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Chandigarh Market News: सेक्टर-27 और 28 के दुकानदारों ने जताई चिंता, कहा- डिजिटल भुगतान पर शुल्क से बढ़ेगा अतिरिक्त बोझ

चंडीगढ़ में यूपीआई (UPI) भुगतान प्रणाली को लेकर केंद्र सरकार की ओर से भले ही ग्राहकों को राहत देने की बात कही जा रही हो, लेकिन प्रस्तावित नए शुल्कों को लेकर स्थानीय बाजारों के दुकानदारों और व्यापारियों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं. सरकार की तरफ से आगामी 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट यूपीआई भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की तैयारी की जा रही है, हालांकि यह स्पष्ट किया गया है कि इसका सीधा शुल्क ग्राहक से नहीं वसूला जाएगा.

📊 2. छोटे बाजारों में बड़े भुगतानों का हिस्सा कम, लेकिन सालभर में हजारों रुपये के अतिरिक्त खर्च से परेशान हैं कारोबारी

आंकड़ों के मुताबिक, 2,000 रुपये से अधिक के पीटूएम (P2M) यूपीआई लेनदेन भले ही कुल संख्या का मात्र 4 प्रतिशत हैं, लेकिन कुल लेनदेन के मूल्य के लिहाज से इनका हिस्सा लगभग दो-तिहाई बैठता है. सेक्टर-27 के स्थानीय दुकानदार राजीव सिंह ठाकुर का कहना है कि यदि दिन में कई बार 2,000 रुपये से ऊपर के डिजिटल भुगतान मिलते हैं, तो सालभर में करीब 30 हजार रुपये तक का अतिरिक्त खर्च छोटे दुकानदारों को अपनी जेब से उठाना पड़ेगा, जो कि न्यायसंगत नहीं है.

🏬 3. सेक्टर-28 के दुकानदारों ने भी बढ़ाई चिंता, कहा- सीमित कमाई के बीच व्यापारी पर शुल्क डालना है अनुचित

व्यापारियों का कहना है कि आज के समय में डिजिटल भुगतान उनके कारोबार का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है, क्योंकि अधिकांश ग्राहक अब नकदी की बजाय ऑनलाइन पेमेंट को ही प्राथमिकता देते हैं. सेक्टर-28 के दुकानदार सुमित कुमार ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ग्राहकों से यूपीआई के नाम पर अतिरिक्त पैसे लेना तो वैसे भी ठीक नहीं है, लेकिन यदि इसका पूरा वित्तीय बोझ अंततः छोटे कारोबारियों की सीमित कमाई पर डाला गया, तो उनकी मुश्किलें और अधिक बढ़ जाएंगी.

🔄 4. अंतिम फैसले और वास्तविक प्रक्रिया को समझने का इंतजार कर रहे व्यापारी, छोटे कारोबारियों के हित में की जा रही है मांग

फिलहाल स्थानीय दुकानदार इस पूरे मामले के अंतिम रूप से लागू होने और उसकी वास्तविक प्रक्रिया तथा दरों को स्पष्ट रूप से समझने का इंतजार कर रहे हैं. अधिकांश व्यापारियों का यही मानना है कि सरकार को डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के साथ-साथ देश के छोटे और मध्यम वर्गीय कारोबारियों के हितों का भी पूरा ध्यान रखना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार के अतिरिक्त वित्तीय बोझ से उनकी आजीविका प्रभावित न हो.

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