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प्रॉपर्टी टैक्स कलेक्शन मामले में पंजाब सरकार सख्त, मंडरा सकता है खतरा!

जालंधर: पंजाब का प्रमुख औद्योगिक शहर जालंधर नगर निगम प्रॉपर्टी टैक्स कलैक्शन में लगातार कमजोर प्रदर्शन कर रहा है, जिसका पंजाब सरकार ने गंभीर नोटिस लिया है। लोकल बॉडीज विभाग के डायरैक्टर ने निगम प्रशासन को पत्र लिखकर हर हफ्ते विभाग की कार्यप्रणाली की समीक्षा करने के आदेश दिए हैं। डायरैक्टर ने साफ चेतावनी दी है कि यदि प्रॉपर्टी टैक्स वसूली में नियमित वृद्धि नहीं हुई तो निगम को हर साल मिलने वाली 40-45 करोड़ रुपए की फाइनैंस कमीशन ग्रांट में अड़चन आ सकती है। यह ग्रांट निगम के जरूरी खर्चों और आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।

लोकल बॉडीज अधिकारियों के अनुसार जालंधर निगम प्रॉपर्टी टैक्स कलेक्शन में लक्ष्य हासिल करने में नाकाम रहा है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में 45 करोड़ रुपए का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन निगम केवल 43.22 करोड़ रुपए ही जमा कर सका। इसी तरह 2024-25 में 50 करोड़ रुपए के लक्ष्य के मुकाबले 44.36 करोड़ रुपए एकत्र हुए। अब अधिकारियों ने अगले साल के लिए 75 करोड़ रुपए का लक्ष्य रखा है, जो मौजूदा प्रदर्शन को देखते हुए असंभव लगता है। पंजाब सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि हर साल टैक्स वसूली में 10 प्रतिशत की वृद्धि होनी चाहिए।

2016-17 में दाराशाह एंड कंपनी द्वारा कराए गए जी.आई.एस. सर्वे में शहर की 2.91 लाख प्रॉपर्टीज को यूनिक आई.डी. (यू.आई.डी.) नंबर आवंटित किए गए थे। इसमें 1.89 लाख रिहायशी, कमर्शियल और कारोबारी प्रॉपर्टीज, 58,709 खाली प्लॉट, 1,296 धार्मिक संस्थान और 9,912 किराए की प्रॉपर्टीज शामिल थीं। हालांकि, इस सर्वे को टैक्स सिस्टम से जोड़ने की योजना थी, लेकिन कांग्रेस शासन के दौरान इसे फाइलों में दफन कर दिया गया।

2018 में दोबारा सर्वे में कुल 3.25 लाख प्रॉपर्टीज सामने आईं, जिनमें 1.94 लाख रिहायशी और 41,601 कमर्शियल प्रॉपर्टीज थीं। इसके बावजूद, निगम ने यू.आई.डी. को टैक्स रिकॉर्ड से नहीं जोड़ा, जिससे सैकड़ों करोड़ रुपए का राजस्व नुकसान हुआ।

2018 में निगम ने सभी प्रॉपर्टीज पर यू.आई.डी. नंबर वाली प्लेट्स लगाने का प्रोजैक्ट शुरू किया था, जिसका मकसद टैक्स सिस्टम को अपग्रेड करना था। स्मार्ट सिटी प्रोजैक्ट के तहत भी प्रोजेक्ट का दूसरा चरण चलाया गया। अभी कुल 3.25 लाख घरों पर ऐसी प्लेट्स लगाई गईं, लेकिन टैक्सेशन सिस्टम को अपग्रेड करने का लक्ष्य पूरा नहीं हुआ। निगम अधिकारियों की लापरवाही के चलते यह प्रोजैक्ट आज भी लटका हुआ है। पर किसी अफसर को देरी के लिए जवाबदेह नहीं बनाया गया ।

आरोप है कि शहर के कई बिल्डिंगों के मालिक किराए या लीज पर दी गई प्रॉपर्टीज के दस्तावेज छिपाकर कम टैक्स दे रहे हैं। हजारों घर आज भी प्रॉपर्टी टैक्स के मामले में डिफॉल्टर हैं। निगम में स्टाफ की कमी भी इस समस्या को बढ़ा रही है, जिसे दूर करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे। वित्तीय वर्ष 2024-25 में जब निगम पर अफसरों का राज था, तब निगम को कुल 440 करोड़ रुपए की आय का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन केवल 407 करोड़ रुपए ही जमा हो सके, यानी 33 करोड़ रुपए का घाटा।

अब नए मेयर वनीत धीर के लिए टैक्सेशन सिस्टम को अपग्रेड करना और यू.आई.डी. प्रोजैक्ट को टैक्सेशन सिस्टम से जोड़ना सबसे बड़ी चुनौती है। यदि यह प्रोजैक्ट सफल होता है तो निगम का राजस्व करोड़ों रुपए बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निगम अब भी यू.आई.डी. नंबरों को टैक्स रिकॉर्ड से नहीं जोड़ता तो सरकारी खजाने को और नुकसान होता रहेगा और अगर प्रॉपर्टी टैक्स नियमित रूप से नहीं बढ़ा तो निगम को फाइनेंस कमिशन की ग्रांट से भी हाथ धोना पड़ सकता है।

‘पिछले साल प्रॉपर्टी टैक्स कलैक्शन में गिरावट आना चिंता का विषय है परंतु इस साल ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। नियमित रूप से बैठकें तथा समीक्षा करके अधिकारियों और कर्मचारियों को लक्ष्य निर्धारित किए जा रहे हैं। यू.आई.डी. नंबर प्लेटों और सर्वे को मौजूदा टैक्स कलैक्शन सिस्टम से जोड़ने के निर्देश दे दिए गए हैं। फील्ड स्टाफ में भी वृद्धि का प्रस्ताव है। प्रॉपर्टी टैक्स के डिफाल्टरों पर सख्ती की जाएगी।’

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