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पूतना जैसी क्रूर, शव से आंख निकालकर लगाती थी ठहाके; दस्यु सुंदरी कुसुमा की मौत पर इस गांव में मनी दिवाली

उत्तर प्रदेश में औरैया के अस्ता गांव के लोग आज बेहद खुश हैं. गांव वालों की यह खुशी कुख्यात दस्यु सुंदरी कुसुमा नाइन की मौत की वजह से है. 41 साल पहले कुसुमा नाइन ने इस गांव में भयानक नरसंहार किया था. उसने दिन दहाड़े गांव के बच्चे बूढों समेत 14 लोगों को लाइन में खड़ा कर गोली मार दिया था. यही नहीं, अपने साथियों से दो लोगों की आंखें भी निकलवा ली थी. इसके बाद इन लोगों के शव के चारों ओर घूमते हुए ठहाके लगाए थे. जाते जाते इस डकैत ने गांव में आग लगा दिया था.

टीबी की बीमारी की वजह से पीजीआई में भर्ती कुसुमा नाइन की मौत की खबर जैसे इस गांव में पहुंची, लोग खुशी से झूम उठे. लोगों ने गांव के चबूतरे पर घी के दीये जलाए. गांव वालों के मुताबिक बीते 41 वर्षों से कुसुमा की जिंदगी उन्हें खटक रही थी. गांव के लोगों ने बताया कि 41 साल पहले की वह घटना उन्हें आज भी इस प्रकार याद है, मानों अभी कल की बात हो. बता दें कि बेहमई कांड में दस्यु सुंदरी फूलन देवी ने 22 लोगों को लाइन में खड़ा कर गोली मार दिया था.

1984 में किया था नरसंहार

इस नरसंहार का बदला लेने के लिए कुसुमा नाइन ने साल 1984 में मल्लाहों के गांव अस्ता में इस सामूहिक नरसंहार को अंजाम दिया. इस गांव की रहने वाली बुजुर्ग महिला रामकुमारी ने बताया कि कुसुमा ने उनके परिवार के दो लोगों को गोली मारी थी. उनके उसके पति बांकेलाल और ससुर रामेश्वर शामिल थे. उन्हें कुसमा घर से उठाकर ले गई और गांव के 12 अन्य लोगों के साथ लाइन में खड़ा कर गोलियों से भून दिया था. इस दौरान कुसुमा ने दो लोगों के शवों से आंखें निकलवा ली और फिर ठहाके लगाए थे.

12 साल में हो गई विधवा

रामकुमारी कहती हैं कि उस समय उनकी शादी के केवल 12 साल हुए थे और कुसुमा ने उन्हें विधवा बना दिया था. उसी दिन से वह हर पल उसकी मौत के लिए भगवान से प्रार्थना कर रही थीं. इसी गांव के रहने वाले प्रेमचंद कहते हैं कि वह घटना उनके आंखों के सामने हुई थी. कहा कि उन्हें बेहमई कांड तो नहीं पता, लेकिन इतना जरूर पता है कि उस घटना का बदला कुसुमा ने उनके परिवार वालों से लिया था. इसके लिए गांव में लालाराम और कुसुमा नाइन ने दो बार मीटिंग भी की थी. कहा कि उस घटना के बाद गांव के लोग दहशत के मारे भाग गए थे. फिर सरकार ने अपने तरीके से शवों का अंतिम संस्कार किया था.

धोखे से बुलाकर मारी थी गोली

आस्ता गांव की ही रहने वाली बुजुर्ग महिला सोमवती ने बताया कि सभी लोगों को धोखे से बुलाया गया था. समझौते के नाम पर उन्हें एक जगह इकट्ठा किया गया और फिर गोली मार दी गई. सोमवती कहती हैं कि इस वारदात में उसके पिता, ताऊ और चाचा मारे गए थे. उस घटना के बाद से वह रोज भगवान से प्रार्थना करती थी कि कुसुमा को गंदी मौत मिले, आखिर भगवान ने उनकी सुन ली. वह तिल-तिल कर मरी है. इस खुशी में पूरे गांव में घी के दीये जलाए जा रहे हैं.

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