Logo
ब्रेकिंग
फोन नहीं उठाते सीईओ,मीडियाकर्मियों में नाराजगी,ज्ञापन सौंपा Ola Uber Ban Chandigarh: ओला-उबर के लाइसेंस रद्द होने के बाद शुरू हुई 'भारत टैक्सी', जानिए यात्रियों... Haryana News: लगातार चौथी बार देश में अव्वल रही करनाल शुगर मिल, केंद्रीय मंत्रियों ने दी प्रतिष्ठित ... NCC DG Team Selection: हरियाणा के होनहार शूटर विजयन्त ढाण्डा ने बढ़ाया राज्य का मान, देश के टॉप-12 शू... Haryana Road Mishap: नूंह सड़क हादसे में चार लोगों की मौत, पत्नी गंभीर रूप से घायल; पुलिस जांच में ज... Haryana Crime News: पानीपत में اغवा हुआ बच्चा बरामद, एक लाख में बेचने की थी डील; पुलिस ने दो को दबोच... Gurnam Singh Chaduni Mahapanchayat: धान खरीद की मांग पर अड़े किसान, हाईवे पर बीती रात; आज होगी बड़ी ... Patna Mithila Colony Incident: दानापुर में खूनी संघर्ष, शादी से पहले सिपाही भाई ने की आत्महत्या, पुल... Delhi Demolition News: शालीमार बाग मैक्स अस्पताल रोड पर देर रात चला पीला पंजा; भारी पुलिस बल तैनात, ... Monsoon Update 2026: मॉनसून की विदाई के बीच बिगड़ेगा मौसम; मध्य प्रदेश, ओडिशा और पूर्वोत्तर में भारी...
Header Ad

उमरिया का वह ऐतिहासिक गांव जहां कभी राजीव गांधी पहुंचे थे, आज 41 साल से सड़क को तरस रहा

उमरिया (मध्य प्रदेश): जिले का वह ऐतिहासिक गांव जहां 14 जुलाई 1985 को देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी ने खुद पैदल चलकर आदिवासियों का हाल जाना था, आज चार दशकों बाद भी बुनियादी सुविधाओं की बाट जोह रहा है।

उस दौरे के बाद गांव में बिजली और कच्ची मिट्टी की सड़क तो बना दी गई, लेकिन उसके बाद से किसी भी जनप्रतिनिधि या प्रशासनिक अधिकारी ने इस क्षेत्र की सुध नहीं ली। वर्तमान में मानपुर जनपद के अंतर्गत ग्राम पंचायत कोडार में आने वाला यह इलाका पिछले 41 वर्षों से पक्की सड़क और बुनियादी विकास के लिए तरस रहा है।

⚠️ बैगा बाहुल्य क्षेत्र और आरक्षित सीट, फिर भी 700 मीटर पक्की सड़क का सपना अधूरा

सरकारें आदिवासी उत्थान और विशेष संरक्षित बैगा, भारिया व सहरिया जनजातियों के कल्याण के बड़े-बड़े दावे करती हैं, लेकिन धरातल की सच्चाई अलग है:

  • जनप्रतिनिधि और सत्ता: मानपुर (एसटी आरक्षित) विधानसभा क्षेत्र से लगातार भाजपा का प्रतिनिधित्व रहा है। यहां की विधायक मीना सिंह पूर्व में आदिम जाति कल्याण विभाग की कैबिनेट मंत्री भी रह चुकी हैं।

  • अधूरी मांग: इस क्षेत्र में विशेष संरक्षित बैगा जनजाति के परिवार निवास करते हैं, जो पिछले कई वर्षों से महज 700 मीटर पक्की सड़क की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।

  • प्रशासनिक अनदेखी: ग्रामीणों के साथ-साथ जिला पंचायत उपाध्यक्ष द्वारा भी पत्र लिखकर सड़क निर्माण की गुहार लगाई गई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है।

🌧️ 700 मीटर सड़क के लिए 41 साल का इंतजार, कीचड़ से जंग लड़कर स्कूल जाते हैं बच्चे

बरसात के दिनों में लगभग 1 किलोमीटर का यह कच्चा रास्ता दलदल में तब्दील हो जाता है:

  • शिक्षा पर असर: स्कूली बच्चों को रोजाना कीचड़ और पानी से होकर स्कूल जाना पड़ता है, जिससे उनकी ड्रेस और किताबें खराब हो जाती हैं। कई बार बच्चे फिसलकर चोटिल भी हो रहे हैं।

  • स्वास्थ्य सेवाओं में बाधा: पक्की सड़क न होने के कारण गांव के भीतर कोई चारपहिया वाहन या एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती।

  • प्रसूताओं की मुसीबत: प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिलाओं और गंभीर मरीजों को ग्रामीण खाट या गोद में उठाकर मुख्य मार्ग तक पहुंचाने को विवश हैं।

🗣️ ‘कलेक्टर से विधायक तक लगाई गुहार, पर कोई नहीं सुनता’ — ग्रामीणों का दर्द

गांव के स्थानीय निवासियों ने अपनी व्यथा साझा करते हुए व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं:

  • रामू बैगा: “तीन से चार गांवों के लोगों का यही रास्ता है। डिलीवरी वाली महिलाओं को ले जाना बहुत मुश्किल होता है। हमने विधायक, कलेक्टर, सरपंच सबको आवेदन दिए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।”

  • गज्जू बैगा: “कोडार पंचायत में हम 15 घर बैगा समाज के लोग रहते हैं। हमें सड़क और पानी दोनों की गंभीर समस्या है। सचिव ने अपने घर तक सड़क बनवा ली, लेकिन हम आज भी इस बदहाली में जीने को मजबूर हैं।”

  • पिंकी यादव: “रास्ता इतना खराब है कि आते-जाते समय लोग गिरकर हाथ-पैर तुड़वा बैठते हैं। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। हमारी मांग है कि जल्द से जल्द इस सड़क का पक्का निर्माण कराया जाए।”

📋 चुनावी दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा फासला, कागजों में सिमटा विकास

क्षेत्र के विकास को लेकर किए गए बड़े दावों पर अब सवाल उठने लगे हैं:

  • दावों की हकीकत: चुनाव के दौरान मानपुर विधानसभा क्षेत्र में चहुंमुखी विकास के दावे किए गए थे, लेकिन कोडार ग्राम पंचायत की यह स्थिति उन दावों को आईना दिखा रही है।

  • स्थानीय आक्रोश: ग्रामीणों का कहना है कि बुनियादी सड़क तक न बनना यह साबित करता है कि विकास की अधिकांश योजनाएं केवल कागजों तक ही सीमित रह गई हैं।

Comments are closed.