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राम मंदिर में जमीन के नीचे परिक्रमा, बनी 80 मीटर लंबी सुरंग; जानिए कैसे और क्यों है खास

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर श्रद्धालुओं की आध्यात्मिक यात्रा को एक नया अनुभव देने जा रहा है. पहली बार, भक्ति की राह आधुनिक तकनीक से होकर गुजरेगी. मंदिर परिसर में एक विशेष सुरंग का निर्माण किया गया है, जो न केवल परिक्रमा मार्ग का हिस्सा है, बल्कि इसे भक्तों की सुविधा और सुरक्षा के लिहाज से एक अद्भुत पहल माना जा रहा है.

राम मंदिर की पूर्व दिशा में स्थित मुख्य प्रवेश द्वार के पास15 फीट गहराई में और 80 मीटर लंबी इस भूमिगत सुरंग को बड़ी ही बारीकी और भव्यता से तैयार किया गया है. यह सुरंग सीधा मंदिर के 800 मीटर लंबे परिक्रमा पथ से जुड़ती है, जहां से एक साथ लगभग 1.5 लाख श्रद्धालु परिक्रमा कर सकते हैं. यह संख्या बताती है कि अयोध्या में भक्तों के स्वागत के लिए कैसी विशाल और सुव्यवस्थित तैयारी की जा रही है.

इस सुरंग का निर्माण राजस्थान से लाए गए 2.7 टन वजनी नक्शीदार पत्थरों से किया गया है. इसकी ऊंचाई 6 फीट और चौड़ाई 8 फीट है, जिससे सैकड़ों श्रद्धालु एक साथ आसानी से इसमें प्रवेश कर सकते हैं. दीवारों पर की गई सजावट मंदिर की थीम और शिल्प से मेल खाती है, जिससे यह एक आध्यात्मिक यात्रा जैसा अनुभव देती है.

क्या बोले प्रोजेक्ट मैनेजर?

निर्माण कर रही कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर विनोद मेहता ने जानकारी दी है कि परकोटे का निर्माण कार्य अक्टूबर तक पूरा हो जाएगा. अनुमान है कि जब मंदिर पूरी तरह खुल जाएगा, तो प्रतिदिन डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालु यहां दर्शन और परिक्रमा के लिए आएंगे. ऐसे में भीड़ प्रबंधन और भक्तों की सुविधा के लिए यह सुरंग एक गेमचेंजर साबित हो सकती है.

भीड़ के दबाव से मिलेगी निजात

सिंह द्वार के पास बनी इस सुरंग से श्रद्धालु प्रवेश करते ही सीधे परिक्रमा मार्ग में पहुंच जाएंगे. इससे मंदिर में भीड़ का दबाव कम होगा और हर व्यक्ति को बिना बाधा के दर्शन और परिक्रमा का अवसर मिल सकेगा.

यह सुरंग केवल पत्थरों की संरचना नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा सेतु है, जो श्रद्धा, भव्यता और तकनीकी आधुनिकता को एक साथ जोड़ता है. श्रीराम के चरणों में पहुंचने का यह नया रास्ता, भक्तों की आस्था को और गहराई देगा.

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