Logo
ब्रेकिंग
लल्ली चौक का बदलेगा लुक, लगेगा क्लॉक टावर, नगर पालिका बिल्डिंग का पुराना स्वरूप संवरेगा बेंगलुरु से लौट रहे बिहारी युवक की ट्रेन में गई जान, जीआरपी ने किया था रेस्क्यू बैतूल: कोबरा से भी ज्यादा जहरीला कॉमन करैत मकान में निकला, सर्पमित्र ने सुरक्षित किया रेस्क्यू बैतूल की महिला की चिट्ठी राष्ट्रपति भवन पहुंची, असम के CM को भेजा गया मामला... 2 साल बाद मिला पति का... MP News: आदिवासी छात्रों के लिए बड़ी खुशखबरी, आवास सहायता योजना से मिलेगी आर्थिक मदद कारगिल विजय दिवस 2026: देश आज मना रहा 27वां कारगिल विजय दिवस, वीर शहीदों को श्रद्धांजलि यूसीसी की जरूरत क्यों पड़ी, सरकार पहले बताए जनता की राय क्या है: उमंग सिंघार खाटू श्याम जा रहे बाइक सवारों को कार ने मारी टक्कर,वृद्धा की मौत, दो घायल 18 किमी पैदल चलकर कलेक्ट्रेट पहुंचे आदिवासी छात्र, अधीक्षक पर मारपीट और वसूली के आरोप रेगिस्तान में बसा इंजीनियरिंग का चमत्कार: 2200 साल पहले बिना नदी के कैसे बसा शहर ? आज भी वैज्ञानिक इ...
Header Ad

होली के पर्व में खत्म हो रही शक्कर की माला की परंपरा, मीठी माला बनाने वाले शहर में बचे चंद कारीगर! बाजार भी हुआ फीका

मंडला। कभी होली में गांव-गांव शक्कर की बनी रंग-बिरंगी माला एक-दूसरे को पहनाकर लोग गुलाल-रंग लगाकर पर्व की बधाई देते थे। परंपरा के चलते शहर के बताशा बाजार में 15 दिन पहले से व्यापारी माला बनाने में जुट जाते थे। पर्व में जैसे-जैसे परंपरा कम होती गई मीठे माला का व्यापार भी सिमटता चला गया। बताशा बाजार में वर्तमान में सिर्फ 20 प्रतिशत ही व्यापार रह गया है। होली में रंग बिरंगी शक्कर मालाओं से 15 दिनों तक बाजार सजा रहता था, लेकिन अब मुश्किल से तीन से चार दिन ही लोग खरीदी करने आते हैं।

पहले एक दर्जन व्यापारी माला बनाने का काम महाशिवरात्रि पर्व के बाद शुरू कर देते थे और माला मंडला के साथ ही आसपास के लगभग चार जिलों को सप्लाई होती थी। बहुत पहले से ये माला का चलन चलता आया हैं। होली में इसका बड़ा महत्व होता था,जब भी किसी को तिलक लगाया जाता तो उनका इसी शक्कर के बने माला से उनका सम्मान किया जाता, उनको खिलाया जाता था।

वहीं स्थानीय निवासी दिवेश श्रीवास ने बताया कि अब दिनों दिन इन मालाओं की जगह मिठाइयों ने ले ली है। हमारे पूर्वज लोग ने ये काम सिखाया है पर अब ये माला का चलन दिनों दिन कम होते जा रहा हैं। इससे लोगों का रोजगार भी खत्म होता जा रहा है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.