
छत्तीसगढ़ में फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र पर सरकारी नौकरी करने वालों पर शिकंजा: साय सरकार कराएगी 186 मामलों की मेडिकल जांच
रायपुर (छत्तीसगढ़): फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी सेवाओं में लाभ लेने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों पर छत्तीसगढ़ शासन ने सख्त शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है।
राजधानी रायपुर में समाज कल्याण विभाग और स्वास्थ्य विभाग की उच्चस्तरीय संयुक्त बैठक में एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया गया। इसके तहत दिव्यांग कोटे से नौकरी हासिल करने वाले 186 संदिग्ध मामलों की मेडिकल बोर्ड के जरिए दोबारा सघन जांच कराने पर सहमति बनी है। इसके लिए आवश्यकतानुसार राज्य और संभाग स्तर पर विशेष मेडिकल बोर्ड गठित किए जाएंगे और तय समय-सीमा के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।
📋 186 संदिग्ध मामलों का होगा भौतिक सत्यापन, GAD के दिशा-निर्देशों से होगी जांच
सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा तय किए गए कड़े मानकों के अनुरूप सत्यापन प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा:
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बोर्ड के समक्ष पेशी अनिवार्य: दिव्यांगता कोटे के तहत शासकीय सेवा में कार्यरत सभी 186 संदिग्ध कार्मिकों को मेडिकल बोर्ड के सामने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना शारीरिक व मेडिकल परीक्षण कराना होगा।
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समय-सीमा का निर्धारण: निर्धारित समय पर उपस्थित न होने वाले या जांच में टालमटोल करने वाले कर्मचारियों के मामलों की भी विशेष समीक्षा की जाएगी।
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पारदर्शी प्रक्रिया: सरकार ने स्पष्ट किया है कि जांच की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी, जिससे केवल वास्तविक दिव्यांगों के अधिकार सुरक्षित रहें और फर्जीवाड़े की सटीक पहचान हो सके।
⚖️ गड़बड़ी मिलने पर बर्खास्तगी और विधिक कार्रवाई, फर्जीवाड़े पर सीधा प्रहार
राज्य शासन ने स्पष्ट किया है कि मेडिकल जांच को लेकर एक विस्तृत व सख्त गाइडलाइन जारी की जा रही है:
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प्रमाण-पत्रों की वास्तविकता की परख: राज्य मेडिकल बोर्ड और संभागीय मेडिकल बोर्ड के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम संबंधित कर्मचारियों के पुराने प्रमाण-पत्रों और उनकी वास्तविक शारीरिक स्थिति का मिलान करेगी।
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कड़ी विधिक कार्रवाई: यदि जांच में दिव्यांगता का दावा झूठा या प्रमाण-पत्र फर्जी पाया जाता है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ सेवा समाप्ति और नियमानुसार वैधानिक आपराधिक कार्रवाई की जाएगी।
🏥 दूरदराज के इलाकों में पहुंचेगा मेडिकल बोर्ड, गांव-गांव लगेंगे UDID शिविर
फर्जीवाड़े की जांच के साथ-साथ वास्तविक और जरूरतमंद दिव्यांगों को सहूलियत देने के लिए भी योजना बनाई गई है:
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ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष शिविर: दूरदराज और वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले वास्तविक दिव्यांगजनों को दिव्यांगता प्रमाण-पत्र और यूडीआईडी (UDID) कार्ड बनवाने के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए ग्रामीण इलाकों में विशेष परीक्षण शिविर लगाए जाएंगे।
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निजी विशेषज्ञों की मदद: सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी होने पर निजी क्षेत्र के योग्य विशेषज्ञों की सेवाएं अनुबंधित करने पर भी सहमति बनी है।
🌈 ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए अलग वार्ड, SRS सर्जरी और आर्थिक सहायता पर मंथन
बैठक में सामाजिक न्याय की दिशा में ट्रांसजेंडर समुदाय के स्वास्थ्य कल्याण को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चाएं हुईं:
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SRS सर्जरी पर वित्तीय अनुदान: ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए सेक्स रीअसाइनमेंट सर्जरी (SRS) से जुड़ी आर्थिक सहायता की दरों को मौजूदा बाजार दरों के अनुसार संशोधित करने पर विचार किया गया।
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अस्पतालों में अलग व्यवस्था: राज्य के प्रमुख शासकीय चिकित्सालयों में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए विशेष ट्रांसजेंडर क्लीनिक या अलग वार्ड स्थापित करने की कार्ययोजना पर चर्चा हुई।
💊 नशामुक्ति केंद्रों के संचालन और दवाओं की उपलब्धता पर सरकार की नजर
राज्य में संचालित नशामुक्ति और पुनर्वास केंद्रों की कार्यप्रणाली की भी विस्तृत समीक्षा की गई:
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नियमों का अनुपालन: मानसिक स्वास्थ्य देखरेख अधिनियम, 2017 (Mental Healthcare Act) के कड़े प्रावधानों के तहत केंद्रों के पंजीकरण, संचालन मानकों और उपचार व्यवस्था का मूल्यांकन किया गया।
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दवाइयों की आपूर्ति: नशामुक्ति केंद्रों से उपचार कराकर लौटे व्यक्तियों को निरंतर निगरानी में रखने और उनके लिए नियमित आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष मंथन किया गया।

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