Logo
ब्रेकिंग
BSF Attari Border News: अटारी सीमा पर रिट्रीट सेरेमनी का नया शेड्यूल जारी; शाम 5:30 बजे शुरू होगी पर... Batala Viral Video: गुरु नानक देव जी के विवाह पर्व में ट्रैक्टर स्टंट पड़ा भारी; तेज रफ्तार में पलटा... Dubai Visa Fraud: 90 हजार में दुबई भेजा, छीना पासपोर्ट और मुर्गीखाने में रखा! जालंधर के पीड़ित ने सु... Amritsar Flooding Alert: तरनतारन रोड के पास नहर टूटने से मचा हड़कंप; मिट्टी की बोरियों से दरार भरने ... Punjab Gold Silver Price Today: पंजाब में उछले सोना-चांदी के दाम; जालंधर में 24 कैरेट सोना ₹1.58 लाख... Ferozepur Central Jail: केंद्रीय जेल फिरोजपुर में फिर चला तलाशी अभियान; 10 और मोबाइल फोन बरामद, कैदि... Etah Fake University Scam: एटा में चायवाले के नाम पर चल रही थी फर्जी यूनिवर्सिटी; भेद खुला तो प्रिंस... Bihar Flood Relief: सीएम सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री राहत कोष में दान दी एक महीने की सैलरी; नितिन नब... Durg News Today: फेसबुक पोस्ट पर बवाल; भिलाई-3 थाने पहुंचे कांग्रेसी, भाजयुमो नेता पर FIR और गिरफ्ता... Agra Mahakumbh Ambikapur: सीएम विष्णु देव साय ने किया 'अग्र महाकुंभ 2026' का शुभारंभ; अग्रवाल समाज क...
Header Ad

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 24 साल पुराने भ्रष्टाचार केस में दोषी कर्मचारी की अपील खारिज, सजा बरकरार

बिलासपुर (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट बिलासपुर ने भ्रष्टाचार से जुड़े लगभग 24 वर्ष पुराने एक गंभीर मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने रिश्वत मांगने और स्वीकार करने के आरोप में दोषी करार दिए गए सरकारी कर्मचारी की अपील को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की एकलपीठ ने विशेष न्यायालय द्वारा वर्ष 2002 में सुनाई गई दोषसिद्धि और कारावास की सजा को यथावत बरकरार रखा है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आरोपी के विरुद्ध अवैध रिश्वत की मांग और उसे मौके पर स्वीकार किए जाने के तथ्य पर्याप्त, ठोस एवं विश्वसनीय साक्ष्यों के माध्यम से पूरी तरह सिद्ध पाए गए हैं।

💼 मेडिकल लीव और रुके वेतन के बदले घूस: ₹10 हजार रिश्वत मांगने का था मामला

घटनाक्रम और शिकायत की पृष्ठभूमि:

  • वर्ष 1999 का मामला: अभियोजन के अनुसार, शिकायतकर्ता कर्मचारी ने चिकित्सा उपचार के लिए विधिवत अवकाश लिया था, किंतु उसका अवकाश स्वीकृत नहीं किया गया।

  • वेतन रोकने की कार्रवाई: इसके साथ ही फरवरी, सितंबर, अक्टूबर और दिसंबर 1999 के 15 दिनों का वेतन भी रोक दिया गया था।

  • रिश्वत की मांग: रुके हुए वेतन को जारी कराने और अवकाश की स्वीकृति संबंधी फाइल आगे बढ़ाने के एवज में आरोपी कर्मचारी ने कथित तौर पर ₹10,000 की रिश्वत मांगी थी, जिसमें से ₹5,000 तत्काल और शेष राशि बाद में देने का दबाव बनाया गया था।

🚨 लोकायुक्त की ट्रैप कार्रवाई: जेब से बरामद हुए थे केमिकल लगे चिह्नित नोट

ट्रैप दल की कार्रवाई और साक्ष्य:

  • लोकायुक्त में शिकायत: पीड़ित ने रिश्वत देने से स्पष्ट इनकार करते हुए लोकायुक्त पुलिस में विधिवत शिकायत दर्ज कराई। प्राथमिक सत्यापन के दौरान बातचीत की टेप रिकॉर्डिंग कराई गई।

  • रंगे हाथों गिरफ्तारी: ट्रैप योजना के तहत शिकायतकर्ता ने आरोपी को बताया कि वह केवल ₹4,000 की व्यवस्था कर पाया है। जैसे ही आरोपी ने यह राशि लेकर अपनी जेब में रखी, लोकायुक्त की टीम ने संकेत मिलते ही उसे दबोच लिया।

  • रासायनिक परीक्षण पॉजिटिव: तलाशी के दौरान आरोपी की जेब से वही चिह्नित नोट बरामद हुए तथा उसके हाथों और कपड़ों की रासायनिक जांच (केमिकल टेस्ट) में भी फिनॉफ्थलीन का सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुआ।

🏛️ बचाव पक्ष की दलीलें खारिज: साक्ष्यों की पुष्टि के आधार पर हाईकोर्ट का अहम फैसला

न्यायालय का विधिक निष्कर्ष:

  • वैज्ञानिक जांच की दलील अस्वीकृत: बचाव पक्ष ने तर्क दिया था कि टेप रिकॉर्डिंग की वैज्ञानिक जांच नहीं कराई गई थी, किंतु अदालत ने इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया कि अभियोजन का मामला केवल रिकॉर्डिंग पर आधारित नहीं था।

  • साक्ष्यों की मजबूत कड़ी: कोर्ट ने रेखांकित किया कि शिकायतकर्ता की गवाही, रंगे हाथों नोटों की जब्ती, ट्रैप कार्रवाई और रासायनिक परीक्षण के प्रमाण एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं।

  • सुप्रीम कोर्ट के नजीर का हवाला: अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध ‘नीरज दत्ता’ सहित अन्य फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि रिश्वत की मांग और स्वीकृति भ्रष्टाचार के मामलों में मुख्य आधार हैं, जो यहां पूर्णतः सिद्ध हैं।

  • सजा का विवरण: विशेष न्यायालय ने आरोपी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत 1 वर्ष और धारा 13(1)(d) सहपठित 13(2) के तहत 3 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी, जिसे हाईकोर्ट ने यथावत कायम रखा।

Comments are closed.