Logo
ब्रेकिंग
कान्हा टाइगर रिजर्व के बफर जोन में बाघ का जानलेवा हमला, युवक ने लाठी से वार कर बचाई जान शिक्षक हरदास कुशवाहा के तबादले के विरोध में सड़क पर उतरे छात्र, मजना-खरगापुर मार्ग पर लगाया चक्काजाम MPPSC परीक्षा में दो ऑप्शन चुनने पर क्या होगा? हाईकोर्ट पहुंचा ओएमआर शीट और माइनस मार्किंग का विवाद बीना स्टेशन पर तीसरी लाइन निर्माण कार्य के चलते 20 सितंबर से 16 अक्टूबर तक ट्रेनों का संचालन प्रभावि... दतिया के सहिड़ाखुर्द में रिश्तों को तार-तार करने वाली वारदात: 13 वर्षीय किशोरी से खेत में दुष्कर्म मुरैना में शादी के 42 दिन बाद नवविवाहिता शिक्षिका ने लगाई फांसी: अस्पताल में इलाज के दौरान तोड़ा दम,... एमपी में 1.5 लाख शिक्षकों को देनी होगी पात्रता परीक्षा: 21 अगस्त से आवेदन शुरू, 12 अक्टूबर से एग्जाम... जबलपुर के रेस्टोरेंट में काम को लेकर विवाद, सहकर्मी ने 20 वर्षीय युवती की चाकू से गोदकर की हत्या नितिन नबीन ने घोषित की नई टीम: 13 उपाध्यक्ष, 8 महासचिव और 12 महिलाओं को मिली जगह; जानें BJP संविधान ... राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पहली SIT की फाइनल रिपोर्ट सौंपी गई, चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन...
Header Ad

PUNBUS का सुपरिंटेंडेंट रंगे हाथों काबू, कारनामा जान आप भी रह जाएंगे दंग

जालंधर/चंडीगढ़: पंजाब में भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पंजाब विजिलैंस ब्यूरो ने सैक्टर 17, चंडीगढ़ स्थित डायरैक्टर स्टेट ट्रांस्पोर्ट-कम-एमडी पनबस के कार्यालय में तैनात सुपरिंटैंडैंट जगजीवन सिंह को 20,000 रुपए रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। इस संबंधी जानकारी देते हुए विजिलैंस ब्यूरो के एक प्रवक्ता ने बताया कि अमृतसर जिले के गांव धरड़ के निवासी और एक निजी ट्रांसपोर्टर द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के बाद आरोपी सुपरिंटेंडेंट को गिरफ्तार किया गया है।

शिकायत में आरोप लगाया गया कि उक्त आरोपी सुपरिंटेंडेंट  विभाग के पास उसकी (शिकायतकर्त्ता) 2 लाख रुपए की सिक्योरिटी जमा राशि जारी करने की मंजूरी देने के लिए 5,000 रुपए प्रति बस (कुल 20,000 रुपए) की मांग कर रहा था। शिकायतकर्त्ता ने मांग के ठोस सबूत के तौर पर रिकॉर्ड की गई बातचीत को पेश किया। शिकायत के अनुसार रिफंड का पैसा शिकायतकर्त्ता की चार बसों से संबंधित है, जिन्हें वर्ष 2014 से 2020 के बीच किलोमीटर स्कीम के तहत पनबस को लीज पर दिया गया था।

आवश्यक दस्तावेज जमा करने और मई 2023 में डिपो मैनेजर, अमृतसर से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एन.ओ.सी.) प्राप्त करने के बावजूद, उनकी फाइल को जानबूझकर तीन साल से छोटे-मोटे बहानें बनाकर देरी की गई थी। प्रवक्ता ने आगे कहा कि इस शिकायत की प्रारंभिक जांच के बाद, विजिलैंस ब्यूरों की फ्लाइंग स्क्वायड टीम ने एक जाल बिछाया, जिसके दौरान आरोपी सुपरिंटेंडेंट  को उसके कार्यालय के बाहर दो सरकारी गवाहों की मौजूदगी में शिकायतकर्ता से 20000 रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.