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लड़कियां छोटे कपड़े पहनती हैं, माता-पिता जिम्मेदार… उज्जैन के मंदिर के बाहर लगा अजीब पोस्टर

धार्मिक नगरी उज्जैन से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित अति प्राचीन बड़े गणेश मंदिर पर लगा एक पोस्टर इन दिनों काफी सुर्खियों में है. इस पोस्टर के माध्यम से उन सभी माता-पिता पर सवाल उठाए गए हैं, जो कि अपने बच्चों को आधुनिकता के नाम पर अश्लील और छोटे कपड़े पहनाते हैं. यह पोस्टर किसने और क्यों लगाया यह तो अब तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन पोस्टर में पूछी गई बातों के कारण मंदिर में आने वाले भक्त ही नहीं बल्कि यहां के पुजारी भी इन बातों का समर्थन करते नजर आ रहे हैं.

मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले से 50 किलोमीटर दूर बिरलाग्राम नागदा में बड़े गणेश का मंदिर स्थित है, जो की लगभग 100 साल पुराना बताया जाता है. इस मंदिर पर प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु भगवान श्री गणेश के दर्शन करने आते हैं. हालांकि, इन दिनों मंदिर में किसी जन जागरण समिति द्वारा लगाया गया एक पोस्टर काफी चर्चा का विषय बना हुआ है. इस पोस्टर में लड़कियों के पहनावे पर सवाल उठाए गए हैं और छोटे-छोटे कपड़े पहने जाने को भी अनुचित बताते हुए इसका विरोध किया गया है.

‘पोस्टर में लिखी बात 100 प्रतिशत ठीक’

मंदिर के पुजारी से लेकर यहां सेवा देने वाले किसी भी व्यक्ति को यह पता नहीं है कि यह पोस्टर किसने और आखिर कब लगाया है. मंदिर में आने वाले भक्त इस पोस्टर को देख रहे हैं और इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं. अखिल भारतीय पुजारी महासंघ और महाकाल मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने इस पोस्टर का समर्थन किया है. पंडित शर्मा का कहना है कि पोस्टर में लिखी गई हर बात 100 प्रतिशत सही है.

मंदिर हमारी आस्था का प्रतीक है, लेकिन कुछ लोग यहां बरगुंडे और नाइट सूट में ही भगवान के दर्शन करने आ जाते हैं. छोटी-छोटी बच्चियों से लेकर युवतियां तक ऐसे कपड़े पहनकर मंदिर में दर्शन करने आती हैं, जो कि सनातन धर्म का परिचायक बिल्कुल भी नहीं है. हमें बच्चों को ही नहीं बल्कि खुद को भी सभ्य कपड़े पहनना चाहिए जो की हमारा सुरक्षा कवच भी है. हमें बेटियों को स्वतंत्र विचार की आजादी देना चाहिए ना की अभद्र व अश्लील कपड़े पहनने की.

मां-बाप को बताया दोषी

इस पोस्ट पर लिखी बातों से यही बात सामने आती है कि जो अनुचित कपड़े इन दिनो छोटी-छोटी लड़कियां और युवतियां पहन रही है वह पूरी तरह अनुचित है. छोटे कपड़े पहनने को आधुनिकता का प्रतीक नहीं माना जा सकता है. अगर लड़कियां अश्लील कपड़े पहनती है तो उसके लिए मां ही नहीं बल्कि पिता भी जिम्मेदार है क्योंकि इसके लिए पिता की भी मोन स्वीकृति होती है।

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