
नई दिल्ली: अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले को लेकर इन दिनों सियासी और सामाजिक गलियारों में तीखी चर्चा चल रही है।
इसी ज्वलंत मुद्दे पर टीवी9 भारतवर्ष के विशेष कार्यक्रम में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से सवाल पूछे गए। जब उनसे राम मंदिर में चढ़ावे की हेराफेरी को लेकर प्रश्न किया गया, तो उन्होंने इस कृत्य पर गहरा आघात और रोष व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब उन्हें इस चोरी की जानकारी मिली, तो उनका हृदय अत्यंत व्यथित हुआ। मंदिर के चढ़ावे की चोरी श्रद्धालुओं की आस्था पर सबसे बड़ा कलंक है। वर्तमान में विशेष जांच दल (SIT) इस पूरे प्रकरण की गहराई से पड़ताल कर रहा है और दोषियों को दैवीय न्याय से कोई नहीं बचा पाएगा।
🚩 ‘मैं राम भक्त हनुमान का अनन्य सेवक हूं’, मंदिर की घटना से गहरा भावनात्मक जुड़ाव
पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने राम मंदिर और श्रद्धालुओं की आस्था के बीच के संबंध को रेखांकित करते हुए अपनी भावनाएं व्यक्त कीं:
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हनुमान भक्त की व्यथा: उन्होंने कहा कि वे भगवान श्रीराम के सबसे अनन्य भक्त पवनपुत्र हनुमान जी के दास हैं, इसलिए राम मंदिर से जुड़ी प्रत्येक छोटी-बड़ी घटना से उनका गहरा भावनात्मक जुड़ाव है।
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अत्यंत निंदनीय कृत्य: बाबा बागेश्वर ने कहा कि राम मंदिर के पावन परिसर में प्रभु को अर्पित किए गए चढ़ावे की चोरी की खबर बेहद दुखद है। भगवान के नाम पर समर्पित धन अथवा पूजा सामग्री पर कुदृष्टि डालना किसी भी दृष्टिकोण से क्षम्य नहीं हो सकता।
🔥 ‘चढ़ावा चुराने वालों की लंका लगेगी और नाश होगा’—बाबा बागेश्वर की कड़ी चेतावनी
मंदिर की पवित्र संपत्ति पर डाका डालने वालों को धीरेंद्र शास्त्री ने सख्त आध्यात्मिक व नैतिक चेतावनी दी:
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कर्मों का दंड: धीरेंद्र शास्त्री ने कड़े शब्दों में कहा कि जो भी अधर्मी प्रभु के मंदिर में अर्पित किए गए चढ़ावे पर हाथ डालते हैं, उन्हें इसका अत्यंत भयानक दुष्परिणाम भुगतना पड़ेगा।
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लंका लगेगी: उन्होंने दो टूक अंदाज में कहा कि ऐसे पापकर्मियों की ‘लंका लगेगी’ और उनका पूर्ण नाश तय है।
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ईश्वरीय न्याय पर अडिग भरोसा: उन्होंने कहा कि परमात्मा की दृष्टि से कोई भी कर्म छिपा नहीं है। कानून के साथ-साथ भगवान का न्याय चक्र भी दोषियों को उनके कर्मों का दंड अवश्य देगा, इसलिए किसी को भी करोड़ों भक्तों की श्रद्धा से खिलवाड़ करने का दुस्साहस नहीं करना चाहिए।
⚖️ मर्यादा पुरुषोत्तम के आदर्शों के विपरीत आचरण, श्रद्धा का प्रतीक है चढ़ावा
धीरेंद्र शास्त्री ने मंदिर के चढ़ावे के वास्तविक धार्मिक और दार्शनिक महत्व पर प्रकाश डाला:
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मर्यादा का उल्लंघन: उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम का संपूर्ण जीवन उच्च आदर्शों और शुचिता का प्रतीक है, ऐसे में उनके पावन धाम में इस तरह की घटना होना राम के आदर्शों और जीवन चर्या के पूर्णतः विपरीत है।
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आस्था का प्रतीक: भक्तजन अपनी गाढ़ी कमाई और अनन्य श्रद्धा के साथ मंदिर में अर्पण करते हैं। यह केवल धन या वस्तु नहीं, बल्कि अनगिनत श्रद्धालुओं का समर्पण है, जिसके साथ धोखाधड़ी करना घोर अपराध और निंदनीय है।
👁️ ‘भगवान की नजरों से कोई नहीं बच सकता’, आस्था की सुरक्षा सर्वोपरि
विशेष शो के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने साफ शब्दों में आस्था और मंदिर प्रबंधन की पवित्रता का समर्थन किया:
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कर्मफल की अनिवार्यता: उन्होंने विश्वास जताया कि मंदिर की चोरी में लिप्त लोग चाहे कितनी भी चालाकी बरत लें, ईश्वर के न्याय विधान से कोई बच नहीं सकेगा।
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शून्य सहनशीलता: उन्होंने जोर देकर कहा कि देवस्थानों की पवित्र संपत्ति और श्रद्धालुओं की निर्मल आस्था के साथ किसी भी स्तर पर होने वाली वित्तीय अनियमितता या चोरी को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

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