Logo
ब्रेकिंग
Ola Uber Ban Chandigarh: ओला-उबर के लाइसेंस रद्द होने के बाद शुरू हुई 'भारत टैक्सी', जानिए यात्रियों... Haryana News: लगातार चौथी बार देश में अव्वल रही करनाल शुगर मिल, केंद्रीय मंत्रियों ने दी प्रतिष्ठित ... NCC DG Team Selection: हरियाणा के होनहार शूटर विजयन्त ढाण्डा ने बढ़ाया राज्य का मान, देश के टॉप-12 शू... Haryana Road Mishap: नूंह सड़क हादसे में चार लोगों की मौत, पत्नी गंभीर रूप से घायल; पुलिस जांच में ज... Haryana Crime News: पानीपत में اغवा हुआ बच्चा बरामद, एक लाख में बेचने की थी डील; पुलिस ने दो को दबोच... Gurnam Singh Chaduni Mahapanchayat: धान खरीद की मांग पर अड़े किसान, हाईवे पर बीती रात; आज होगी बड़ी ... Patna Mithila Colony Incident: दानापुर में खूनी संघर्ष, शादी से पहले सिपाही भाई ने की आत्महत्या, पुल... Delhi Demolition News: शालीमार बाग मैक्स अस्पताल रोड पर देर रात चला पीला पंजा; भारी पुलिस बल तैनात, ... Monsoon Update 2026: मॉनसून की विदाई के बीच बिगड़ेगा मौसम; मध्य प्रदेश, ओडिशा और पूर्वोत्तर में भारी... Gwalior Hospital Scam: भिंड की गर्भवती महिला के परिजनों से दलाल ने ऐंठे 17,000 रुपये; जेएएच प्रबंधन ...
Header Ad

अयोध्या राम मंदिर के पहले CEO पर आज लगेगी अंतिम मुहर: चंदा चोरी विवाद के बाद प्रशासनिक सुधार, रेस में पूर्व IAS, IPS और सैन्य अफसर

अयोध्या/लखनऊ: अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर में सामने आए चंदा चोरी प्रकरण के बाद अब मंदिर प्रशासन और प्रबंधन को पेशेवर रूप देने के लिए बड़ी व्यवस्था की जा रही है।

इसी कवायद के तहत श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को बुधवार (2 सितंबर) को अपना पहला मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) मिलने जा रहा है। CEO चयन के लिए गठित विशेष समिति ने निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर 3 योग्य नामों का पैनल ट्रस्ट को सौंप दिया है। लखनऊ में आयोजित ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक में इनमें से किसी एक नाम पर अंतिम मुहर लगने की पूरी संभावना है। चयनित पैनल में पूर्व IAS अधिकारी योगेश्वर राम मिश्रा, पूर्व IPS अधिकारी राजेश पांडेय और भारतीय सेना के एक सेवानिवृत्त उच्चाधिकारी का नाम शामिल है।

📊 5,585 आवेदनों से 3 नामों तक का सफर: 600 अंकों के मूल्यांकन पर हुई छंटनी

चयन प्रक्रिया और पारदर्शी स्क्रीनिंग का पूरा गणित:

  • विशाल स्तर पर आवेदन: राम मंदिर के पहले CEO पद के लिए देशभर से कुल 5,585 लोगों ने आवेदन किया था।

  • गूगल फॉर्म से प्राथमिक छंटनी: जांच समिति की प्राथमिक जांच के बाद 3,577 उम्मीदवारों ने निर्धारित गूगल फॉर्म के माध्यम से अपनी योग्यता व अनुभव का ब्योरा साझा किया।

  • मेरिट और वर्चुअल इंटरव्यू: 600 अंकों के मूल्यांकन के आधार पर 470 या उससे अधिक अंक अर्जित करने वाले 108 अभ्यर्थियों को वर्चुअल इंटरव्यू के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया।

  • अयोध्या में अंतिम साक्षात्कार: चार दिनों तक चले मंथन के बाद 17 उम्मीदवारों को अंतिम चरण के लिए चुना गया, जिनमें से 16 अभ्यर्थी अयोध्या पहुंचे। 2 दिनों के गहन व्यक्तिगत साक्षात्कार के उपरांत अंतिम 3 नामों का पैनल तैयार किया गया।

