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इंदौर के अस्पतालों में दूषित पेयजल से हड़कंप: चाचा नेहरू और जिला अस्पताल में बैक्टीरिया की पुष्टि, HICC अलर्ट

इंदौर (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के इंदौर शहर स्थित नौ प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर किए गए विस्तृत परीक्षण में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।

राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (NABL) द्वारा प्रमाणित प्रयोगशाला में कराई गई जांच के अनुसार, शहर के छह बड़े सरकारी अस्पतालों के पीने के पानी में मानव एवं पशुओं के मल-मूत्र में पाए जाने वाले जानलेवा जैविक तत्व ‘ई-कोलाई’ (E. coli) और ‘कॉलिफॉर्म’ (Coliform) बैक्टीरिया पाए गए हैं।

🚰 एमवाय और चाचा नेहरू समेत इन 6 अस्पतालों के पानी में मिला गंभीर प्रदूषण

अस्पतालों की स्थिति और जांच के मुख्य बिंदु:

  • दूषित पानी वाले संस्थान: एमवाय अस्पताल (MY Hospital), पीसी सेठी, चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय, सुपर स्पेशिएलिटी, मेंटल हॉस्पिटल और जिला अस्पताल के पेयजल नमूनों में खतरनाक स्तर का जैविक संक्रमण दर्ज किया गया है।

  • फिल्टर प्लांट के बावजूद संक्रमण: ‘संवेदना एनजीओ’ द्वारा संचालित 1,000 लीटर क्षमता वाले शोधन प्लांट लगे होने के बाद भी पानी में ई-कोलाई की पुष्टि हुई है।

  • रखरखाव का अभाव: वाटर कूलरों के आसपास फैली गंदगी और आपातकालीन इकाइयों में जल शोधन प्रणालियों का ठप होना इस संक्रमण का मुख्य कारण पाया गया।

  • मटकों से असुरक्षित वितरण: मेंटल हॉस्पिटल व जिला अस्पताल में वाटर कूलर खराब होने के चलते मटकों व लोटों से पानी वितरित किया जा रहा है, जिससे संक्रमण का खतरा और बढ़ गया।

  • केवल 3 अस्पताल सुरक्षित: संपूर्ण अध्ययन में केवल एमटीएच (MTH), बाणगंगा और एमआरटीबी (MRTB) अस्पताल का पानी ही मानकों के अनुरूप और मानव उपभोग हेतु सुरक्षित पाया गया।

⚠️ नवजात और आईसीयू मरीजों के लिए जानलेवा हो सकता है ई-कोलाई और कॉलिफॉर्म

चिकित्सीय विशेषज्ञों की राय और स्वास्थ्य जोखिम:

  • गंभीर संक्रमण का खतरा: स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, ई-कोलाई और कॉलिफॉर्म बैक्टीरिया युक्त दूषित पानी से नवजात शिशुओं, आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों और सर्जरी कराने वाले लोगों में जानलेवा आंतरिक संक्रमण फैल सकता है।

  • पेट और आंतों की बीमारियां: यह बैक्टीरिया डायरिया, आंतों में सूजन, उल्टी-दस्त और सेप्सिस जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।

🛡️ HICC समिति कराती है नियमित जांच, सुधारात्मक कदमों के निर्देश: डॉ. आशुतोष

प्रशासनिक पक्ष और आधिकारिक बयान:

  • नियमित सैंपलिंग: एमजीएम मेडिकल कॉलेज के नोडल अधिकारी डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव ने बताया कि अस्पताल संक्रमण नियंत्रण समिति (HICC) द्वारा निर्धारित समयांतराल पर पानी के नमूनों का परीक्षण कराया जाता है।

  • त्वरित कार्रवाई के आदेश: जांच रिपोर्ट में किसी भी प्रकार की जैविक या रासायनिक कमी सामने आने पर संबंधित अस्पताल प्रबंधकों को तत्काल वाटर फिल्टर बदलने, टंकियों की सफाई और सुधारात्मक उपाय करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

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