
नागपंचमी पर आस्था का महासैलाब: नागलवाड़ी भिलट देव में 4 लाख भक्तों ने टेका मत्था; महाकाल पहुंचे क्रिकेटर उमेश यादव
बड़वानी (मध्य प्रदेश): निमाड़ अंचल के प्रसिद्ध और ऐतिहासिक तीर्थ स्थल नागलवाड़ी स्थित बाबा भिलट देव शिखरधाम में नागपंचमी के महापर्व पर श्रद्धा और आस्था का अभूतपूर्व सैलाब देखने को मिला।
सोमवार को नागपंचमी के अवसर पर 4 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा के दरबार में हाजिरी लगाई। रविवार सुबह से ही भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया था और सोमवार तड़के तक ही करीब 70 हजार श्रद्धालु दर्शन कर चुके थे। रिमझिम फुहारों और 4 किलोमीटर लंबी दुर्गम पहाड़ी चढ़ाई के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ और पूरा क्षेत्र ‘जय बाबा भिलट देव’ के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा।
🥛 101 लीटर दूध से अभिषेक, विशेष चोला श्रृंगार और 108 व्यंजनों का लगा महाभोग
शिखरधाम के मुख्य पुजारी राजेंद्र बाबा के अनुसार, नागपंचमी महापर्व के उपलक्ष्य में मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए गए:
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दुग्धाभिषेक: नागपंचमी की पूर्व संध्या पर रात 10 बजे से बाबा भिलट देव का 101 लीटर गाय के ताजे दूध से महाभिषेक किया गया।
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श्रृंगार व महाआरती: सोमवार तड़के 4 बजे विशेष चोला श्रृंगार किया गया और ब्रह्म मुहूर्त में भव्य महाआरती संपन्न हुई।
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महाभोग वितरण: आरती के बाद बाबा को 108 प्रकार के पारंपरिक पकवानों और व्यंजनों का महाभोग लगाकर श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया।
📜 800 साल पुराना गौरवमयी इतिहास और बाबा भिलट देव की पौराणिक लोककथा
बाबा भिलट देव का इतिहास करीब 800 वर्ष पुराना माना जाता है।
प्रचलित मान्यताओं के अनुसार, उनका जन्म हरदा जिले के रोलगांव-पाटन क्षेत्र में एक शिवभक्त गवली परिवार में हुआ था। वर्षों तक संतान न होने पर माता-पिता की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया था। लोककथा के अनुसार, भगवान शिव के मार्गदर्शन में उनकी शिक्षा-दीक्षा हुई और आगे चलकर वे एक महान सिद्ध पुरुष एवं नाग देवता के स्वरूप में प्रतिष्ठित हुए। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मन्नत अवश्य पूरी होती है।
🛡️ 155 से अधिक CCTV कैमरों से निगरानी, 2000 वॉलंटियर्स और पुलिस बल तैनात
विशाल जनसमूह को नियंत्रित करने और सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रखने के लिए निमाड़ रेंज की डीआईजी सिमाला प्रसाद, एसपी पद्म विलोचन शुक्ल, एडिशनल एसपी धीरज बब्बर और सेंधवा एसडीओपी अजय वाघमारे ने स्वयं मोर्चा संभाला।
सुरक्षा के मद्देनजर 155 से अधिक सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन से निगरानी की गई। पुलिस बल के साथ मंदिर समिति के 2 हजार से अधिक स्वयंसेवकों को तैनात किया गया ताकि श्रद्धालुओं को पेयजल, चिकित्सा, बिजली और सुगम यातायात व्यवस्था मिल सके।
🏏 उज्जैन में क्रिकेटर उमेश यादव ने किए महाकाल और नागचंद्रेश्वर के दर्शन
धार्मिक नगरी उज्जैन में नागपंचमी और सावन के तीसरे सोमवार के दुर्लभ संयोग पर भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज उमेश यादव अपनी पत्नी तान्या वाधवा के साथ श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे।
उन्होंने भस्म आरती में सहभागिता की और वर्ष में सिर्फ एक दिन नागपंचमी पर खुलने वाले भगवान नागचंद्रेश्वर के पट पर शीश नवाया। मीडिया से चर्चा में उमेश यादव ने कहा कि सावन सोमवार और नागपंचमी पर महाकाल और नागचंद्रेश्वर के एक साथ दर्शन पाना उनके लिए सौभाग्य और परम आनंद का क्षण है।
🐍 विदिशा के ऐतिहासिक नागेश्वर धाम में उमड़े श्रद्धालु, संतान प्राप्ति की मान्यता
विदिशा के रायसेन गेट (किला अंदर) स्थित सैकड़ों वर्ष पुराने ऐतिहासिक नाग मंदिर (नागेश्वर धाम) में भी सुबह से ही जलाभिषेक और पूजन के लिए भक्तों की लंबी कतारें देखी गईं।
मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित नारायण प्रसाद शर्मा ने बताया कि इस प्राचीन सिद्ध पीठ के प्रति मान्यता है कि जिन निसंतान दंपत्तियों को संतान सुख नहीं मिल पाता, वे यहां आकर मन्नत मांगते हैं तो उनकी मनोकामना पूर्ण होती है। जनश्रुतियों के अनुसार, प्राचीन काल में इस स्थान पर 30 फीट लंबे दिव्य शेषनाग के साक्षात दर्शन होते थे।

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