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एम्स दिल्ली में 15 वर्षीय तन्वी की मौत पर बवाल: सालों तक सर्जरी टालने के आरोप, निदेशक ने बैठाई उच्चस्तरीय जांच समिति

नई दिल्ली: देश के सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान एम्स दिल्ली (AIIMS Delhi) में जन्मजात जटिल हृदय रोग से जूझ रही 15 वर्षीय किशोरी तन्वी की असामयिक मौत के बाद हड़कंप मच गया है।

सर्जरी के लिए वर्षों तक ‘तारीख पर तारीख’ देने और चिकित्सीय लापरवाही के गंभीर आरोपों के बीच एम्स निदेशक ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष पड़ताल के लिए एक उच्चस्तरीय जांच समिति (High-Level Inquiry Committee) का गठन कर दिया है। यह विशेष समिति तन्वी के पूरे क्लिनिकल रिकॉर्ड, मेडिकल प्रक्रियाओं, विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय और मृत्यु से जुड़ी परिस्थितियों की बिंदुवार समीक्षा करेगी। उधर, न्याय की मांग को लेकर मृतका के पिता ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कानूनी मोर्चा खोलते हुए FIR दर्ज कराने का निर्णय लिया है। एम्स प्रशासन ने दुख व्यक्त करते हुए कहा है कि अंतिम निष्कर्ष जांच कमेटी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा।

📋 2012 से 2026 तक के रिकॉर्ड खंगालेगी कमेटी: जांच के प्रमुख बिंदु तय

एम्स प्रवक्ता के अनुसार जांच के प्रमुख फोकस क्षेत्र:

  • 14 साल के रिकॉर्ड का विश्लेषण: साल 2012 से लेकर 2026 तक तन्वी के समस्त ओपीडी विजिट, क्लिनिकल नोट्स और डायग्नोस्टिक टेस्ट रिपोर्ट्स की गहन पड़ताल की जाएगी।

  • 2017 के चिकित्सीय फैसले की समीक्षा: वर्ष 2017 में विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा लिए गए उस निर्णय का चिकित्सकीय पुनर्मूल्यांकन होगा, जिसमें दिल की असाधारण व जटिल बनावट के कारण ओपन हार्ट सर्जरी को नामुमकिन व जानलेवा बताया गया था।

  • लापरवाही बनाम मेडिकल असमर्थता: समिति यह स्पष्ट करेगी कि क्या वास्तव में प्रशासनिक या चिकित्सीय स्तर पर ऑपरेशन में गैर-जरूरी देरी की गई, अथवा चिकित्सीय दृष्टिकोण से मरीज की स्थिति सर्जरी के अनुकूल ही नहीं थी।

🩸 ‘2014 में खून और पैसे जमा कराए, फिर भी टालते रहे डॉक्टर’: पिता का गंभीर आरोप

पीड़ित पिता मुकेश परियानी की आपबीती:

  • शुरुआती जांचों में बीता समय: पिता के अनुसार, वे पहली बार 10 अक्टूबर 2012 को बेटी को लेकर एम्स पहुंचे थे, जहां केवल शुरुआती जांचों में ही एक पूरा साल निकाल दिया गया।

  • पैसे और रक्त जमा करने का दावा: परिजनों का आरोप है कि 4 अप्रैल 2014 को डॉक्टरों के कहने पर ऑपरेशन हेतु रक्त और तय राशि जमा कराई गई, लेकिन 2015 तक सर्जरी को बार-बार टाला जाता रहा।

  • शिकायत वापस लेने का दबाव: थक-हारकर जब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में शिकायत की गई, तो अस्पताल बुलाया गया। पिता का आरोप है कि डॉक्टरों ने शर्त रखी कि शिकायत वापस लेने के बाद ही सर्जरी पर विचार होगा। वर्ष 2025 और फरवरी 2026 में भी शिकायतें दी गईं, पर डॉक्टर छुट्टियों पर रहे या नई जांचें लिखते रहे।

  • FIR दर्ज कराने की तैयारी: पिता ने भावुक होकर कहा कि यदि 2015 से 2017 के बीच सर्जरी हो जाती तो उनकी बेटी जीवित होती। परिजनों ने शव लेने से पूर्व अधिवक्ता के जरिए पुलिस में आपराधिक मामला दर्ज कराने का निर्णय लिया है।

🩺 ‘जटिल बनावट के कारण संभव नहीं थी सर्जरी’: एम्स प्रबंधन की आधिकारिक सफाई

संस्थान का मेडिकल पक्ष और अंतिम पलों का विवरण:

  • दुर्लभ जन्मजात बीमारी: एम्स के आधिकारिक मेडिकल रिकॉर्ड के अनुसार, तन्वी जन्म से ही वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (VSD) के साथ पल्मोनरी एट्रेसिया (Pulmonary Atresia) नामक अत्यधिक जटिल बीमारी से ग्रसित थी।

  • सर्जरी अत्यधिक जोखिमभरी थी: एम्स का कहना है कि 2017 में ही विशेषज्ञों के मेडिकल बोर्ड ने गहन जांच के बाद पाया था कि हृदय की आंतरिक संरचना बेहद पेचीदा है और सर्जरी मरीज के जीवन के लिए अत्यंत घातक सिद्ध हो सकती है। इसी आधार पर परिवार को दवाओं के जरिए प्रबंधन की सलाह दी गई थी।

  • ऑक्सीजन लेवल 48% तक गिरा: 1 सितंबर 2026 की तड़के 2:50 बजे बच्ची को अचानक अत्यधिक कमजोरी महसूस हुई और उसका ऑक्सीजन सैचुरेशन तेजी से गिरकर 48% तक पहुंच गया। आपातकालीन डॉक्टरों ने सीपीआर व अन्य जीवनरक्षक तकनीकों से उसे बचाने का भरसक प्रयास किया, किंतु उसे बचाया नहीं जा सका। मामला अब जांच समिति और पुलिस कार्रवाई के अधीन है।

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