Logo
ब्रेकिंग
Dhanbad News: 1 घंटे में जमींदोज हुए 4 मकान! धनबाद के लोयाबाद में भू-धंसान से दहशत; ग्रामीणों ने की ... Deoria Viral Video: बुजुर्ग का पैर पकड़कर एक्सरसाइज कराते दिखे यूपी के मंत्री सूर्य प्रताप शाही; वीड... Jodhpur Air Force Station: 'वीर गार्डियन 2026' में दिखा तेजस और F-2A का दम; एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ... Maharashtra Politics News: लातूर के होटल आमेर में खूनी वारदात; परली के शेख मन्सूर अली की हत्या, CCTV... Bareilly Nagar Nigam Action: खसरा संख्या 220-221 की जमीन पर अवैध कब्जे; नोटिस के बाद हड़कंप, वसूला ज... Katihar Express Viral Video: रात में कोलकाता जा रही ट्रेन के कोच में दिखा सांप; यात्रियों में मची अफ... IIT Bombay Suicide News: 22 साल के साहिल वाकोडे सुसाइड केस की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी; प्रोफेसर ... Lawrence Bishnoi Gang News: नेपाल भाग गए थे 5 लाख के इनामी बदमाश; जोधपुर के होटल से अफीम, रिवॉल्वर औ... Punjab News Today: पंजाब में फिर ठप होगी बस सेवा! 22 सितंबर से सड़कों पर नहीं उतरेंगी PUNBUS और PRTC... Ludhiana Firing News: गृह प्रवेश की पार्टी में ताबड़तोड़ फायरिंग; 15-20 बदमाशों ने बरसाईं गोलियां, 2...
Header Ad

भोपाल में 76 वर्ष पहले आज ही के दिन खत्म हुआ था 226 साल पुराना नवाबी शासन

भोपाल । मध्य प्रदेश के इतिहास में आज 1 जून का दिन विशेष है। आज से 76 वर्ष पहले आज ही के दिन भोपाल पर 226 वर्षों से चल रहे नवाब के शासन का अंत हुआ था। उस दिन भोपाल का प्रशासनिक नियंत्रण पूरी तरह भारत सरकार के हाथों में आ गया। इस दिन के लिए तत्कालीन भोपाल रियासत का सबसे बड़ा राजनीतिक आंदोलन चला था, जिसे विलीनीकरण आंदोलन कहा जाता है।

भोपाल रियासत के दस्तावेजों पर शोध करने वाले भोपाल हिस्ट्री फोरम के शाहनवाज खान बताते हैं कि भारत की आजादी के समय भोपाल उन रियासतों में शामिल था, जिन्होंने भारत संघ में विलयपत्र पर हस्ताक्षर कर दिए थे। भोपाल के अंतिम नवाब हमीदुल्ला खान ने 14 अगस्त 1947 को रात 8.15 बजे इस विलयपत्र पर हस्ताक्षर किया था। उस समय संविधान नहीं बना था।

स्टैंड स्टिल समझौता

रियासतों में भारत सरकार की कोई प्रशासनिक व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में एक स्टैंड स्टिल समझौता भी उसी के साथ हुआ था, जिसके तहत नवाब को नई व्यवस्था होने तक राज्य का प्रमुख रहकर कामकाज संभाले रखना था।

रक्षा, विदेश नीति और दूर-संचार जैसे महत्वपूर्ण विभागों को छोड़कर नागरिक प्रशासन की जिम्मेदारी नवाब की थी। इसी व्यवस्था के तहत नवाब भोपाल रियासत पर शासन कर रहे थे। भारत सरकार ने नवाब को प्रतिनिधि सरकार बनाने का निर्देश दिया था, उसी के आधार पर उन्होंने चतुरनारायण मालवीय को प्रधानमंत्री बनाया था।

विलीनीकरण आंदोलन शुरू हुआ

प्रजा मंडल के चार नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह दी थी। आजादी मिलने से उत्साहित लोगों को लग रहा था कि जब सारे देश पर अपनी सरकार आ गई तो भोपाल से नवाब का शासन खत्म क्यों नहीं हो रहा है। इसी सोच से नाराजगी बढ़ी और भोपाल को मध्य भारत में मिलाने के लिए विलीनीकरण आंदोलन शुरू हुआ।

शाहनवाज खान बताते हैं कि यह आंदोलन छह जनवरी 1949से शुरू होकर 30 जनवरी 1949 तक चला। उसके बाद सरदार वल्लभभाई पटेल की नाराजगी की वजह से खत्म हो गया। उसके बाद भारत सरकार ने भोपाल की प्रशासनिक व्यवस्था अपने हाथ में लेने का फैसला किया। 30 अप्रैल 1949 को रियासती मामलों के सचिव वीपी मेनन भोपाल आए।

यहां नवाब हमीदुल्लाह खान और भारत सरकार के बीच उस ऐतिहासिक करार पर हस्ताक्षर हुए जिसमें लिखा था कि एक जून 1949 से रियासत का प्रशासन भारत सरकार को सौंप दिया जाएगा। एक जून 1949 को भारत सरकार ने एनबी बैनर्जी को मुख्य आयुक्त बनाकर भोपाल भेजा जिन्होंने नवाब से भोपाल का प्रशासनिक नियंत्रण लिया। इसी के साथ 1723 में नवाब दोस्त मोहम्मद खान से शुरू हुआ नवाबों के शासन का अंत हो गया।

नवाब की गतिविधियों ने जनता को भड़काया

भोपाल की इतिहासकार पूजा सक्सेना कहती हैं कि नवाब हमीदुल्लाह खान ने 1947 में अनीच्छा से भारत संघ में विलयपत्र पर हस्ताक्षर किए थे। वे रियासत पर प्रशासनिक नियंत्रण नहीं छोड़ना चाहते थे।

पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना और पाकिस्तान के बड़े नेताओं से उनके संबंधों-पत्राचारों की वजह से जनता का भरोसा खत्म हो रहा था। इसी वजह से विलीनीकरण आंदोलन शुरू हुआ। यह आंदोलन नवाब की सत्ता खत्म करने के लिए ही था, जिसमें अंतत: लोगों को सफलता मिली।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.