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राजस्थान कैबिनेट का ऐतिहासिक फैसला, UCC और ‘ट्री राजस्थान प्रोटेक्शन एक्ट’ को मिली हरी झंडी

जयपुर (राजस्थान): आगामी पंचायत एवं निकाय चुनावों की आदर्श आचार संहिता लागू होने से पूर्व राजस्थान सरकार की कैबिनेट बैठक में कई बड़े और ऐतिहासिक नीतिगत निर्णयों पर मुहर लगाई गई।

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में ‘समान नागरिक संहिता’ (Uniform Civil Code – UCC) और ‘ट्री राजस्थान प्रोटेक्शन एक्ट’ (Tree Rajasthan Protection Act) के प्रारूप को औपचारिक मंजूरी दे दी गई है। राज्य सरकार इन दोनों महत्वपूर्ण विधेयकों को आगामी 20 अगस्त से प्रारंभ हो रहे विधानसभा सत्र में पटल पर रखेगी।

📜 उत्तराखंड, गुजरात और असम का अध्ययन कर बना UCC, आदिवासी व जनजाति समुदाय को रखा गया बाहर

राज्य के कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने फैसलों की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि उत्तराखंड, गुजरात और असम राज्यों के मॉडल्स का गहन अध्ययन करने के पश्चात राजस्थान में UCC कानून का अनुमोदन किया गया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कानून का प्राथमिक उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन रिलेशनशिप की कानूनी व्यवस्था को सुदृढ़, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है। सामाजिक और सांस्कृतिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए आदिवासी एवं अनुसूचित जनजाति (ST) क्षेत्र के पारंपरिक रीति-रिवाजों और रूढ़ियों को इस कानून के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है।

💍 60 दिनों के भीतर विवाह का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य, लिव-इन और तलाक की जानकारी न देने पर 10 हजार जुर्माना

प्रस्तावित UCC कानून के प्रावधानों के अनुसार, राज्य में सभी नागरिकों के लिए विवाह का पंजीकरण (Marriage Registration) 60 दिनों के भीतर कराना अनिवार्य होगा।

इसके साथ ही लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationship) की शुरुआत और उसकी समाप्ति दोनों की विधिवत सूचना निर्धारित प्राधिकरण को देनी होगी। तलाक का रजिस्ट्रेशन भी अनिवार्य कर दिया गया है। तय समय सीमा में वैधानिक पंजीकरण नहीं कराने अथवा नियमों का उल्लंघन करने पर 10 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना लगाने का कड़ा प्रावधान किया गया है।

🚫 बहुविवाह (एक से अधिक शादी) पर पूर्ण प्रतिबंध, पुनर्विवाह की छूट और बेटा-बेटी को संपत्ति में समान अधिकार

कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि UCC कानून लागू होते ही प्रदेश में बहुविवाह (Polygamy) पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लग जाएगा।

यद्यपि, पुनर्विवाह (Remarriage) करने की पूरी विधिक स्वतंत्रता रहेगी। संपत्ति के उत्तराधिकार नियमों में ऐतिहासिक सुधार करते हुए सभी धर्मों में अब पुत्र और पुत्रियों (बेटा-बेटी) को माता-पिता की संपत्ति में पूर्णतः समान अधिकार प्रदान किया जाएगा, जिससे लैंगिक असमानता समाप्त होगी।

🏠 पिता के सामने बेटे की मृत्यु होने पर अब पोते को भी मिलेगा संपत्ति का पूरा हक

उत्तराधिकार के नियमों की एक बड़ी विसंगति को दूर करते हुए कानून मंत्री ने स्पष्ट किया कि पहले यदि पिता के जीवित रहते पुत्र की मृत्यु हो जाती थी, तो पोते को दादा की संपत्ति में सीधा अधिकार मिलने में कानूनी अड़चनें आती थीं।

किंतु अब नए UCC कानून में पोते को भी संपत्ति में पूर्ण और न्यायसंगत अधिकार प्रदान किया गया है। इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण हेतु लाए गए ‘ट्री राजस्थान प्रोटेक्शन एक्ट’ के तहत दोषी पाए जाने पर 1 लाख रुपये का जुर्माना और 1 वर्ष के कारावास का प्रावधान किया गया है, जो 500 वर्ग मीटर से अधिक की व्यक्तिगत भूमि पर भी लागू होगा।

🌲 बिना अनुमति पेड़ काटने पर सख्त पाबंदी, काटने पर लगाने होंगे 10% अतिरिक्त पौधे

कानून मंत्री ने रेखांकित किया कि नए ट्री प्रोटेक्शन एक्ट के अनुसार, यदि किसी कारणवश पेड़ काटना अनिवार्य हो, तो सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति प्राप्त करनी होगी।

अनुमति मिलने की दशा में संबंधित व्यक्ति अथवा संस्था को काटे गए पेड़ों की तुलना में 10% अतिरिक्त नए पौधे लगाने होंगे और उनका संरक्षण सुनिश्चित करना होगा। यदि कोई व्यक्ति पौधारोपण में असमर्थता व्यक्त करता है, तो उसे सरकार द्वारा निर्धारित क्षतिपूर्ति राशि जमा करानी होगी, जिससे सरकार स्वयं उस क्षेत्र में पौधारोपण कराएगी।

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