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Gwalior News Today: डबरा बौद्ध विहार के पते पर बने थे 17 बांग्लादेशियों के फर्जी पासपोर्ट; पुलिस सत्यापन में बरती गई भारी लापरवाही

ग्वालियर। भोपाल के गोविंदपुरा स्थित बौद्ध मठ के पते पर फर्जी तरीके से बने 40 पासपोर्ट के मुख्य आरोपी व दलाल नसीम अख्तर को लेकर अब एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। एसटीएफ की पूछताछ में सामने आया है कि ग्वालियर और बैतूल से बने 15 अन्य संदिग्ध पासपोर्ट के आवेदन भी नसीम अख्तर ने ही भोपाल से करवाए थे। उसी ने पूरी सांठगांठ की थी, जिसके बाद बिना किसी गहन जांच-पड़ताल और सत्यापन के आवेदनों को आगे की प्रक्रिया के लिए बढ़ा दिया गया था।

🔍 नसीम के दफ्तर और घर पर एसटीएफ की छापेमारी: पूछताछ में रोजाना हो रहे नए खुलासे

एसटीएफ की टीम आरोपी नसीम अख्तर को गोविंदपुरा के अन्नानगर स्थित उसके कार्यालय ले गई थी, जहां विस्तृत छानबीन की गई।

इसके साथ ही पुलिस टीम ने उसके आवास की भी गहन तलाशी ली। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस को कुछ अहम दस्तावेज व रिकॉर्ड मिले हैं, जिनकी पड़ताल की जा रही है। पूछताछ में रोज नए खुलासे हो रहे हैं; पहले उसने भोपाल के 40 और नागपुर के पते पर बने 15 पासपोर्ट का राज उगला था, लेकिन अब उसके तार ग्वालियर के डबरा स्थित बौद्ध विहार और बैतूल से बने पासपोर्ट फर्जीवाड़े से भी सीधे जुड़ गए हैं।

🤝 भोपाल पासपोर्ट सेवा केंद्र के कर्मचारी से थी सांठगांठ: फर्जीवाड़े में रही अहम भूमिका

ग्वालियर से 17 बांग्लादेशी नागरिकों के संदिग्ध पासपोर्ट बनाए गए थे। ये सभी पासपोर्ट डबरा स्थित बौद्ध विहार के पते पर तैयार किए गए थे।

पूछताछ में यह तथ्य सामने आया है कि भोपाल स्थित पासपोर्ट सेवा केंद्र में वर्ष 2022-2023 में पदस्थ रहे एक कर्मचारी की इस पूरे खेल में अहम भूमिका थी। नसीम अख्तर की उस कर्मचारी से गहरी नजदीकी थी, जिसने अंदरूनी सांठगांठ कराई थी। इसी वजह से ग्वालियर में भी पासपोर्ट सेवा केंद्र स्तर पर दस्तावेजों की बारीकी से जांच-पड़ताल नहीं हुई और आवेदन प्रक्रिया आसानी से आगे बढ़ा दी गई।

📋 पुलिस सत्यापन में बरती गई घोर लापरवाही: फॉर्म के 6 मुख्य बिंदुओं को किया गया दरकिनार

इस पूरे मामले में यह बात स्पष्ट रूप से सामने आई है कि ग्वालियर और भोपाल के गोविंदपुरा क्षेत्र में पुलिस सत्यापन (Police Verification) के दौरान गंभीर लापरवाही बरती गई।

सत्यापन फॉर्म में मुख्य रूप से 6 बिंदु होते हैं, जिनके आधार पर आवेदक की पृष्ठभूमि और पते की गहनता से पुष्टि की जाती है। जांच के दौरान किस दस्तावेज का उपयोग किया गया, आवेदक से किसने बात की और स्थानीय गवाह कौन थे—इन सबकी प्रविष्टि फॉर्म में बारीकी से की जानी चाहिए थी। फॉर्म औपचारिकता के लिए भरे तो गए, लेकिन धरातल पर जांच में भारी कोताही बरती गई।

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