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बिहार SIR: चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती, सुप्रीम कोर्ट में कल सुनवाई

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सुप्रीम कोर्ट में कल यानी सोमवार को बिहार में SIR कराने के चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई होगी. जस्टिस सूर्याकांत और जस्टिस ज्योमल्या बागची की बेंच मामले की सुनवाई करेगी. बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर की शुरुआत 24 जून से हुई थी और इसकी अंतिम मतदाता सूची जारी होने की तारीख 30 सितंबर है.

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स, मनोज झा, महुआ मोइत्रा, योगेंद्र यादव ने SIR को चुनौती दी है. सुप्रीम कोर्ट में इससे पहले भी इस मामले में सुनवाई हुई है. पिछली सुनवाई में शीर्ष अदालत ने दावे और आपत्ति की समय सीमा बढ़ाने से इनकार किया था. इसके बाद चुनाव आयोग ने कोर्ट में कहा कि 1 सितंबर के बाद भी दावे स्वीकार किए जाएंगे.

सुप्रीम कोर्ट में 8 सितंबर को सुनवाई

22 अगस्त की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों को बूथ-लेवल एजेंट्स के माध्यम से मतदाताओं की मदद करने का निर्देश दिया और अगली सुनवाई 8 सितंबर को तय की. बिहार में 2003 के बाद पहली बार एसआईआर का आयोजन किया जा रहा है. इसका उद्देश्य मतदाता सूची को साफ-सुथरा बनाना, मृत, शिफ्टेड और अयोग्य लोगों के नामों को हटाना और नए वोटरों को जोड़ना है.

SC ने SIR ने कभी नहीं कहा अवैध

हालांकि, शीर्ष अदालत ने कभी ये नहीं कहा कि SIR अवैध है, लेकिन उसने इसकी टाइमिंग और प्रक्रिया पर जरूर सवाल उठाए हैं. 14 अगस्त की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने 65 लाख गायब नामों की लिस्ट वेबसाइट पर प्रकाशित करने का आदेश किया था. कोर्ट ने आधार, वोटर आईडी और राशन कार्ड जैसे दस्तावेजों को भी स्वीकार करने की सलाह दी.

बिहार में वोटर रिवीजन के बाद कुल 7.24 करोड़ मतदाता हैं. 65 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं. जिनके नाम हटाए गए हैं, उनमें मृत, विस्थापित और विदेश मतदाता शामिल हैं. बिहार में एसआईआर से पहले (24 जून 2025 तक) 7.89 करोड़ मतदाता थे.

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