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जिस टेंट में विराजमान थे भगवान राम, उसका अब क्या होगा? ये नई योजनाएं मंदिर को और बनाएंगी भव्य

अयोध्या राम मंदिर के भवन निर्माण समिति की बैठक सर्किट हाउस में हुई. बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष नृपेन्द्र मिश्रा ने की. इस दौरान बैठक में मंदिर निर्माण से जुड़े कई अहम विषयों पर विचार-विमर्श हुआ. समिति के सदस्यों ने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती इस वक्त परकोटा से राम मंदिर को जोड़ने की है, जिसमें एक लिफ्ट और ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है. यह कार्य मंदिर के पश्चिम दिशा में चल रहा है और इसके माध्यम से श्रद्धालुओं की आवाजाही को सरल बनाया जाएगा. यह कड़ी न केवल मंदिर की संरचना को जोड़ने का कार्य करेगी, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए सुविधा भी बढ़ाएगी.

भवन निर्माण समिति में इस बात पर अभी तक कोई विचार नहीं हो सका है कि मंदिर के प्रथम तल पर लगे दरवाजों पर सोना चढ़ाया जाए या नहीं. यह निर्णय आने वाले दिनों में लिया जा सकता है. अस्थाई मंदिर को लेकर भी एक अहम फैसला हुआ है. अब श्रद्धालुओं के लिए अस्थाई मंदिर में दर्शन की व्यवस्था की जाएगी. अस्थाई मंदिर, जो लकड़ी से बना है, उसकी मजबूती और संरचना को लेकर भी गहन चर्चा की जा रही है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो.

टेंट का क्या होगा?

भगवान राम जहां पहले टेंट में विराजमान थे, वह टेंट भी राम जन्मभूमि ट्रस्ट के पास सुरक्षित रखा गया है. उस टेंट को याद के रूप में स्थायी रूप से संरक्षित किया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं को यह अनुभव हो सके कि उनके आराध्य किस रूप में विराजमान थे. साथ ही, 1949 में प्राप्त हुआ भगवान राम का सिंहासन भी मंदिर में श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ रखा जाएगा.

मंदिर के शिखर पर भी दो विशेष लाइटें लगाई गई हैं. पहली लाइट एविएशन सिग्नल है, जो हवाई जहाजों को संकेत देने का कार्य करेगी, जबकि दूसरी एक अरेस्टर है, जो आकाशीय बिजली को सीधे जमीन में प्रवाहित कर मंदिर को सुरक्षित बनाएगी.

क्या बोले मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष?

नृपेन्द्र मिश्रा ने स्पष्ट किया कि मंदिर निर्माण कार्य पूरी गति से चल रहा है और हर पहलू पर गहराई से विचार हो रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को सर्वोत्तम अनुभव मिल सके. शिखर पर अब केवल ध्वज लगाने का कार्य बाकी है, जो आगामी तीन से चार महीनों में पूरा कर लिया जाएगा. शिखर निर्माण का कार्य 30 जून तक पूर्ण हो जाने की संभावना है.

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