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2023 के छात्रों ने मांगी JEE एडवांस में शामिल होने की इजाजत, SC ने दिया झटका

जेईई एडवांस्ड एग्जाम 2025 में शामिल होने के लिए 2023 बैच के छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई थी. इस मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया है. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह नीतिगत क्षेत्र का मामला है और कोर्ट को शिक्षा के मामलों में कम हस्तक्षेप करना चाहिए. 18 मई को जेईई मेन परीक्षा का आयोजन किया जाना है जिसके लिए 18 छात्रों ने कहा था कि वह पहले पात्र थे लेकिन बाद में उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया.

चलिए पूरा मामला जानते हैं… दरअसल 2023 में 12वीं पास कर चुके कुछ छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई थी कि उन्हें जेईई एडवांस्ड 2025 में बैठने की अनुमति दी जाए. इस अपील पर सुनवाई करते हुए 27 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, जॉइंट एडमिशन बोर्ड और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. इस मामले में सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बीआर गवई और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने की.

इस मामले में पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने 21 अप्रैल को अगली सुनवाई की तारीख दी थी. 18 छात्रों ने याचिका लगाई थीं कि उन्हें जेईई एडवांस्ड में शामिल होने की अनुमति दी जाए साथ ही इस एग्जाम को अटेंप्ट करने के चांस तीन करने का आदेश दिया जाए. हालांकि इन दोनों ही पक्षों पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की और याचिका को खारिज कर दिया. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने यह भी कहा कि शिक्षा विभाग का मामला है जो कि नीतिगत क्षेत्र का है. इस दौरान पीठ ने यह भी कहा कि कोर्ट को शिक्षा के मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए.

क्यों है जेईई एडवांस जरूरी

दरअसल जॉइंट एडमिशन बोर्ड यानी जेएबी जेईई एडवांस्ड एग्जाम का आयोजन कराता है. देश के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थान आईआईटी में एडमिशन के लिए इस एग्जाम को देना जरूरी होता है. इस एग्जाम को अटेंप्ट करने के लिए सिर्फ 2 ही चांस दिए गए हैं. जिसमें 12वीं पास करने के बाद छात्र जेईई मेन्स एग्जाम दे सकते हैं और इसके बाद जेईई एडवांस एग्जाम दे सकते हैं.

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