Logo
ब्रेकिंग
फोन नहीं उठाते सीईओ,मीडियाकर्मियों में नाराजगी,ज्ञापन सौंपा Ola Uber Ban Chandigarh: ओला-उबर के लाइसेंस रद्द होने के बाद शुरू हुई 'भारत टैक्सी', जानिए यात्रियों... Haryana News: लगातार चौथी बार देश में अव्वल रही करनाल शुगर मिल, केंद्रीय मंत्रियों ने दी प्रतिष्ठित ... NCC DG Team Selection: हरियाणा के होनहार शूटर विजयन्त ढाण्डा ने बढ़ाया राज्य का मान, देश के टॉप-12 शू... Haryana Road Mishap: नूंह सड़क हादसे में चार लोगों की मौत, पत्नी गंभीर रूप से घायल; पुलिस जांच में ज... Haryana Crime News: पानीपत में اغवा हुआ बच्चा बरामद, एक लाख में बेचने की थी डील; पुलिस ने दो को दबोच... Gurnam Singh Chaduni Mahapanchayat: धान खरीद की मांग पर अड़े किसान, हाईवे पर बीती रात; आज होगी बड़ी ... Patna Mithila Colony Incident: दानापुर में खूनी संघर्ष, शादी से पहले सिपाही भाई ने की आत्महत्या, पुल... Delhi Demolition News: शालीमार बाग मैक्स अस्पताल रोड पर देर रात चला पीला पंजा; भारी पुलिस बल तैनात, ... Monsoon Update 2026: मॉनसून की विदाई के बीच बिगड़ेगा मौसम; मध्य प्रदेश, ओडिशा और पूर्वोत्तर में भारी...
Header Ad

विजिलेंस के रडार पर जालंधर नगर निगम, सलाखों के पीछे जा सकते हैं कई अफसर

जालंधर: पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने जालंधर नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। अब तक इस मामले में आम आदमी पार्टी के विधायक रमन अरोड़ा, असिस्टैंट टाऊन प्लानर सुखदेव वशिष्ठ और बिल्डिंग इंस्पैक्टर हरप्रीत कौर को गिरफ्तार किया जा चुका है। विजिलेंस की टीम अब रमन अरोड़ा के कुछ करीबी सहयोगियों और रिश्तेदारों की तलाश में जुटी है, जबकि निगम के कई अन्य अधिकारी भी जांच के दायरे में हैं। इसी बीच नगर निगम में बिना टैंडर करोड़ों के काम करवाने वाले अधिकारी विजिलेंस जांच बंद करवाने को दवाब बनाने में लगे हैं।

अब विजिलेंस की जांच का मुख्य फोकस नगर निगम के बिल्डिंग विभाग, बी. एंड आर. (बिल्डिंग एंड रोड्स) और ओ. एंड एम. (ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस) सैल में हुए भ्रष्टाचार पर है। जांच में सैंक्शन और कोटेशन के आधार पर करवाए गए कार्यों की गहन छानबीन की जा रही है।

आरोप है कि इन कामों को करवाते समय पंजाब सरकार के नियमों, खासकर 2022 में लागू ट्रांसपेरेंसी एंड अकाउंटेबिलिटी एक्ट की खुलेआम अवहेलना की गई। इस एक्ट के तहत कमिश्नर को 5 लाख रुपए से कम के कार्य सैंक्शन के आधार पर करवाने की अनुमति है, लेकिन जालंधर नगर निगम में पिछले 2-3 वर्षों में करोड़ों रुपए के कार्य बिना टैंडर के मनचाहे ठेकेदारों को सौंपे गए।

निगम में बना हुआ है अधिकारियों और ठेकेदारों का नैक्सस

विजिलेंस की जांच में सामने आया है कि निगम में अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच गहरी सांठगांठ है, जिसके चलते सैंक्शन के आधार पर हुए कार्यों की करोड़ों रुपए की पेमैंट ठेकेदारों को आसानी से मिल रही है। सफाई, पेंटिंग और स्ट्रीट लाइट जैसे कार्य, जो सामान्यतः टैंडर के माध्यम से होने चाहिए, सैंक्शन के आधार पर करवाए गए। आरोप है कि इन कार्यों के लिए कोटेशन ठेकेदारों द्वारा ही उपलब्ध करवाए गए, और निगम अधिकारियों ने फील्ड में जाकर कोटेशन की जांच नहीं की। यदि कोई कोटेशन फर्जी पाया गया तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है।

विजिलेंस ने 2022 से 2025 तक सैंक्शन के आधार पर हुए सभी कार्यों का रिकॉर्ड तलब किया है, जो अब उनके कब्जे में है। जांच में टेक्निकल अधिकारियों की एक टीम भी शामिल है, जो दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है। इन दस्तावेजों पर जूनियर इंजीनियर से लेकर असिस्टैंट और ज्वाइंट कमिश्नर तक के हस्ताक्षर हैं। यदि जांच गहराई तक पहुंची तो बी. एंड आर. और ओ. एंड एम. सैल के कई अधिकारियों के सलाखों के पीछे जाने की संभावना है।

जालंधर में हुए चुनावों का हवाला दे रहे अधिकारी

निगम अधिकारियों का तर्क है कि जालंधर में पिछले समय दौरान हुए चुनावों के कारण इमरजेंसी के आधार पर ये काम करवाए गए, लेकिन विजिलेंस का मानना है कि कानून की नजर में चुनाव कोई एमरजैंसी नहीं है। इसके अलावा, सफाई जैसे कार्यों के लिए एक-दो ठेकेदारों को बार-बार सैंक्शन के आधार पर काम देने और उनके उचित रिकॉर्ड न रखने के आरोप भी लग रहे हैं। कुछ मामलों में ठेकेदारों को बिना टैंडर के करोड़ों रुपए की पेमैंट की गई, जिससे निगम को वित्तीय नुकसान हुआ। टैंडर आधारित कार्यों में ठेकेदार 10 से लेकर 50 प्रतिशत तक डिस्काउंट देते हैं, लेकिन सैंक्शन आधारित कार्यों में ऐसी कोई छूट नहीं मिलती, जिससे निगम को भारी वित्तीय चूना लग रहा है।

अधिकारियों में हड़कंप, जांच ठप्प करवाने की हो रही कोशिश

विजिलेंस की सख्ती से निगम अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। निचले स्तर के अधिकारी उच्च अधिकारियों पर विजिलेंस जांच रोकने का दबाव बना रहे हैं। माना जा रहा है कि यदि रिकॉर्ड में कोई दस्तावेज गायब पाया गया और उसकी एफआईआर दर्ज नहीं हुई, तो संबंधित अधिकारी मुश्किल में पड़ सकते हैं। ऐसे ही अगर कोई कोटेशन जाली पाई गई तो भी अधिकारिओं पर ही कार्रवाई होगी । यदि मौके पर ठेकेदारों का हुआ काम न पाया गया या काम गैर जरूरी हुआ तो भी कार्रवाई अफसरों पर ही होगी।

माना जा रहा है कि विजिलेंस की जांच से कई बड़े खुलासे होने की संभावना है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति की बात दोहराई है और इस मामले में सख्त कार्रवाई का वायदा किया है। जालंधर नगर निगम में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, यह तो जांच पूरी होने पर ही स्पष्ट होगा, लेकिन फिलहाल यह मामला पूरे निगम और शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.