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किशनगंज: खकवा नदी के तेज बहाव में तैरकर जनाजा ले जाने की मजबूरी, ग्रामीणों ने डीएम और बिहार सरकार से की पुल निर्माण की गुहार

किशनगंज (बिहार): देश आजादी के 79 वर्ष पूरे कर चुका है और हर स्तर पर विकास के दावे किए जाते हैं, परंतु बिहार के किशनगंज जिले के बहादुरगंज प्रखंड से सामने आई एक हृदयविदारक तस्वीर व्यवस्था के तमाम दावों की पोल खोलती नजर आ रही है।

यहां इंसानों को न केवल जीते जी बल्कि मृत्यु के उपरांत भी अंतिम विदाई के समय घोर संकट का सामना करना पड़ता है। अपने परिजनों के पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए कब्रिस्तान तक पहुंचाने हेतु ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर उफनती खकवा नदी तैरकर पार करनी पड़ रही है। सड़क दुर्घटना में मृत बीरपुर गांव निवासी 20 वर्षीय युवती शहनसवी बेगम के शव को भी इसी प्रकार ग्रामीणों द्वारा नदी के तेज बहाव के बीच से पार कराकर बैसा कब्रिस्तान ले जाया गया।

⚰️ 50 एकड़ में फैला बैसा कब्रिस्तान: दर्जनों गांवों के लोगों का एकमात्र अंतिम ठिकाना

कब्रिस्तान का महत्व और भौगोलिक स्थिति:

  • दर्जनों गांवों का सहारा: करीब 50 एकड़ के विशाल भूभाग में फैला बैसा कब्रिस्तान नोदिया टोली, चकचकी, झींगाकाटा इस्तमरार, झींगाकाटा तौफीर, दोगाछी, झींगाकाटा, दर्जी टोला, लाटटोला, बैसा, तेघरिया और धापरटोली सहित कई गांवों के हजारों लोगों के लिए अंतिम विश्राम स्थल है।

  • पीढ़ियों से परंपरा: इन सभी गांवों के लोग पीढ़ियों से अपने पूर्वजों को इसी कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक करते आ रहे हैं।

  • रास्ते में बड़ी बाधा: कब्रिस्तान तक जाने के मार्ग में नोदिया टोली-बैसा घाट पर खकवा नदी पर पुल न होना ग्रामीणों के लिए हर जनाजे को एक जानलेवा चुनौती बना देता है।

⚠️ जान हथेली पर रखकर पार करते हैं सैलाब: सम्मानजनक विदाई के अधिकार पर संकट

बरसात में गहराता संकट और ग्रामीणों का दर्द:

  • गहरे पानी में डुबकी लगाकर संतुलन: सामान्य दिनों में पानी कम रहने पर लोग जैसे-तैसे पार हो जाते हैं, किंतु मानसून के समय खकवा नदी का जलस्तर और बहाव अत्यधिक बढ़ जाता है। ऐसे में कई बार ग्रामीण गहरे पानी में डुबकी लगाते हुए शव को कंधों पर संतुलित कर दूसरे किनारे तक ले जाते हैं।

  • अमानवीय मजबूरी: ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल आवागमन का विषय नहीं, बल्कि एक नागरिक के सम्मानजनक अंतिम संस्कार के मौलिक अधिकार से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।

  • हादसे की आशंका: तेज बहाव में किसी भी समय संतुलन बिगड़ने से बड़ा हादसा होने का भय हर समय बना रहता है।

🗣️ मंत्री से मुलाकात और निरीक्षण के बाद भी नतीजा शून्य: जिला पार्षद प्रतिनिधि ने उठाए सवाल

प्रशासनिक उपेक्षा और जनप्रतिनिधि का पक्ष:

  • सड़क और पुल की मांग: मौके पर पहुंचे जिला पार्षद प्रतिनिधि इमरान आलम ने बताया कि नोदिया टोली-बैसा घाट पर पुल निर्माण के लिए ग्रामीण कार्य विभाग के अधिकारियों द्वारा कई बार स्थलीय निरीक्षण किया जा चुका है।

  • विभागीय मंत्री को ज्ञापन: उन्होंने बताया कि कुछ समय पूर्व बिहार सरकार के ग्रामीण कार्य मंत्री सुनील कुमार से पटना कार्यालय में भेंट कर इस विकट समस्या से अवगत कराया गया था, परंतु अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं निकला।

  • जनता में आक्रोश: बार-बार केवल खोखले आश्वासन मिलने के कारण ग्रामीणों में शासन-प्रशासन के खिलाफ गहरा आक्रोश व्याप्त है।

📢 ग्रामीणों की डीएम और बिहार सरकार से सीधी मांग: अविलंब बनाया जाए पुल

ग्रामीणों की मुख्य मांगें:

  • त्वरित स्वीकृति: ग्रामीणों ने किशनगंज के जिलाधिकारी (DM) और राज्य सरकार से मांग की है कि नोदिया टोली-बैसा घाट पर खकवा नदी के ऊपर तुरंत पक्के पुल के निर्माण को प्रशासनिक स्वीकृति दी जाए।

  • हजारों लोगों को राहत: पुल का निर्माण होने से न केवल दर्जनों गांवों के हजारों लोगों का दैनिक आवागमन सुरक्षित होगा, बल्कि परिजनों को अपने प्रियजनों के अंतिम सफर के दौरान नदी के खौफनाक सैलाब से जूझने की अमानवीय मजबूरी से भी हमेशा के लिए मुक्ति मिलेगी।

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