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इंदौर हाईकोर्ट का अहम फैसला: मकान मालिक तय करेगा अपनी जरूरत, किराएदार नहीं उठा सकता सवाल; खाली करना होगा मकान

इंदौर (मध्य प्रदेश): मकान खाली कराने के विवाद को लेकर हाईकोर्ट पहुंचे एक मामले में अदालत ने मकान मालिक के पक्ष में बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जब मकान मालिक यह प्रमाणित कर दे कि बच्चों की उच्च शिक्षा अथवा परिवार के किसी सदस्य के बेहतर उपचार के लिए उसे किसी विशेष शहर में रहना है, तो उस शहर या स्थान के चयन का फैसला सही है या गलत—यह साबित करने की बाध्यता मकान मालिक पर नहीं है। अपनी आवश्यकतानुसार कौन-सी जगह सबसे उपयुक्त और सुविधाजनक है, इसका अंतिम निर्णय केवल मकान मालिक और उसका परिवार ही तय करेगा। इस टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने किराएदार द्वारा दायर अपील को पूरी तरह निरस्त कर दिया।

🏠 खजराना क्षेत्र की कॉलोनी का मामला: 2003 में किराए पर दिया गया था मकान

यह पूरा विवाद इंदौर के खजराना क्षेत्र स्थित एक आवासीय कॉलोनी से जुड़ा हुआ है:

  • मकान मालिक का पक्ष: मकान मालिक का कहना था कि वर्ष 2003 में उसने अपना मकान ₹1,100 मासिक किराए पर दिया था।

  • खाली कराने का आधार: मकान मालिक ने वास्तविक आवश्यकता (Bonafide Need) के आधार पर बेदखली का मुकदमा दायर किया। उन्होंने बताया कि उनके पति हाई ब्लड प्रेशर (BP) के मरीज हैं और जल्द सेवानिवृत्त होने वाले हैं।

  • बच्चों की पढ़ाई का हवाला: बड़ा बेटा कंपनी सेक्रेटरी (CS) की पढ़ाई कर रहा है और पढ़ाई के सिलसिले में इंदौर में रहना चाहता है, जबकि छोटा बेटा 12वीं कक्षा के बाद इंदौर में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करना चाहता है। इस कारण परिवार को अपने मकान की वास्तविक जरूरत है।

💰 किराएदार के दावे: ₹60 किराया और ₹3 लाख में सौदे की दलील खारिज

किराएदार ने मकान मालिक की दलीलों का विरोध करते हुए कई दावे पेश किए थे:

  • किराए और सौदे का तर्क: किराएदार का दावा था कि मकान का मासिक किराया मात्र ₹60 था, जिसे वह नियमित चुका रहा है। उसने यह भी आरोप लगाया कि वर्ष 2009 में मकान का ₹3 लाख में सौदा तय हुआ था, परंतु संपत्ति के दाम बढ़ने के कारण मकान मालिक अब रजिस्ट्री कराने से पीछे हट रहा है।

  • निचली अदालतों का रुख: विचारण न्यायालय (Trial Court) और प्रथम अपीलीय अदालत ने मकान मालिक की वास्तविक आवश्यकता को सही मानते हुए पहले ही किराएदार को मकान खाली करने का आदेश दिया था।

👨‍⚖️ हाईकोर्ट का कड़ा रुख: बच्चों की पढ़ाई के लिए शहर चुनना मकान मालिक की अपनी पसंद

निचली अदालतों के आदेश को चुनौती देते हुए किराएदार ने हाईकोर्ट में तर्क दिया था कि ऐसा कोई अनिवार्य प्रमाण नहीं है कि सीएस की पढ़ाई के लिए बेटे का इंदौर में ही रहना जरूरी हो:

  • किराएदार का तर्क अमान्य: हाईकोर्ट ने किराएदार की इस दलील को पूरी तरह अनुचित और निराधार करार दिया।

  • अदालत की सख्त टिप्पणी: कोर्ट ने कहा कि यदि मकान मालिक और उसका बेटा यह निर्णय लेते हैं कि संबंधित प्रोफेशनल कोर्स करने के लिए इंदौर शहर उनके लिए अधिक सुविधाजनक है, तो यह विशुद्ध रूप से उनकी व्यक्तिगत पसंद और अधिकार है।

  • याचिका निरस्त: इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने किराएदार की याचिका को सिरे से खारिज करते हुए मकान खाली करने के आदेश को बरकरार रखा।

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