Logo
ब्रेकिंग
MPSC ड्रग इंस्पेक्टर पेपर लीक: मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच तेज, 7वीं रैंकर ऋतुजा पाटील से पूछताछ अमरकंटक यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में सनसनीखेज घटना: बीसीए की छात्रा ने उठाया आत्मघाती कदम जातिगत जनगणना के प्रारूप पर कांग्रेस का बड़ा हमला: नाना पटोले ने बताया पूरी तरह दोषपूर्ण धमतरी में चंगाई सभा को लेकर भारी बवाल, ASP डीसी पटेल ने संभाला मोर्चा; दोनों पक्षों से पूछताछ जारी रीवा के संजय गांधी अस्पताल की बड़ी लापरवाही: जिंदा मरीज को घोषित किया मृत, शव सुपुर्द करते ही चलने ल... Morena Heavy Rain: मुरैना में फूटा भैंसोरा तालाब, सैकड़ों बीघा फसलें डूबीं; रीझौनी पुल पर चढ़ा सोन न... Gwalior Love Story: बिना मोबाइल 5 ट्रेनें बदलकर 1020 KM दूर प्रेमी के पास ग्वालियर पहुंची झारखंड की ... नीम करोली बाबा के जीवन पर आधारित फिल्म 'हनुमान अंश' का बॉक्स ऑफिस पर धमाका: गुना पहुंचे म्यूजिक डायर... Chhatarpur District Hospital: खून न मिलने से आदिवासी प्रसूता और नवजात की मौत, अस्पताल प्रशासन पर गंभ... Shahdol Tiger Poaching: बाघों का अंतरराष्ट्रीय शिकारी शेरू पारधी शहडोल से गिरफ्तार, चीन और म्यांमार ...
Header Ad

MP में किसान ATM कार्ड पर 23 करोड़ खर्च, बंटे सिर्फ 2.5 लाख: एक्सपायर होने की कगार पर लाखों कार्ड; सहकारिता मंत्री ने दिए जांच के आदेश

भोपाल (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश में किसानों को डिजिटल बैंकिंग सुविधाओं से जोड़ने के उद्देश्य से तैयार किए गए किसान एटीएम (ATM) कार्ड अब भारी अनियमितताओं और सवालों के घेरे में आ गए हैं।

सहकारी बैंकों ने बड़े पैमाने पर करोड़ों रुपये खर्च कर लाखों एटीएम कार्ड छपवा तो लिए, लेकिन इनमें से अधिकांश किसानों के हाथों तक पहुंच ही नहीं सके। आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में करीब 23 लाख किसान सहकारी बैंकों से ऋण लेते हैं, जिसके लिए 20 लाख से अधिक कार्ड तैयार करवाए गए थे, परंतु अब तक केवल लगभग 2.5 लाख कार्ड ही किसानों को वितरित किए जा सके हैं।

💰 23 करोड़ रुपये खर्च होने का दावा: अपेक्स बैंक और 38 जिला बैंकों की भूमिका

योजना पर खर्च और वितरण का ब्योरा:

  • करोड़ों का बजट: एक रिपोर्ट के अनुसार, अपेक्स बैंक और प्रदेश के 38 जिला सहकारी बैंकों ने एटीएम कार्डों की खरीद और तैयारी पर करीब ₹23 करोड़ की भारी राशि खर्च की।

  • सक्रियता की कमी: कुल तैयार 19.5 लाख से अधिक कार्डों में से मात्र 2.5 लाख कार्ड ही सक्रिय (एक्टिवेट) हो पाए हैं।

  • सरकारी धन की बर्बादी: समय पर वितरण न होने के कारण योजना का लाभ किसानों को नहीं मिला और खर्च की गई भारी-भरकम राशि के व्यर्थ जाने की आशंका पैदा हो गई है।

⏳ बैंकों के स्टोर में धूल फांक रहे लाखों कार्ड: वैधता (Validity) खत्म होने का खतरा

समय सीमा और तकनीकी संकट:

  • एक्सपायरी की कगार पर कार्ड: वर्ष 2022-23 में खरीदे गए अधिकांश कार्ड अब अपनी वैधता अवधि (Validity Period) पूरी करने के करीब हैं।

  • दोबारा खर्च का बोझ: यदि इन कार्डों की मियाद खत्म हो जाती है, तो ये किसी काम के नहीं रहेंगे। परिणामस्वरूप नए कार्ड जारी करने के लिए दोबारा टेंडर प्रक्रिया और सरकारी धन का इस्तेमाल करना पड़ेगा।

🏦 825 शाखाओं के जरिए होना था वितरण: मूल्यांकन पर उठे सवाल

प्रशासनिक विफलता और वितरण नेटवर्क:

  • विशाल नेटवर्क: प्रदेश के 38 जिला सहकारी बैंकों की करीब 825 शाखाओं को इन कार्डों को घर-घर और किसानों तक पहुंचाने का जिम्मा सौंपा गया था।

  • आकलन में चूक: खरीद से पहले किसानों की वास्तविक आवश्यकता और वितरण क्षमता का सही आंकलन न किए जाने को लेकर बैंक प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

🔍 सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने दिए जांच के आदेश: दोषियों पर होगी कार्रवाई

सरकार का रुख और जांच के बिंदु:

  • विस्तृत जांच के निर्देश: मामला उजागर होते ही सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं।

  • प्रमुख जांच बिंदु: जांच में यह परखा जाएगा कि आवश्यकता से अधिक कार्ड किस आधार पर छपवाए गए, निर्णय लेने वाले अधिकारी कौन थे और वितरण में लापरवाही क्यों बरती गई। मंत्री ने स्पष्ट किया है कि दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।

⚡ कांग्रेस का सरकार पर तीखा प्रहार: उमंग सिंघार ने बताया बड़ा घोटाला

विपक्ष के आरोप और राजनीतिक प्रतिक्रिया:

  • भ्रष्टाचार का आरोप: विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इसे सीधा भ्रष्टाचार और घोटाला करार दिया है।

  • कार्रवाई पर संदेह: विपक्ष ने आरोप लगाया कि केवल जांच के आदेश देकर औपचारिकता पूरी की जा रही है, जबकि यह देखना जरूरी है कि करोड़ों के इस नुकसान के जिम्मेदार अफसरों पर वास्तविक कार्रवाई होती है या नहीं।

Comments are closed.