रकार के दंडात्मक दखल का अधिकार नहीं है।

  • अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता: न्यायालय ने कहा कि विद्यार्थियों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने से नहीं रोका जा सकता और छात्रों पर किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई से साफ इनकार किया।

  • कारण बताओ नोटिस: इस संबंध में शीर्ष अदालत की ओर से बीसीआई को नोटिस भी जारी किया गया था।

📜 मनन मिश्रा ने मांगी माफी, फिर भी जारी है विरोध

बढ़ते दबाव के बीच बीसीआई नेतृत्व ने खेद प्रकट किया है:

  • औपचारिक खेद: स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जारी बयान में बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने विधि छात्रों से औपचारिक रूप से माफी मांगी और कहा कि यदि उनके शब्दों या पत्रों से छात्रों की भावनाएं आहत हुई हैं, तो वे इसका सम्मान करते हैं।

  • इस्तीफे पर अड़े संगठन: माफी के बावजूद युवा वकीलों और छात्र संगठनों का कहना है कि स्वायत्त संस्थाओं के दुरुपयोग की जवाबदेही तय होनी चाहिए, जिसके चलते उनके पद से त्यागपत्र की मांग लगातार जारी है।

Comments are closed.