👔 पूर्व IAS योगेश्वर राम मिश्रा का नाम सबसे आगे: काशी और अयोध्या का गहरा अनुभव

मजबूत प्रशासनिक अनुभव और दावेदारी के प्रमुख कारण:

  • प्रशासनिक ट्रैक रिकॉर्ड: योगेश्वर राम मिश्रा उत्तर प्रदेश कैडर के 2005 बैच के वरिष्ठ IAS अधिकारी रहे हैं और पूर्व में PCS अधिकारी के तौर पर भी लंबी सेवाएं दे चुके हैं।

  • धार्मिक नगरियों का प्रबंधन: उनके पक्ष में सबसे बड़ा मजबूत पक्ष उनका ‘काशी और अयोध्या’ दोनों नगरियों में प्रशासनिक नेतृत्व का अनुभव है। वे वाराणसी के डीएम रहते हुए कई प्राथमिक परियोजनाओं से जुड़े रहे और अयोध्या में भी तैनात रहे।

  • कॉरिडोर और प्रोजेक्ट्स: वे बाराबंकी के डीएम और मिर्जापुर के मंडलायुक्त रहे, जहां विंध्याचल कॉरिडोर जैसी महत्वपूर्ण धार्मिक-विकास परियोजना का कुशल प्रबंधन उनके खाते में दर्ज है।

  • भविष्य की चुनौतियां: मंदिर के पहले CEO के सामने बढ़ती श्रद्धालु संख्या, भीड़ नियंत्रण (Crowd Management), पार्किंग, सुरक्षा, होटल व इंफ्रास्ट्रक्चर समन्वय तथा वित्तीय पारदर्शिता सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी, जिसके लिए मिश्रा का प्रशासनिक अनुभव सटीक बैठता है।

🛡️ पूर्व IPS राजेश पांडेय की दावेदारी: सुरक्षा और क्राउड कंट्रोल में विशेषज्ञता

कानून-व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन का पक्ष:

  • 32 साल का लंबा पुलिस करियर: राजेश पांडेय 1989 में DSP के रूप में पुलिस सेवा में आए और 2003 बैच के IPS अधिकारी बने। वे 30 जून 2021 को आईजी (इलेक्शन सेल) पद से सेवानिवृत्त हुए।

  • संवेदनशील जिलों की कमान: उन्होंने लखनऊ, मेरठ और अलीगढ़ जैसे संवेदनशील जिलों में एसएसपी (SSP) के रूप में कार्य किया है तथा UP STF व एटीएस (ATS) में बड़े अभियानों का नेतृत्व किया है।

  • सुरक्षा के लिहाज से अहम: यदि ट्रस्ट का मुख्य फोकस राम मंदिर परिसर की चाक-चौबंद सुरक्षा, ऑपरेशनल प्रबंधन और आपातकालीन निर्णय क्षमता पर रहता है, तो पांडेय का प्रोफाइल भी अत्यंत मजबूत विकल्प है।

🎖️ रेस में तीसरा नाम सेवानिवृत्त सैन्य अफसर का: छवि सुधारने पर भी ट्रस्ट का ध्यान

तीसरा विकल्प और अंतिम निर्णय की घड़ी:

  • कड़ा अनुशासन और निष्पक्ष छवि: पैनल में शामिल तीसरा नाम सेना के एक सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर रैंक के अधिकारी का बताया जा रहा है, जिनका जुड़ाव विवेकानंद फाउंडेशन से रहा है।

  • संस्थागत अनुशासन: सेना की पृष्ठभूमि से आने वाले अधिकारी के पास उच्च स्तरीय अनुशासन, मानव संसाधन प्रबंधन और संकट के समय त्वरित निर्णय लेने की विशेष क्षमता होती है।

  • ट्रस्ट का अंतिम फैसला: राम मंदिर निर्माण के बाद अब इसे आने वाले दशकों के लिए एक मजबूत, पारदर्शी और पेशेवर संस्थागत ढांचा देने की आवश्यकता है। लखनऊ में चल रही ट्रस्ट की बैठक में जल्द ही पहले CEO के नाम का आधिकारिक ऐलान कर दिया जाएगा।

Comments are closed.