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200 से कम कर्मचारी हैं तो बिना परमिशन फैक्ट्री बंद कर सकते हैं मालिक, दिल्ली सरकार के बदले कई नियम

दिल्ली सरकार ने राजधानी में महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम करने की सशर्त अनुमति देने का फैसला लिया है. यह फैसला ‘व्यापार करने में आसानी’ और ‘अधिकतम शासन, न्यूनतम सरकार’ की दिशा में उठाए गए व्यापक सुधारों के तहत लिया गया है. इस निर्णय के अनुसार महिलाएं अब केवल अपनी स्पष्ट सहमति से नाइट शिफ्ट में कार्य कर सकेंगी, साथ ही उनके लिए सभी आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा.

इसके साथ ही औद्योगिक विवाद अधिनियम में बदलाव का प्रस्ताव रखते हुए, अब संस्थानों को बंद करने के लिए श्रमिकों की न्यूनतम सीमा 100 से बढ़ाकर 200 करने के निर्देश दिए गए हैं.

इसी तरह से दिल्ली अग्निशमन विभाग को तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी) द्वारा सुरक्षा ऑडिट की अनुमति देने के लिए एजेंसियों को सूचीबद्ध करने को कहा गया है. बड़े वाणिज्यिक और औद्योगिक प्रतिष्ठानों को इन एजेंसियों से प्रमाणपत्र लेकर एनओसी (हासिल करने की सुविधा दी जाएगी. छोटे प्रतिष्ठानों को वैकल्पिक रूप से थर्ड पार्टी ऑडिट की छूट मिलेगी.

पुराने कानूनों में बदलाव का प्रस्ताव

राज निवास के अधिकारियों के अनुसार, मंगलवार को उपराज्यपाल वीके सक्सेना और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित हुई, जिसमें इन प्रमुख पहलों की प्रगति और कार्यान्वयन की समीक्षा की गई. बैठक में विभिन्न विभागों को समयबद्ध

बैठक के दौरान उपराज्यपाल सक्सेना ने कहा कि दिल्ली में अभी भी कई पुराने और प्रतिबंधात्मक कानून, प्रक्रियाएं और नियम व्यवसायों और आर्थिक गतिविधियों के लिए बाधक बने हुए हैं. उन्होंने कहा कि इन व्यवस्थाओं को सरल और आधुनिक बनाने की तत्काल जरूरत है.

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी सहमति जताते हुए कहा कि पिछले एक दशक में इन मोर्चों पर “संतोषजनक से बहुत दूर” प्रगति हुई है, जिसके कारण कई व्यवसाय दिल्ली छोड़कर अन्य राज्यों में चले गए हैं.

श्रम विभाग को दिए गए विशेष निर्देश

अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली के श्रम विभाग को निर्देश दिया गया है कि वह महिला कर्मचारियों की सहमति से उन्हें रात्रिकालीन पाली में काम करने की अनुमति देने के लिए दिल्ली दुकान एवं प्रतिष्ठान अधिनियम में आवश्यक संशोधन करे.

इसके अतिरिक्त, विभाग को यह भी निर्देश दिया गया है कि दुकान एवं प्रतिष्ठान अधिनियम के तहत कर्मचारियों की न्यूनतम संख्या की सीमा 1 से बढ़ाकर 10 की जाए, जिससे अधिक प्रतिष्ठान इस अधिनियम के दायरे में आ सकें. साथ ही, दुकानों और प्रतिष्ठानों को 24×7 (सातों दिन और चौबीस घंटे) संचालन की अनुमति देने के लिए भी नियमों में बदलाव करने को कहा गया है.

6 महीने में काम पूरा करने का निर्देश

वहीं, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) को ग्रीन और व्हाइट कैटेगरी के उद्योगों को स्व-प्रमाणन की अनुमति देने को कहा गया है. साथ ही, संचालन की अनुमति के लिए समयसीमा 20 दिन करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके बाद आवेदन स्वीकृत माना जाएगा.

राजस्व विभाग द्वारा लागू की जा रही दिल्ली भूमि सुधार अधिनियम की धारा 81 और 33 जैसे प्रावधानों पर पुनर्विचार करने का आदेश दिया गया है, क्योंकि ये प्रावधान किसानों की भूमि के हस्तांतरण, बिक्री और म्यूटेशन में बाधक बन रहे हैं. आईटी विभाग को सभी प्रकार की एनओसी के लिए सिंगल-विंडो पोर्टल विकसित करने का निर्देश भी दिया गया है, ताकि प्रक्रियाओं को अधिक सरल और पारदर्शी बनाया जा सके.

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इन सभी सुधारों और निर्देशों की नियमित समीक्षा स्वयं उपराज्यपाल या मुख्यमंत्री द्वारा की जाएगी और इन कार्यों को छह महीने के भीतर पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.

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