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अफगानिस्तान के लिए बड़ा दिल दिखा रहा भारत, अंदर-अंदर मर रहा है पाकिस्तान

भारत सरकार ने हाल ही में 160 अफगान ट्रकों को अटारी-वाघा सीमा के माध्यम से भारत में आने की इजाजत दी है. ये ट्रक सूखे मेवे और दूसरे कृषि उत्पाद लेकर आए हैं. ये फैसला भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी के बीच हुई पहली राजनीतिक बातचीत के बाद लिया गया है. इस कदम को भारत की ओर से एक विशेष पहल के रूप में देखा जा रहा है, जो अफगानिस्तान के साथ व्यापारिक संबंधों को फिर से स्थापित करने की दिशा में उठाया गया कदम है. हालांकि, भारत ने अभी तक तालिबान शासन को औपचारिक मान्यता नहीं दी है.

मौजूदा समय में भारत के इस कदम को अफगानिस्तान के साथ संबंधों के प्रति दृष्टिकोण में एक अहम राजनीतिक और कूटनीतिक विकास के रूप में देखा जा रहा है. जबकि, ट्रकों को अटारी में एकीकृत चेक पोस्ट (ICP) पर अपना माल उतारने की अनुमति है. सीमा पार व्यापार का बड़े स्तर पर स्पेंशन प्रभावी बना हुआ है.

मुश्किलों के बाद भी व्यापार करने पर जोर

ICP के बंद होने से दोनों देशों के बीच रसद (लॉजिस्टिक) संबंधी समस्याएं पैदा हुईं, जिसमें कुलियों की कमी भी शामिल है. इस वजह से सामान उतारने में देरी हुई. यह इशारा क्षेत्रीय सहयोग और अफगानिस्तान की आर्थिक गतिविधियों के लिए भारत की प्रतिबद्धता को उजागर करता है. हालांकि, भारत काबुल में विकसित हो रहे राजनीतिक परिदृश्य का भी आकलन करना जारी रखा है.

विदेश मंत्री जयशंकर और अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री मुत्ताकी के बीच 15 मई को हुई बैठक भारत और तालिबान के बीच पहली राजनीतिक बातचीत थी. पाकिस्तान में पारगमन संबंधी(माल की आवाजाही वाले रास्ते) समस्याओं के कारण पैदा हुई बाधाओं के बावजूद, भारत दक्षिण एशिया में अफ़गान उत्पादों के लिए सबसे बड़ा बाज़ार बना हुआ है. यहां हर साल लगभग 1 बिलियन डॉलर का व्यापार होता है.

पाकिस्तान पर आपूर्ति को न रोकने का बनाया दबाव

कुछ समय पहले एक बार पाकिस्तान ने भारत को ज़मीनी सीमा के ज़रिए अफ़गानिस्तान में सामान भेजने की अनुमति दी थी. 2021 के समय ये आखिरी अनुमति दी थी. ये वो समय है जब भारत ने अफगानिस्तान के सूखा प्रभावित इलाकों को सहायता के तौर पर 50,000 टन गेहूं भेजने का प्रस्ताव रखा था. अभी-अभी काबुल से लौटा हुए अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर दबाव डाला कि वह आपूर्ति के लिए मंज़ूरी न रोके.

मुत्ताकी ने जयशंकर को उनकी आगामी ईरान और चीन यात्रा से पहले गुरुवार को फ़ोन किया था, जिसे भारत काफ़ी महत्व देता है. दोनों नेताओं ने संपर्क में बने रहने पर सहमति जताई थी और जयशंकर ने पहलगाम हमले के बाद भारत के लिए काबुल की ओर से दिखाई गई एकजुटता और भारत और तालिबान के बीच मतभेद पैदा करने के पाकिस्तानी अधिकारियों के बाद के प्रयासों में शामिल न होने के लिए मुत्ताकी को धन्यवाद दिया. उसमें यह दावा भी शामिल है कि भारत ने अफ़गानिस्तान पर मिसाइलें दागी हैं.

इस साल की शुरुआत में दुबई में विदेश सचिव विक्रम मिसरी की मुत्ताकी से मुलाकात के बाद से भारत अफगानिस्तान में अपनी परियोजनाओं पर काम फिर से शुरू करने की कोशिश कर रहा है. साथ ही और ज्यादा विकास सहयोग परियोजनाओं पर भी विचार कर रहा है. काबुल में राजनीतिक रूप से शामिल होने के भारत के कदम से इन प्रयासों में और तेजी आने की संभावना है.

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