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सरई रेलवे स्टेशन पर कोयला डंपिंग को लेकर MP हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और DRM से मांगा जवाब

जबलपुर (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सिंगरौली जिले के सरई रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर लंबे समय से कोयला और खनन सामग्री डंप किए जाने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्लेटफार्म पर खुलेआम कोयला डंप किए जाने से स्टेशन आने वाले रेल यात्रियों को भारी असुविधा हो रही है और कोयले की धूल से आसपास के ग्रामीणों में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं। हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद केंद्र सरकार और मंडल रेल प्रबंधक (DRM) जबलपुर को नोटिस जारी कर 20 अगस्त तक जवाब पेश करने का निर्देश दिया है।

🚉 प्लेटफार्म पर कोयले का कब्जा, यात्रियों को खड़े होने तक की जगह नहीं

सिंगरौली निवासी अधिवक्ता विजय जायसवाल द्वारा दायर जनहित याचिका में उल्लेख किया गया है कि सरई रेलवे स्टेशन पर कुल दो प्लेटफार्म स्थित हैं।

इनमें से एक प्लेटफार्म के बड़े हिस्से पर स्थानीय कोल माइंस से संबंधित कोयला और अन्य भारी खनन सामग्री अवैध व अव्यवस्थित तरीके से डंप की जा रही है। इस डंपिंग के चलते ट्रेनों का इंतजार करने वाले दैनिक यात्रियों को प्लेटफार्म पर सुरक्षित खड़े होने तक की पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती, जिससे हमेशा दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।

😷 हवा में उड़ रहे कोयले के बारीक कण, 5-6 गांवों के लोग श्वास संबंधी बीमारियों से त्रस्त

याचिका में प्रदूषण के गंभीर खतरे को रेखांकित करते हुए बताया गया है कि खुले में भारी मात्रा में कोयला डंप होने के कारण पूरे क्षेत्र में महीन धूल और कोयले के कण फैल रहे हैं।

इस लगातार प्रदूषण का सीधा दुष्प्रभाव रेलवे यात्रियों के साथ-साथ स्टेशन से सटे 5 से 6 ग्रामीण अंचलों के रहवासियों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। खुले प्रदूषण के कारण स्थानीय निवासियों में दमा, एलर्जी और सांस से जुड़ी गंभीर बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं।

🛑 प्लेटफार्म को डंपिंग मुक्त करने की मांग, अधिवक्ता एसके कश्यप ने की पैरवी

याचिकाकर्ता की ओर से न्यायालय से यह गुहार लगाई गई है कि रेलवे प्लेटफार्म को अविलंब कोयला और खनन डंपिंग से पूरी तरह मुक्त कराया जाए तथा स्टेशन और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण के ठोस और प्रभावी उपाय सुनिश्चित किए जाएं।

मामले में याचिकाकर्ता का पक्ष अधिवक्ता एसके कश्यप ने प्रस्तुत किया। उच्च न्यायालय ने सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के उपरांत संबंधित रेलवे और प्रशासनिक अधिकारियों को नोटिस जारी कर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।

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