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कब होगी ग्वालियर के कॉन्स्टेबल पर कार्रवाई, अर्चना तिवारी को बार बार क्यों बुलाता था Gwalior?

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भोपाल: कटनी से नेपाल तक… एक लड़की की तलाश ने पूरे प्रदेश को हिला दिया। लेकिन इस कहानी में सिर्फ गुमशुदगी का रहस्य नहीं था, बल्कि एक वर्दीधारी का नाम भी बार-बार गूंजता रहा, और वो नाम है, कांस्टेबल राम सिंह तोमर का।

गुमशुदगी की गुत्थी
इंदौर में हॉस्टल में रह रही अर्चना तिवारी रक्षाबंधन से दो दिन पहले घर के लिए निकली, लेकिन घर पहुंची नहीं। उसके नेपाल में मिलने तक परिवार, पुलिस और पूरा प्रदेश दुविधा में रहा।

कांस्टेबल की एंट्री
जांच के दौरान सामने आया कि उसी दिन अर्चना का इंदौर से ग्वालियर का टिकट बुक कराया गया था। टिकट कराने वाले का नाम था कांस्टेबल राम सिंह तोमर। ग्वालियर में जीआरपी में तैनात यह पुलिसकर्मी अचानक कहानी का हिस्सा बन गया।

अर्चना का बयान
अर्चना ने साफ कहा कि राम तोमर मुझे लगातार कॉल और मैसेज करके परेशान करता था। उसने कभी मेरी सहमति के बिना टिकट तक बुक कर दिया। मैंने उसका चेहरा तक नहीं देखा, फिर भी वह मुझे ग्वालियर बुलाने पर अड़ा रहता था।

पुलिस की सफाई बनाम सवाल
पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि गुमशुदगी से राम तोमर का कोई लेना-देना नहीं। लेकिन अर्चना का बयान बताता है कि मामला सिर्फ गुमशुदगी नहीं, बल्कि सीरियस मिसबिहेवियर का है।

अब असली सवाल, कब होगी कॉन्स्टेबल पर कार्रवाई?  
क्या पुलिस अपने ही कांस्टेबल पर कार्रवाई करेगी? क्या वर्दी का दबाव कानून से बड़ा है? क्या महिला सुरक्षा के दावों के बीच ऐसी शिकायतें दबा दी जाएंगी? ये सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि अभी तक कांस्टेबल पर कोई आधिकारिक कार्रवाई नहीं हुई है। लेकिन जनता और महिला संगठनों का दबाव है कि अगर आरोपी आम इंसान होता तो केस दर्ज हो चुका होता, तो फिर पुलिस वाले पर क्यों ढिलाई?

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