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चमोली हादसे में 4 मजदूरों की मौत, सेना ने बचाईं 50 जिंदगियां, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

उत्तराखंड के चमोली जिले के माणा गांव में बीआरओ कैंप पर ग्लेशियर टूटने से चार मजदूर की मौत हो गई, जबकि राहत और बचाव कार्य में जुटीं भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और सेना की टीमों ने 55 में से 50 मजदूरों को बाहर निकाल लिया. भारतीय सेना के पीआरओ लेफ्टिनेंट कर्नल मनीष श्रीवास्तव ने चार लोगों की मौत की पुष्टि की. हालांकि अभी भी सेना और एनडीआरएफ की टीमें बचाव और राहत कार्य में जुटी हुई हैं. दूसरी ओर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रभावित क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण किया और अधिकारियों को बचाव अभियान में तेजी लाने का निर्देश दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धामी से बात की और उन्हें पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया.

दूसरी ओर, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) ने बचाव अभियान के लिए चार टीमें भेजी हैं, जबकि चार और टीमें स्टैंडबाय पर हैं. खराब मौसम के बावजूद बाकी लोगों को बचाने के प्रयास जारी हैं. अब तक 55 में से 50 मजदूरों को सुरक्षित बचा लिया गया है और भारतीय सेना ने 14 नागरिकों को भी बचाया है.

सेना के अनुसार, शुक्रवार सुबह 5:30 से 6 बजे के बीच माणा और बद्रीनाथ के बीच सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के कैंप पर हिमस्खलन हुआ, जिसमें 55 मजदूर ग्लेशियर धसकने से दब गए थे.

शुक्रवार को बर्फबारी से काम हुआ था बाधित

शुक्रवार को बारिश और बर्फबारी के कारण बचाव कार्य बाधित हुआ और रात होने के कारण अभियान स्थगित कर दिया गया. शनिवार को मौसम साफ होने पर हेलीकॉप्टर अभियान में शामिल हो गए.

दूसरी ओर, मध्य कमान के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता और उत्तर भारत क्षेत्र के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल डीजी मिश्रा ने चल रहे खोज और बचाव कार्यों की निगरानी, ​​समीक्षा और समन्वय के लिए माना में हिमस्खलन स्थल का दौरा किया. जीवित बचे लोगों का पता लगाने के लिए विशेष रेको रडार, यूएवी, क्वाडकॉप्टर, हिमस्खलन बचाव कुत्ते आदि को सेवा में लगाया गया है.

बचाव कार्य में जुटे सेना के जवान

दूसरी ओर,आवश्यक उपकरण, संसाधन और घायलों को निकालने के लिए हेलीकॉप्टर भी लगातार काम कर रहे हैं. आर्मी कमांडर ने आश्वासन दिया कि विभिन्न एजेंसियों के सहयोग से भारतीय सेना तेजी से बचाव प्रयासों को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक संसाधनों से पूरी तरह सुसज्जित है.

मौके पर मौजूद भारतीय सेना के डॉक्टरों ने गंभीर रूप से जरूरतमंद लोगों के लिए जीवन रक्षक सर्जरी की है, जबकि जोशीमठ हेलीपैड से हेलीकॉप्टर संचालन भारतीय सेना विमानन और वायु सेना के आठ हेलीकॉप्टरों का उपयोग किया जा रहा है. अब तक कुल 19 लोगों को माना से जोशीमठ तक पहुंचाया गया है. भारतीय सेना की मध्य कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, उत्तर भारत क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग और सीमा सड़क के महानिदेशक समेत उच्च पदस्थ अधिकारी इस अभियान की निगरानी और समन्वय के लिए मौजूद हैं.

वहीं, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी एन के जोशी ने बताया कि माना स्थित सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवानों ने सुबह बचाव अभियान तेजी से चला रहे हैं.

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