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अंकिता भंडारी हत्याकांड: कोर्ट ने फिर खारिज की आरोपियों की जमानत, धामी सरकार की मजबूत पैरवी से दोषियों को उम्रकैद

देहरादून (उत्तराखंड): चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्यायालय ने एक बार फिर सभी आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। प्रदेश सरकार द्वारा अदालत में प्रस्तुत किए गए ठोस साक्ष्यों और प्रभावी कानूनी पैरवी के चलते आरोपियों को किसी भी प्रकार की राहत नहीं मिल सकी।

यह फैसला स्पष्ट करता है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार बेटी अंकिता को पूर्ण न्याय दिलाने और अपराधियों को कानून के तहत कठोरतम सजा दिलाने के लिए आरंभ से ही दृढ़ संकल्पित रही है। मजबूत अभियोजन के फलस्वरूप ही इस संवेदनशील मामले में दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनिश्चित हो सकी है।

🚨 घटना के 24 घंटे के भीतर गिरफ्तारी, SIT का गठन और 500 पन्नों की चार्जशीट

वारदात सामने आने के तुरंत बाद राज्य प्रशासन और पुलिस ने त्वरित गति से कार्रवाई की:

  • त्वरित कार्रवाई: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सख्त निर्देशों के बाद पुलिस ने मात्र 24 घंटे के भीतर सभी नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा।

  • SIT व गैंगस्टर एक्ट: मामले की निष्पक्ष और पेशेवर जांच के लिए तत्काल विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया तथा आरोपियों के विरुद्ध कठोर गैंगस्टर अधिनियम के तहत मामला दर्ज हुआ।

  • मजबूत साक्ष्य व चार्जशीट: एसआईटी ने गहन विवेचना के बाद लगभग 100 गवाहों के बयानों और पुख्ता फॉरेंसिक साक्ष्यों के साथ 500 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट अदालत में पेश की, जिसके चलते मुकदमे की सुनवाई के दौरान आरोपियों की जमानत बार-बार खारिज हुई।

🤝 परिवार की भावनाओं का पूरा सम्मान: तीन बार बदले गए वकील, CBI जांच की सिफारिश

प्रदेश सरकार ने पूरे कानूनी सफर के दौरान अंकिता के परिजनों की इच्छा और भावनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी:

  • विशेष लोक अभियोजक: परिजनों की संतुष्टि और मांग के अनुरूप अभियोजन व्यवस्था में तीन बार सरकारी अधिवक्ता (वकील) बदले गए।

  • CBI जांच का फैसला: अंकिता के माता-पिता की मांग का सम्मान करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रकरण की सीबीआई (CBI) जांच की आधिकारिक सिफारिश भी की।

  • आर्थिक संबल व रोजगार: राज्य सरकार ने पीड़ित परिवार को ₹25 लाख की आर्थिक सहायता राशि प्रदान की और परिवार के सामाजिक पुनर्वास के तहत अंकिता के भाई और पिता को रोजगार उपलब्ध कराया।

🎯 बेटी को न्याय दिलाने का संकल्प: निष्पक्ष जांच से अंतिम सजा तक का सफर

इस संवेदनशील प्रकरण में न्यायिक स्तर पर भी पुलिस व अभियोजन की जांच प्रक्रिया को संतोषजनक माना गया:

  • प्रभावशाली रसूख बेअसर: मुख्यमंत्री धामी का रुख पहले दिन से स्पष्ट था कि अपराधी चाहे कितना भी रसूखदार क्यों न हो, उसे कानून के शिकंजे से बचने नहीं दिया जाएगा।

  • निर्णायक परिणाम: केवल वादों तक सीमित न रहकर सरकार ने त्वरित गिरफ्तारी, वैज्ञानिक साक्ष्य, मजबूत अभियोजन और प्रभावी पैरवी के जरिए दोषियों को उम्रकैद की सजा दिलवाकर न्याय का मार्ग प्रशस्त किया।

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