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MP में प्रमोशन में आरक्षण पर बड़ा फैसला: सुप्रीम कोर्ट 3 महीने में करेगा सुनवाई, हाईकोर्ट के आदेश पर रोक

भोपाल/नई दिल्ली: मध्य प्रदेश में लंबे समय से लंबित और विवादित ‘प्रमोशन में आरक्षण’ के मामले पर जल्द ही कोई निर्णायक फैसला आने की उम्मीद जगी है। सुप्रीम कोर्ट ने इस संवेदनशील मुद्दे से जुड़ी सभी याचिकाओं पर आगामी तीन महीनों के भीतर विस्तृत सुनवाई पूरी करने का निर्णय लिया है। इसके लिए शीर्ष अदालत द्वारा शीघ्र ही एक विशेष उपयुक्त पीठ (बेंच) का गठन किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि जब तक उच्चतम न्यायालय इस पर अपना अंतिम निर्णय नहीं सुना देता, तब तक जबलपुर हाईकोर्ट इस विवाद के संबंध में कोई भी नया आदेश पारित नहीं कर सकेगा।

⚖️ कर्मचारी संगठनों की त्वरित सुनवाई याचिका पर आया सुप्रीम कोर्ट का आदेश

न्यायिक पीठ और लंबित याचिकाओं का ब्योरा:

  • विशेष पीठ का फैसला: विभिन्न कर्मचारी संगठनों द्वारा मामले की जल्द सुनवाई के लिए लगाई गई अर्जियों पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉय माल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने यह अहम आदेश पारित किया।

  • राज्य सरकार की याचिकाएं: मध्य प्रदेश शासन की ओर से भी सुप्रीम कोर्ट में 6 अलग-अलग सिविल अपील और स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर हैं, जिनमें कई कर्मचारी संगठन मुख्य प्रतिवादी (रेस्पोंडेंट) हैं।

  • शीघ्र समाधान का प्रयास: तीन महीने की समय-सीमा तय होने से वर्षों से पदोन्नति की राह देख रहे राज्य के हजारों कर्मचारियों को न्याय मिलने की उम्मीद बंधी है।

🛑 जबलपुर हाईकोर्ट की कार्यवाही पर रोक, ‘जनरैल सिंह’ केस के साथ जुड़े सभी मामले

विधिक प्रभाव और भावी कानूनी स्थिति:

  • हाईकोर्ट की सुनवाई रुकी: अधिवक्ता रामेश्वर ठाकुर के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से जबलपुर हाईकोर्ट में चल रही समस्त संबंधित कार्यवाहियों पर स्वतः रोक लग गई है और अब अंतिम व सर्वमान्य निर्णय सुप्रीम कोर्ट से ही मान्य होगा।

  • सभी केस एक साथ क्लब: वर्ष 2011 से अब तक देशभर में प्रमोशन में आरक्षण से जुड़े जितने भी मामले सामने आए हैं, उन सभी को सुप्रीम कोर्ट ने ‘जनरैल सिंह एवं अन्य बनाम लक्ष्मीनारायण गुप्ता’ केस के साथ संलग्न (क्लब) कर दिया है।

  • अंतिम फैसले का इंतजार: इस संयुक्त सुनवाई के उपरांत आने वाला सुप्रीम कोर्ट का अंतिम संवैधानिक फैसला मध्य प्रदेश समेत देश के विभिन्न राज्यों के प्रशासनिक ढांचे पर दूरगामी प्रभाव डालेगा।

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