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रांची मौसम केंद्र में लगा बिहार-झारखंड का पहला डिस्ड्रोमीटर: अब बूंदों के आकार और रफ्तार का भी होगा सटीक विश्लेषण

रांची (झारखंड): झारखंड में वर्षा के अध्ययन को अब केवल मिलीमीटर की माप तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि बारिश की बूंदों की सूक्ष्म विशेषताओं को गहराई से समझने की शुरुआत हो चुकी है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के रांची स्थित मौसम केंद्र में बिहार-झारखंड क्षेत्र का पहला अत्याधुनिक ‘डिस्ड्रोमीटर’ (Disdrometer) स्थापित किया गया है। इस आधुनिक उपकरण की सहायता से बारिश की बूंदों का सटीक आकार (Drop Size), बूंदों की कुल संख्या और वायुमंडल से जमीन पर उनके गिरने की गति (Fall Velocity) का विस्तृत डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा सकेगा।

⚙️ कैसे कार्य करता है डिस्ड्रोमीटर? पारंपरिक वर्षामापी से कितना अलग

उपकरण की कार्यप्रणाली और तकनीकी विशेषताएं:

  • पारंपरिक वर्षामापी (Rain Gauge): सामान्य वर्षामापी केवल यह दर्ज करता है कि निर्धारित समय में कुल कितने मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई।

  • डिस्ड्रोमीटर की क्षमता: यह एडवांस्ड सेंसर तकनीक पर आधारित उपकरण वर्षा की संरचना का विश्लेषण करता है। यह स्पष्ट करता है कि बारिश रिमझिम फुहारों के रूप में हो रही है या मोटी और तीव्र बूंदों के रूप में।

  • माइक्रो-फिजिक्स डेटा: यह बूंदों के घनत्व, वेग और आकार वितरण (DSD) का वास्तविक समय में सूक्ष्म डेटा प्रदान करता है।

📡 सटीक मौसम पूर्वानुमान और रडार मॉडल्स को बेहतर बनाने में मिलेगी मदद

क्षेत्रीय मौसम अनुसंधान और पूर्वानुमान पर प्रभाव:

  • मौसम प्रणालियों का अध्ययन: झारखंड में मानसून के दौरान बंगाल की खाड़ी से बनने वाले निम्न दबाव और चक्रवाती परिसंचरण का सीधा असर पड़ता है। अचानक होने वाली तेज बारिश और आंधी-तूफान के समय बूंदों के पैटर्न का सटीक अध्ययन किया जा सकेगा।

  • डॉप्लर रडार और सैटेलाइट कैलिब्रेशन: यह उपकरण डॉप्लर मौसम रडार (DWR) द्वारा अनुमानित वर्षा के आंकड़ों को जमीनी स्तर पर सत्यापित (Calibrate) करने में मदद करेगा।

  • फोरकास्ट मॉडल में सुधार: एकत्र किए गए डेटा से मौसम वैज्ञानिकों को पूर्वानुमान मॉडल के एल्गोरिदम को और अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाने में सहायता मिलेगी।

🔬 IITM पुणे और IMD की संयुक्त पहल: ‘मिशन मौसम’ का हिस्सा

परियोजना का बैकग्राउंड और वैज्ञानिक दल:

  • स्थापना दल: इस अत्याधुनिक डिस्ड्रोमीटर की स्थापना भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM), पुणे के वैज्ञानिक डॉ. अंबुज कुमार झा और परियोजना वैज्ञानिक रोहित पाटिल द्वारा संपन्न की गई।

  • अधिकारियों की उपस्थिति: स्थापना के दौरान IMD रांची के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. बाबूराज, वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद सहित विभाग के तकनीकी अधिकारी उपस्थित रहे।

  • ART प्रोजेक्ट और मिशन मौसम: यह उपकरण IITM पुणे की ART (Atmospheric Research Testbed) परियोजना के तहत विकसित किए जा रहे डिस्ड्रोमीटर नेटवर्क का हिस्सा है, जिसे केंद्र सरकार के ‘मिशन मौसम’ के तहत देश भर के प्रमुख जलवायु क्षेत्रों में लगाया जा रहा है।

📊 झारखंड के जलवायु और मौसम अनुसंधान को मिलेगा नया डेटा बैंक

अनुसंधान की नई संभावनाएं:

  • डेटा स्रोत: रांची केंद्र में इस तकनीक के शुरू होने से राज्य में बादलों के संघनन, बूंदों के निर्माण और स्थानीय जलवायु व्यवहार पर उच्च स्तरीय शोध के लिए प्रमाणित डेटा बैंक तैयार होगा।

  • वैज्ञानिक दृष्टिकोण: IITM पुणे के वैज्ञानिक डॉ. अंबुज कुमार झा के अनुसार, इस प्रणाली से रांची और आसपास के संपूर्ण छोटानागपुर पठारी क्षेत्र में मौसमी गतिविधियों की मॉनिटरिंग क्षमता काफी मजबूत होगी, जिससे चरम मौसमी घटनाओं (Extreme Weather Events) के पूर्व आकलन में मदद मिलेगी।

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