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दिल्ली के कानून मंत्री कपिल मिश्रा को आम आदमी पार्टी से क्यों निकाला गया था?

दिल्ली में 27 साल बाद भारतीय जनता पार्टी सत्ता में काबिज हुई है. दिल्ली की कमान रेखा गुप्ता के हाथों में दी गई है, इसके अलावा 6 मंत्री भी बनाए गए हैं. इनमें कपिल मिश्रा और मनजिंदर सिंह सिरसा 2 मंत्री ऐसे हैं जो दूसरी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे. कपिल आम आदमी पार्टी बनने की शुरुआत से ही जुड़े रहे. एक समय पर वे अरविंद केजरीवाल के बेहद करीबी माने जाते थे, लेकिन पार्टी से पहली बगावत और तीखे हमले उन्होंने ही बोले थे. उन्हें पार्टी ने सही ढंग से काम न करने के आरोप लगाते हुए बाहर का रास्ता दिखा दिया था.

बीजेपी में कपिल मिश्रा को हिंदुत्व के बड़े चेहरे के रूप में देखा जाता है. कपिल मिश्रा ने बीजेपी के टिकट से करावल नगर विधानसभा से आम आदमी पार्टी के मनोज कुमार त्यागी को 23,355 वोटों से हराया है. अपने बयानों को लेकर अक्सर चर्चाओं में रहने वाले कपिल मिश्रा BJP से पहले आम आदमी पार्टी में भी रह चुके हैं. यहां भी वे अपने बयानों के कारण हमेशा चर्चाओं में बने रहते थे.

AAP से बाहर क्यों किए गए थे कपिल मिश्रा?

मई 2017 में कपिल मिश्रा के तेवरों ने अरविंद केजरीवाल समेत पूरी आम आदमी पार्टी के नेताओं की नींद उड़ा दी थी. उन्होंने केजरीवाल पर भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप लगाए थे. हालांकि केजरीवाल पर भ्रष्टाचार के आरोप सिद्ध कभी नहीं हो पाए. कपिल मिश्रा ने अरविंद केजरीवाल पर 2 करोड़ रुपए रिश्वत लेने का आरोप लगाया था. जिसकी शिकायत उन्होंने एसीबी में भी शिकायत की थी, जिसके बाद कपिल मिश्रा को आम आदमी पार्टी ने पहले मंत्री पद से हटाया और उसके बाद पार्टी से भी बाहर कर दिया था. 2019 में कपिल मिश्रा ने आम आदमी पार्टी को छोड़ BJP का दामन थाम लिया था.

पार्टी से निकाले जाने के बाद सत्याग्रह किया, पत्र भी लिखे

आम आदमी पार्टी से निकाले जाने के बाद कपिल मिश्रा ने अपने ही घर में सत्याग्रह किया था, जिसके बाद आप आम आदमी पार्टी ने कहा था कि कपिल अपना काम ढंग से नहीं कर रहे थे, इसलिए उन्हें निकाला गया. केजरीवाल को गुरु बताते हुए मिश्रा ने उस उन्हें दो भावुक पत्र भी लिख थे, जिसका उन्हें कोई जवाब नहीं मिला तो उनकी मां डॉक्टर अन्नपूर्णा मिश्रा ने भी केजरीवाल को एक बेहद मार्मिक पत्र लिखा था. उस समय इस पत्र ने भी खूब सुर्खियां बटोरी थीं.

कपिल मिश्रा ने क्या-क्या आरोप लगाए थे केजरीवाल पर?

  • कपिल मिश्रा ने आरोप लगाया था कि अरविंद केजरीवाल ने पार्टी को मिले चंदे की जानकारी छिपाई है. पार्टी की वेबसाइट में कम चंदा दिखाया और चुनाव आयोग के सामने भी झूठ पेश किया.
  • पार्टी को फर्जी कंपनियों के जरिये चंदा मिला, ये कंपनियां उनके विधायकों और करीबी लोगों की थीं.
  • पार्टी को बेनाम लोगों से मिला चंदा एक्सिस बैंक में जमा कराया गया. एक्सिस की मदद से फर्जीवाड़ा किया है.
  • पार्टी के एक विधायक शिवचरण गोयल की पत्नी की फर्जी कंपनियों से पार्टी को चंदा मिला.
  • फर्जी कंपनियों ने आप को 35-35 करोड़ रुपये के दो चेक दिए.
  • आप ने एक्सिस बैंक से मिलीभगत कर अपने काले धन को ठिकाने लगाया है.

सिटिंग विधायक का टिकट काटकर कपिल को उतारा था मैदान में

कपिल मिश्रा करावल नगर सीट से दूसरी बार चुनकर आए हैं. बीजेपी ने इस सीट पर सिटिंग विधायक का टिकट काटकर मिश्रा को मैदान में उतारा था. कपिल मिश्रा का नाम उस समय सबसे ज्यादा चर्चा में आया जब दिल्ली दंगे हुए थे. हिंदूवादी नेता के तौर पर पहचाने जाने वाले कपिल मिश्रा दिल्ली यूनिवर्सिटी के अंबेडकर कॉलेज से बीए और फिर सोशल वर्क में एमए की पढ़ाई की है.

कपिल मिश्रा, दिल्ली में काम करने वाले ‘यूथ ऑफ जस्टिस’ संगठन के को-फाउंडर भी रहे हैं. यह संस्था युवाओं के लिए काम करती है.

कपिल ने केजरीवाल सरकार को भी कई मुद्दों पर घेरने का काम किया. साल 2023 में उन्हें दिल्ली भाजपा का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था, तभी संकेत मिल गया था कि अब बीजेपी में कपिल मिश्रा का कद और बढ़ने जा रहे हैं.

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