Logo
ब्रेकिंग
फोन नहीं उठाते सीईओ,मीडियाकर्मियों में नाराजगी,ज्ञापन सौंपा Ola Uber Ban Chandigarh: ओला-उबर के लाइसेंस रद्द होने के बाद शुरू हुई 'भारत टैक्सी', जानिए यात्रियों... Haryana News: लगातार चौथी बार देश में अव्वल रही करनाल शुगर मिल, केंद्रीय मंत्रियों ने दी प्रतिष्ठित ... NCC DG Team Selection: हरियाणा के होनहार शूटर विजयन्त ढाण्डा ने बढ़ाया राज्य का मान, देश के टॉप-12 शू... Haryana Road Mishap: नूंह सड़क हादसे में चार लोगों की मौत, पत्नी गंभीर रूप से घायल; पुलिस जांच में ज... Haryana Crime News: पानीपत में اغवा हुआ बच्चा बरामद, एक लाख में बेचने की थी डील; पुलिस ने दो को दबोच... Gurnam Singh Chaduni Mahapanchayat: धान खरीद की मांग पर अड़े किसान, हाईवे पर बीती रात; आज होगी बड़ी ... Patna Mithila Colony Incident: दानापुर में खूनी संघर्ष, शादी से पहले सिपाही भाई ने की आत्महत्या, पुल... Delhi Demolition News: शालीमार बाग मैक्स अस्पताल रोड पर देर रात चला पीला पंजा; भारी पुलिस बल तैनात, ... Monsoon Update 2026: मॉनसून की विदाई के बीच बिगड़ेगा मौसम; मध्य प्रदेश, ओडिशा और पूर्वोत्तर में भारी...
Header Ad

यमुनानगर में बाढ़ की चपेट में आए 30 गांव, मिनटों का सफर घंटों में तय करने को मजबूर ग्रामीण

यमुनानगर : यमुनानगर जिले का घाड़ क्षेत्र जो सुविधाओं के मामले में पूरे जिले में सबसे पिछड़ा हुआ है। मानसून सीजन में यह समस्या उस वक्त ग्रामीणों का दर्द बन जाती है जब बोली नदी पर पुल न होने की वजह से करीब 30 गांव की कनेक्टिविटी टूट जाती है। हालांकि फिलहाल तो प्री मानसून की बारिश हुई है और बोली नदी में दो बार पानी आ चुका है।

मोहिद्दीनपुर, जैतपुर और इब्राहिमपुर समेत कई गांव के लोगों को अगर बोली नदी पार करके नगली गांव की तरफ जाना हो तो मानसून सीजन में एक किलोमीटर का सफर 10 किलोमीटर लंबा तय करना पड़ेगा। क्योंकि बोली नदी पर आज तक पुल नहीं बना है। करीब 30 गांव के लोग डीसी से लेकर स्थानीय विधायक और बदलती सरकार तक अपनी गुहार लगा चुके हैं लेकिन उनकी मांग को हर बार अनसुना किया जाता है। यही वजह है कि मानसून सीजन के दौरान उनकी पीड़ा उभरकर सामने आती है। मजबूरन अगर उन्हें दूसरे गांव जाना हो तो उनको लंबा सफर तय करना पड़ेगा या फिर बोली नदी में जलस्तर जब कम होगा तो उन्हें जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ेगी।

ग्रामीण रशीद, हाफिज और जुलफ़ान ने कैमरे के सामने अपना दुख बयां किया। ग्रामीणों ने बताया कि हमने जब से होश संभाला है हम तब से अब तक यही हालात देख रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वोट मांगने के लिए नेता गांव में भी आते हैं और पुल बनाने का आश्वासन भी देते हैं लेकिन विधायक बनने के बाद वह सब कुछ भूल जाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे में अगर हमें आपातकालीन सेवाएं चाहिए तो वह हमें नहीं मिल पाती। हम प्रशासन और सरकार से गुजारिश करते हैं की बोली नदी पर एक पुल बनाया जाए ताकि गांव की कनेक्टिविटी आपस में हो सके लोग पुल के जरिए अपना सफर आसान कर सके।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.