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मंडला में राशन वितरण का अनाज बर्बाद: कीट नियंत्रण फेल होने से गोदाम में कीड़े लगे, स्टेट सिविल कॉरपोरेशन ने थमाया नोटिस

मंडला (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के मंडला जिले से सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और सरकारी अनाज भंडारण से जुड़ा एक अत्यंत गंभीर व चौंकाने वाला मामला प्रकाश में आया है। जिले के खैरी स्थित राज्य नागरिक आपूर्ति निगम (स्टेट सिविल कॉरपोरेशन) के सरकारी गोदाम में जिम्मेदारों की घोर अनदेखी और लचर व्यवस्था के चलते भारी मात्रा में भंडारित गेहूं नष्ट हो चुका है। गरीबों और जरूरतमंद परिवारों के पोषण हेतु सुरक्षित रखा गया लगभग 70 लाख रुपये मूल्य का गुणवत्तायुक्त गेहूं देखरेख के अभाव में धीरे-धीरे कीड़ों की भेंट चढ़कर पूरी तरह अनुपयोगी हो गया है।

🐛 गरीबों के निवाले पर लगे कीड़े, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

गोदाम में भंडारित खाद्यान्न में घुन और कीड़े लगते रहे और संबंधित जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सोते रहे।

यह सड़ा हुआ अनाज सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के अंतर्गत जिले के गरीब, अंत्योदय और पात्र राशन कार्डधारी परिवारों को वितरित किया जाना था। खाद्यान्न भंडारण के दौरान अनाज का इस स्तर पर सड़ जाना न केवल सरकारी राजस्व और खजाने पर भारी चोट है, बल्कि उन हजारों वंचित परिवारों के अधिकारों पर भी सीधा कुठाराघात है, जिनके चूल्हे इस राशन पर निर्भर थे। यह पूरी घटना अनाज संरक्षण, गुणवत्ता नियंत्रण और खाद्य सुरक्षा के समूचे तंत्र पर कड़े सवाल खड़े करती है।

🪲 कीट नियंत्रण (Pest Control) और नियमित निरीक्षण का दावा पूरी तरह फेल

शासकीय प्रोटोकॉल के अनुसार, किसी भी खाद्यान्न गोदाम में अनाज के सुरक्षित रखरखाव, नियमित फ्यूमिगेशन (कीट नियंत्रण), नमी की जांच, नियमित निरीक्षण और स्टॉक की निरंतर निगरानी की अनिवार्य व्यवस्था होती है।

ऐसे में यह गंभीर जांच का विषय है कि जब हजारों क्विंटल गेहूं धीरे-धीरे धूल (डस्ट) में तब्दील हो रहा था, तब स्थानीय निगरानी तंत्र क्या कर रहा था? नियमानुसार अनाज की भौतिक सुरक्षा और गुणवत्ता की प्राथमिक व सीधी जवाबदेही गोदाम प्रभारी (Warehouse In-charge) की होती है।

⚖️ 3000 बोरियां सड़ीं, गोदाम प्रभारी से होगी 70 लाख के नुकसान की भरपाई: प्रबंधक हेमंत वर्मा

इस पूरे मामले पर मध्य प्रदेश स्टेट सिविल कॉरपोरेशन के जिला प्रबंधक हेमंत वर्मा ने सख्त रुख अपनाते हुए स्थिति स्पष्ट की है।

उन्होंने बताया कि लगभग 20 दिन पूर्व गोदाम के औचक निरीक्षण के दौरान गेहूं की दुर्दशा सामने आई थी, जिसके उपरांत गोदाम प्रभारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। जिला प्रबंधक के अनुसार, “गोदाम के तीन टी-शेड (टेंगो) में कुल 9,000 बोरियां भंडारित हैं, जिनमें से करीब 3,000 बोरियों का गेहूं कीड़ों से गंभीर रूप से प्रभावित होकर डस्ट फॉर्मेट में बदल चुका है, जबकि शेष 6,000 बोरियां सुरक्षित हैं।” उन्होंने दोटूक कहा कि वर्ष 2025-26 में उपार्जित इस 17 मीट्रिक टन अनाज के नुकसान की पाई-पाई की भरपाई संबंधित लापरवाह गोदाम प्रभारी के वेतन व देयकों से की जाएगी और शेष अनाज की तत्काल ग्रेडिंग व सफाई कर उसे सुरक्षित किया जा रहा है।

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