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Durg News: दिव्यांगता को बनाया ताकत, दुर्ग के दृष्टिबाधित शिक्षक अवतार गुप्ता ने की डिजिटल एक्सेसिबिलिटी की मांग

दुर्ग (छत्तीसगढ़): हौसले बुलंद हों तो शारीरिक अक्षमता कभी राह का रोड़ा नहीं बन सकती। इसकी जीती-जागती मिसाल हैं दुर्ग के कैंप वन निवासी अवतार कुमार गुप्ता, जो शासकीय स्कूल कैंप वन में शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

अवतार कुमार गुप्ता आंखों से देख नहीं सकते, लेकिन बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने और जीवन जीने का हुनर सिखाने में उनका कोई सानी नहीं है। उनकी निष्ठा और समर्पण का ही परिणाम है कि उनसे शिक्षा प्राप्त कर चुके कई छात्र आज देश के विभिन्न हिस्सों में प्रतिष्ठित पदों पर सेवाएं देकर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दे रहे हैं।

💪 देख नहीं सकते लेकिन सिखाते हैं जीने का सलीका: कमजोरी को बनाया अपनी ताकत

संघर्ष और सफलता का सफर:

  • बचपन में खोई रोशनी: शिक्षक अवतार कुमार गुप्ता बताते हैं कि बचपन में ही एक बीमारी के चलते उनकी दोनों आंखों की रोशनी चली गई थी, परंतु उन्होंने इस कमी को कभी अपनी लाचारी या बेबसी नहीं बनने दिया।

  • ब्रेल लिपि से पूरी की पढ़ाई: अपनी कमजोरी को ढाल बनाने के बजाय उन्होंने शिक्षा को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया। ब्रेल लिपि वाले विशेष विद्यालय से कड़ी मेहनत कर उन्होंने अपनी प्रारंभिक व उच्च शिक्षा पूरी की।

  • 2005 में बने शिक्षक: वर्ष 2005 में उनका चयन शासकीय शिक्षक के पद पर हुआ। यहीं से उनके जीवन का वह अध्याय प्रारंभ हुआ, जिसमें उन्होंने खुद अंधेरे में रहकर दूसरों के जीवन को ज्ञान के प्रकाश से रोशन करने का बीड़ा उठाया।

📖 स्पर्श से महसूस कर बांट रहे ज्ञान की रोशनी: आधुनिक सेंसर छड़ी के सहारे पहुंचते हैं स्कूल

अध्यापन शैली और दैनिक दिनचर्या:

  • स्पर्श से पठन-पाठन: अवतार कुमार गुप्ता वर्तमान में कक्षा पहली से पांचवीं तक के बच्चों को ब्रेल लिपि और मौखिक संवाद के जरिए पढ़ाते हैं। जिन अक्षरों को दुनिया आंखों से देखकर पढ़ती है, उन्हें वे उंगलियों के स्पर्श से महसूस कर बच्चों तक पहुंचाते हैं।

  • स्मार्ट स्टिक का उपयोग: प्रतिदिन स्कूल जाने के लिए वे एक विशेष सेंसर युक्त आधुनिक स्मार्ट छड़ी (Sensor-enabled Smart Cane) का सहारा लेते हैं।

  • सुरक्षित आवागमन: यह आधुनिक छड़ी रास्ते में किसी व्यक्ति, गड्ढे या अवरोध के आने पर बीप या वाइब्रेशन के जरिए तुरंत संकेत दे देती है, जिससे वे बिना किसी सहारे के पूरी सतर्कता के साथ अकेले ही स्कूल पहुंच जाते हैं।

🚶‍♂️ आत्मनिर्भरता की मिसाल: ‘सहानुभूति नहीं, समान अवसर चाहिए’

समानता और सामाजिक दृष्टिकोण पर विचार:

  • बाधाओं को नकारा: अवतार का दृढ़ विश्वास है कि शारीरिक दिव्यांगता जीवन में प्रगति की राह कभी नहीं रोक सकती, बशर्ते व्यक्ति में दृढ़ इच्छाशक्ति हो।

  • समान माहौल की आवश्यकता: उनका मानना है कि समाज को दृष्टिबाधित या दिव्यांग व्यक्तियों के प्रति केवल सहानुभूति दिखाने के बजाय ऐसा सकारात्मक वातावरण तैयार करना चाहिए, जहां सभी को समभाव से देखा जाए।

  • हुनर की पहचान जरूरी: वे कहते हैं कि दिव्यांग व्यक्तियों में भी अद्भुत प्रतिभा और कौशल होता है; आवश्यकता केवल उनकी क्षमता को पहचानने और उन्हें उचित अवसर व मंच प्रदान करने की है।

💻 डिजिटल एक्सेसिबिलिटी पर सरकार दे ध्यान: स्क्रीन रीडर फ्रेंडली पोर्टल बनाने की वकालत

तकनीकी सशक्तिकरण और सुधार की मांग:

  • स्क्रीन रीडर की महत्ता: अवतार कुमार गुप्ता ने शासन-प्रशासन से डिजिटल एक्सेसिबिलिटी (Digital Accessibility) को व्यापक रूप से लागू करने की अपील की है।

  • सॉफ्टवेयर अनुकूलता: उनका कहना है कि सरकारी वेबसाइटों, पोर्टल्स और फॉर्म्स को इस तरह डिजाइन किया जाना चाहिए कि वे JAWS और NVDA जैसे आधुनिक स्क्रीन रीडर सॉफ्टवेयर के साथ सुगमता से काम कर सकें।

  • आत्मनिर्भर बनेंगे दिव्यांग: यदि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पूरी तरह एक्सेसिबल बन जाएं, तो दृष्टिबाधित व्यक्तियों को अपने दैनिक और आधिकारिक कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और वे पूरी तरह आत्मनिर्भर बन सकेंगे।

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