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भारत में दोगुनी होंगी जापानी कंपनियां: पीयूष गोयल का बड़ा बयान, $67 बिलियन निवेश और डीपटेक कॉरिडोर पर बनी सहमति

टोक्यो/नई दिल्ली: भारत में कार्यरत जापानी कंपनियों की संख्या आगामी कुछ वर्षों में दोगुनी होकर लगभग 3,000 तक पहुंच सकती है। आधिकारिक जापान दौरे पर पहुंचे केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जानकारी दी कि जापान की कई प्रमुख कंपनियां भारत के विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में बड़े निवेश के लिए तत्पर हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन क्षेत्रों में तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता है, वहां जापानी कंपनियां भारत को आधुनिक तकनीक का हस्तांतरण (Technology Transfer) करने में पूर्ण सहयोग प्रदान करेंगी।

💰 $67 अरब के निवेश लक्ष्य की ओर तेज कदम: $10 अरब से अधिक का निवेश पूरा

निवेश के आंकड़े और प्रगति:

  • 10 वर्षों का रोडमैप: जापान ने पूर्व में अगले 10 वर्षों के भीतर भारत में 67 अरब डॉलर (लगभग 5.5 लाख करोड़ रुपये) के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का लक्ष्य निर्धारित किया था।

  • वर्तमान स्थिति: पीयूष गोयल के अनुसार, इस निर्धारित लक्ष्य में से अब तक 10 अरब डॉलर से अधिक का निवेश भारत में आ चुका है।

  • समय पूर्व प्राप्ति की उम्मीद: मौजूदा निवेश प्रवाह और औद्योगिक उत्साह को देखते हुए यह संपूर्ण लक्ष्य निर्धारित समय से काफी पहले हासिल कर लिया जाएगा।

🚀 भारतीय स्टार्टअप्स के लिए ‘डीपटेक कैपिटल कॉरिडोर’ और पिचिंग प्लेटफॉर्म का प्रस्ताव

स्टार्टअप और तकनीकी साझेदारी:

  • डीपटेक कैपिटल कॉरिडोर: दोनों देशों के मध्य डीपटेक कैपिटल कॉरिडोर (Deeptech Capital Corridor) स्थापित करने का औपचारिक प्रस्ताव रखा गया है, जिससे भारतीय डीपटेक स्टार्टअप्स को जापानी वित्तीय संस्थानों से सुगमता से वेंचर फंडिंग मिल सकेगी।

  • पिचिंग प्लेटफॉर्म की पहल: टोक्यो में जापानी निवेशकों और उद्यमियों के साथ बैठक के दौरान मंत्री ने ‘शार्क टैंक’ (Shark Tank) की तर्ज पर एक विशेष पिचिंग प्लेटफॉर्म बनाने पर जोर दिया, ताकि भारतीय नवोन्मेषक अपने व्यापारिक विचार जापानी निवेशकों के समक्ष रख सकें।

🍱 खाद्य निर्यात मानक और गुणवत्ता पर जोर: FDA नियमों का दिया उदाहरण

निर्यात विस्तार और मानक सुधार:

  • खाद्य निर्यात की संभावनाएं: जापान में भारतीय उच्च गुणवत्ता वाले खाद्य उत्पादों के निर्यात की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

  • आयात मानकों पर चर्चा: जापान के कड़े फूड इम्पोर्ट मानकों को लेकर भारत द्विपक्षीय वार्ता के जरिए समाधान तलाशेगा।

  • गुणवत्ता नियंत्रण: विकसित देशों के बाजारों में पैठ बनाने के लिए भारतीय कंपनियों को उत्पादों की गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय मानकों का कड़ाई से पालन करना होगा। इस संदर्भ में उन्होंने महाराष्ट्र के एफडीए (FDA) आयुक्त तुकाराम मुंढे द्वारा लागू किए गए सख्त गुणवत्ता नियमों की सराहना की।

📉 लगातार बढ़ता व्यापार घाटा चिंता का विषय: CEPA की होगी समीक्षा

द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक संतुलन:

  • व्यापार असंतुलन: जापान के साथ भारत का बढ़ता व्यापार घाटा दोनों देशों के बीच आर्थिक वार्ता का मुख्य केंद्र बना हुआ है।

  • द्विपक्षीय व्यापार आंकड़े: वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच कुल 27.5 अरब डॉलर का व्यापार हुआ, जिसमें भारत का जापान को कुल निर्यात मात्र 6.3 अरब डॉलर ही रहा।

  • CEPA की समीक्षा: इस असंतुलन को दूर करने के लिए जापानी विदेश मंत्री के साथ औपचारिक बातचीत हुई है और भारत-जापान व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) की समीक्षा के लिए जल्द ही ‘टर्म्स ऑफ रेफरेंस’ (ToR) तैयार किए जाएंगे।

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