
Bhopal Laxmi Pujan: भोपाल में महाराष्ट्रीयन परिवारों के घर विराजीं ज्येष्ठ और कनिष्ठ गौरी; महाभोग में सजीं 16 तरह की सब्जियां
भोपाल। गणेशोत्सव के पावन पर्व के बीच शहर के कई महाराष्ट्रीयन परिवारों के घरों में महालक्ष्मी यानी गौरी विराजी हैं। मान्यता अनुसार ज्येष्ठ गौरी और कनिष्ठ गौरी ढाई दिन के लिए अपने मायके आती हैं। शुक्रवार को उत्सव के दूसरे दिन परिवारों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ महाभोग तैयार कर देवी को अर्पित किया। घरों में तरह-तरह के प्रामाणिक महाराष्ट्रीयन व्यंजन बनाए गए और महिलाओं ने उत्साहपूर्वक हल्दी-कुंकू की रस्म भी निभाई। शनिवार को घी-चावल का भोग लगाकर पूरे विधि-विधान से गौरी को विदाई दी जाएगी।
🛕 60 साल से घर में विराज रही हैं गौरी: इस बार सजाई गई राजस्थानी हवेली की खास थीम
माय सिटी टाउनशिप निवासी महक पाटिल ने बताया कि उनके घर में करीब 60 साल से गौरी स्थापित की जा रही हैं।
हर साल ज्येष्ठ गौरी और कनिष्ठ गौरी को सुंदर रेशमी साड़ियों और पारंपरिक आभूषणों से सजाया जाता है। परिवार की ओर से हर बार सजावट के लिए एक खास थीम तय की जाती है। इस साल झांकी की थीम ‘राजस्थानी हवेली’ रखी गई है। महक ने बताया कि दोनों गौरी को चढ़ाई जाने वाली साड़ियां बाद में उनकी दो ननदों को भेंट स्वरूप दी जाती हैं। शुक्रवार को देवी को महाभोग अर्पित किया गया और भंडारे का आयोजन हुआ। शनिवार को घी-चावल का विशेष भोग लगाकर देवी को विदाई दी जाएगी।
👨👩👧👦 महालक्ष्मी की स्थापना के लिए जुटता है पूरा परिवार: 50 साल पुरानी परंपरा में शामिल हुए दूर-दराज के सदस्य
कोलार रोड स्थित विराशा हाइट्स निवासी स्वप्ना संजय देशपांडे के परिवार में भी करीब 50 वर्षों से श्री महालक्ष्मी की स्थापना की जा रही है।
इस अवसर पर परिवार के सदस्य देश के अलग-अलग शहरों से घर पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि उनके घर में चार महालक्ष्मी विराजती हैं। इस बार उन्होंने अपनी दो देवरानियों भारती देशपांडे और साक्षी देशपांडे तथा बेटी सायली के साथ देवी की स्थापना की। नौकरी के सिलसिले में दूसरे शहरों में रहने वाले परिवार के सदस्य भी इस दौरान घर आकर तैयारियों में हाथ बंटाते हैं। इस वर्ष बेटी सायली और दामाद सुमित मोहंती के आने से परिवार का उत्साह कई गुना बढ़ गया।
🍱 16 तरह की सब्जियों और पुरणपोळी से सजा महाभोग: लंदन से आई बेटी ने दोगुनी की खुशियां
स्टार एवेन्यू, बावड़ियाकलां निवासी नंदा मजूमदार के घर में 26 साल से महालक्ष्मी विराज रही हैं।
उन्होंने बताया कि उनकी बड़ी सास की उम्र अधिक होने के बाद उन्होंने महालक्ष्मी स्थापना की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी थी। तभी से वह हर साल अपनी देवरानी भावना मजूमदार (जो पेशे से शिक्षिका हैं) के साथ मिलकर देवी का स्वागत करती हैं। दोनों मिलकर महाभोग तैयार करती हैं और देवी का श्रृंगार करती हैं। इस बार महाभोग में प्रसिद्ध पुरणपोळी के साथ 16 प्रकार की सब्जियां, कढ़ी, भजी और पांच प्रकार की चटनी बनाई गईं। शुक्रवार को देवी को महाभोग अर्पित कर शाम को महिलाओं के लिए हल्दी-कुंकू का आयोजन किया गया। इस वर्ष उनकी बेटी भी लंदन से विशेष रूप से घर आई है।

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