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पलामू और गढ़वा में खनिज संपदा का होगा महासर्वे: GSI की रिपोर्ट से तय होगी गुणवत्ता, औद्योगिक विकास को मिलेगी नई रफ्तार

पलामू (झारखंड): पलामू प्रमंडल में लंबे समय से औद्योगिक विकास और नए रोजगार के अवसरों को लेकर उठ रही मांगों के बीच एक महत्वपूर्ण पहल शुरू होने जा रही है।

जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) द्वारा पलामू और गढ़वा के इलाकों में मौजूद खनिज संपदा का एक विस्तृत और वैज्ञानिक सर्वे कराने की रूपरेखा तैयार की जा रही है। इस सर्वे के माध्यम से क्षेत्र में दबी बहुमूल्य खनिज संपदा की वास्तविक स्थिति, कुल मात्रा और उसकी गुणवत्ता का सटीक आकलन सामने आएगा।

💎 बिश्रामपुर और सतबरवा में ग्रेफाइट का भंडार, सांसद ने GSI सर्वे की रखी मांग

पलामू के विभिन्न क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाले ग्रेफाइट के संकेत मिलने के बाद प्रशासनिक व राजनीतिक स्तर पर सक्रियता बढ़ी है:

  • सतबरवा और बिश्रामपुर: पलामू के सतबरवा में उच्च गुणवत्ता वाले ग्रेफाइट का विशाल भंडार पहले ही चिन्हित किया जा चुका है, जबकि बिश्रामपुर इलाके में भी ग्रेफाइट मिलने की पुष्टि हुई है।

  • गुणवत्ता पर सर्वे: पलामू सांसद विष्णुदयाल राम ने बताया कि बिश्रामपुर में मिले ग्रेफाइट के ग्रेड और गुणवत्ता को पूरी तरह प्रमाणित करने के लिए GSI से विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का आग्रह किया गया है।

  • नीलामी और निवेश: सांसद के अनुसार, GSI की अधिकृत रिपोर्ट के आधार पर ही इन खनिज ब्लॉकों की पारदर्शी नीलामी की जाएगी, जिससे खनन और प्रसंस्करण के लिए बड़ी कंपनियां निवेश कर सकेंगी।

🪨 ग्रेफाइट, डोलोमाइट और कोयले की प्रचुरता: राजहरा से बूढ़ापहाड़ तक खनिज संपदा

पलामू क्षेत्र भौगोलिक रूप से खनिजों के मामले में अत्यंत समृद्ध रहा है:

  • राजहरा का ऐतिहासिक कोयला: पलामू के राजहरा क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाले कोयले के भंडार हैं, जहां ब्रिटिश काल से खनन कार्य होता रहा है।

  • बूढ़ापहाड़ का इलाका: नक्सल प्रभाव से मुक्त हुए बूढ़ापहाड़ से सटे सीमावर्ती इलाकों में भी कोयले के प्रचुर भंडार मिलने के पुख्ता प्रमाण मिले हैं।

  • अन्य संसाधन: इसके अतिरिक्त पूरे देश में निर्माण कार्यों के लिए पलामू के पत्थर और उच्च गुणवत्ता वाले बालू की मांग बनी रहती है।

🧱 गढ़वा में बॉक्साइट और डोलोमाइट के विशाल स्रोत, औद्योगिक संभावनाओं की तलाश

गढ़वा जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी कई प्रमुख खनिजों की उपस्थिति दर्ज की गई है:

  • भवनाथपुर की खदानें: भवनाथपुर इलाके में डोलोमाइट और चूना पत्थर के बड़े भंडार मौजूद हैं।

  • बॉक्साइट का विस्तार: गढ़वा के कई पहाड़ी और पठारी अंचलों में बॉक्साइट के नए भंडार होने की पुष्टि प्राथमिक अध्ययनों में हुई है।

  • ग्रेफाइट की उपलब्धता: पलामू और गढ़वा के विभिन्न संयुक्त पट्टी वाले क्षेत्रों में उत्तम श्रेणी का ग्रेफाइट मौजूद है।

🏭 बंद पड़ी खदानें और पलायन का दंश: कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को उद्योग से जोड़ने की जरूरत

खनिज संपदा से समृद्ध होने के बावजूद पलामू का अपेक्षित औद्योगिक विकास नहीं हो सका है और स्थानीय आबादी आज भी खेती तथा मजदूरी पर निर्भर है:

  • औद्योगिक इकाइयों का अभाव: वर्तमान में पलामू के रेहला स्थित केवल एक केमिकल फैक्ट्री ही प्रमुख उद्योग के रूप में संचालित है।

  • बंद हुए पुराने कारखाने: जपला की ऐतिहासिक सीमेंट फैक्ट्री दशकों पहले बंद हो चुकी है। भवनाथपुर में डोलोमाइट और चूना पत्थर की माइंस बंद होने तथा बॉक्साइट खनन ठप होने से हजारों श्रमिकों का रोजगार छिन गया।

  • चैनपुर की ग्रेफाइट माइंस: चैनपुर के सोकरा क्षेत्र में कभी बड़े पैमाने पर होने वाला ग्रेफाइट खनन भी वर्षों से बंद पड़ा है।

  • पुनरुद्धार की उम्मीद: GSI के नए सर्वे और आगामी खदान नीलामियों से क्षेत्र में दोबारा बड़े उद्योग स्थापित होने और स्थानीय स्तर पर भारी रोजगार सृजन की नई उम्मीद जगी है।

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