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पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण के लिए पहली बार बनी नीति, 6 माह से शासन की मंजूरी का इंतजार

भोपाल (मध्य प्रदेश): राज्य में विभिन्न स्तरों के पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रशिक्षण को आधुनिक व व्यवस्थित बनाने के लिए पुलिस मुख्यालय (PHQ) ने पहली बार एक व्यापक प्रशिक्षण नीति तैयार की है।

हालांकि, पिछले छह महीनों से इस नीति को राज्य शासन से औपचारिक मंजूरी नहीं मिल पाई है और यह प्रस्ताव अभी परीक्षण की प्रक्रिया में अटका हुआ है। प्रस्तावित नीति में पुलिस प्रशिक्षण प्रणाली को मजबूत करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कई ऐतिहासिक और प्रभावी बदलावों के प्रविधान शामिल किए गए हैं।

📚 पाठ्यक्रम में 5 वर्ष तक नहीं होगा बदलाव: मनमर्जी से सामग्री जोड़ने पर लगेगी रोक

सिलेबस और प्रशिक्षण सामग्री में स्थिरता के नियम:

  • 5 साल का लॉक-इन पीरियड: नीति का सबसे अहम बिंदु यह है कि प्रशिक्षण के मूलभूत पाठ्यक्रम (Syllabus) में कम से कम 5 वर्षों तक कोई मनमाना परिवर्तन नहीं किया जाएगा।

  • मनमर्जी पर अंकुश: पूर्व में अधिकारी अपनी रुचि या प्राथमिकताओं के अनुसार बीच-बीच में नई सामग्री जोड़ देते थे, जिससे प्रशिक्षक (Trainers) नए विषयों के अनुरूप समय पर तैयार नहीं हो पाते थे।

  • सामंजस्य में सुधार: बार-बार बदलाव होने से सैद्धांतिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण के बीच समन्वय बिगड़ जाता था, जिसे दूर करने के लिए अर्धसैनिक बलों व अन्य राज्यों की नीतियों का अध्ययन कर यह ड्राफ्ट बनाया गया है।

  • डीजीपी की मंजूरी: तत्कालीन एडीजी (प्रशिक्षण) राजा बाबू सिंह द्वारा तैयार किए गए इस प्रस्ताव को डीजीपी कैलाश मकवाणा के अनुमोदन के बाद शासन को भेजा गया था।

⏳ अधिकारियों और प्रशिक्षकों का 2 वर्ष का कार्यकाल सुरक्षित, मिलेगा अतिरिक्त भत्ता

प्रशिक्षकों की नियुक्ति, सुविधाएं और बजट प्रविधान:

  • तय कार्यकाल: नीति में यह स्पष्ट प्रस्ताव है कि प्रशिक्षण अकादमियों और केंद्रों में पदस्थ होने वाले अधिकारियों व प्रशिक्षकों को कम से कम 2 वर्ष तक वहां से स्थानांतरित नहीं किया जाएगा।

  • मेरिट आधारित पदस्थापना: केवल उत्कृष्ट सेवा रिकॉर्ड और दक्ष कार्यप्रणाली वाले अधिकारियों व कर्मचारियों को ही प्रशिक्षण केंद्रों में ट्रेनर के रूप में तैनात किया जाएगा।

  • विशेष भत्ता: प्रशिक्षण कार्य को प्रोत्साहन देने के लिए इन अधिकारियों को नियमित वेतन के अतिरिक्त विशेष प्रोत्साहन भत्ता देने का प्रविधान है।

  • इंफ्रास्ट्रक्चर बजट: प्रशिक्षण केंद्रों के आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीकी उपकरणों और आवासीय सुविधाओं के विकास के लिए एक अलग स्वतंत्र बजट आवंटित करने की सिफारिश भी की गई है।

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