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यूएस सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: ट्रंप के मेल-इन वोटिंग एग्जीक्यूटिव ऑर्डर को मिली अंतरिम राहत, कानूनी लड़ाई जारी

वॉशिंगटन: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस एग्जीक्यूटिव ऑर्डर (कार्यकारी आदेश) से जुड़े मामले में ट्रंप प्रशासन को अंतरिम राहत दी है, जिसमें मेल-इन वोटिंग की प्रक्रियाओं पर नए प्रतिबंध लगाने का प्रावधान किया गया था।

हालांकि, यह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि आगामी चुनावों से पूर्व इसे किस स्तर तक प्रभावी बनाया जा सकेगा। इस अंतरिम आदेश के बाद विभिन्न अदालतों में अन्य कानूनी चुनौतियां पेश की जा सकती हैं, जिससे इस नीति के अमल की गति प्रभावित हो सकती है। अमेरिकी डाक सेवा (USPS) ने स्पष्ट किया है कि इतने बड़े प्रशासनिक बदलावों को तुरंत लागू करने के लिए समय की अत्यधिक कमी है।

⚖️ आदेश की कानूनी वैधता पर अंतिम फैसला बाकी, तीन जजों की असहमति

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और न्यायिक रुख:

  • अधिकार क्षेत्र पर आदेश: शीर्ष अदालत के कंजर्वेटिव बहुमत ने एग्जीक्यूटिव ऑर्डर की अंतिम संवैधानिक वैधता पर कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया, बल्कि प्रक्रियागत आधार पर राज्यों की तत्काल चुनौती पर सवाल उठाए।

  • अदालत की टिप्पणी: पीठ ने अपने अहस्ताक्षरित आदेश में स्पष्ट किया कि वर्तमान रुख का अर्थ यह नहीं है कि नीति लागू करने का हर सरकारी कदम स्वतः वैध माना जाएगा।

  • असहमति: सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों ने इस निर्णय से असहमति व्यक्त की।

📜 23 राज्यों के डेमोक्रेटिक अधिकारियों ने दी थी चुनौती, संघवाद का उठाया मुद्दा

राज्यों की कानूनी आपत्तियां:

  • संवैधानिक अधिकार: 23 राज्यों और डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया के अधिकारियों ने इस आदेश को रोकते हुए अदालत का रुख किया था। उनका तर्क था कि अमेरिकी संविधान चुनाव संचालन का प्राथमिक दायित्व राज्यों और कांग्रेस को सौंपता है।

  • तैयारियों में व्यवधान: राज्य निर्वाचन अधिकारियों का कहना था कि चुनाव प्रक्रियाओं के संचालन के मध्य में इस तरह के बड़े प्रशासनिक फेरबदल से व्यवस्था में बाधा उत्पन्न हो सकती है।

  • अदालती रोक: पूर्व में मैसाचुसेट्स की एक संघीय अदालत ने इस व्यवस्था पर राष्ट्रव्यापी रोक लगाने का आदेश दिया था, जिसे लेकर न्याय विभाग ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

📬 मेल-इन बैलेट का बढ़ता उपयोग और सुरक्षा से जुड़े अध्ययन

मेल वोटिंग की स्थिति और आंकड़े:

  • वोटरों में प्राथमिकता: आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के मतदाताओं के बीच डाक मतपत्रों (Mail Ballots) का उपयोग निरंतर देखा गया है।

  • सुरक्षा एवं प्रमाण: अध्ययनों और स्वतंत्र समीक्षाओं ने स्पष्ट किया है कि डाक मतपत्रों की जांच और प्रमाणीकरण की व्यवस्थाएं सुरक्षित व पारदर्शी मानकों पर आधारित हैं।

  • आगे की राह: चुनाव से जुड़े नियमों और प्रक्रियाओं पर विभिन्न राज्यों के स्थानीय नियमों और न्यायिक अपीलों के आधार पर कानूनी स्थिति तय होगी।

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