Logo
ब्रेकिंग
BSF Attari Border News: अटारी सीमा पर रिट्रीट सेरेमनी का नया शेड्यूल जारी; शाम 5:30 बजे शुरू होगी पर... Batala Viral Video: गुरु नानक देव जी के विवाह पर्व में ट्रैक्टर स्टंट पड़ा भारी; तेज रफ्तार में पलटा... Dubai Visa Fraud: 90 हजार में दुबई भेजा, छीना पासपोर्ट और मुर्गीखाने में रखा! जालंधर के पीड़ित ने सु... Amritsar Flooding Alert: तरनतारन रोड के पास नहर टूटने से मचा हड़कंप; मिट्टी की बोरियों से दरार भरने ... Punjab Gold Silver Price Today: पंजाब में उछले सोना-चांदी के दाम; जालंधर में 24 कैरेट सोना ₹1.58 लाख... Ferozepur Central Jail: केंद्रीय जेल फिरोजपुर में फिर चला तलाशी अभियान; 10 और मोबाइल फोन बरामद, कैदि... Etah Fake University Scam: एटा में चायवाले के नाम पर चल रही थी फर्जी यूनिवर्सिटी; भेद खुला तो प्रिंस... Bihar Flood Relief: सीएम सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री राहत कोष में दान दी एक महीने की सैलरी; नितिन नब... Durg News Today: फेसबुक पोस्ट पर बवाल; भिलाई-3 थाने पहुंचे कांग्रेसी, भाजयुमो नेता पर FIR और गिरफ्ता... Agra Mahakumbh Ambikapur: सीएम विष्णु देव साय ने किया 'अग्र महाकुंभ 2026' का शुभारंभ; अग्रवाल समाज क...
Header Ad

क्या चीन का व्यक्ति बन सकता है दलाई लामा का उत्तराधिकारी? खुद धार्मिक गुरु ने दिया जवाब

दलाई लामा का उत्तराधिकारी कौन होगा? इस सवाल के जवाब पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं. हालांकि, खुद दलाई लामा ने हिमाचल प्रदेश में धार्मिक नेताओं की एक बैठक की और कहा कि ‘मैं पुष्टि करता हूं कि दलाई लामा की संस्था जारी रहेगी’. यानी दलाई लामा के उत्तराधिकारी का चुनाव भी उनकी संस्था ही करेगी. हालांकि, चीन का कहना है कि अगला दलाई लामा वो अपनी मर्जी से चुनेगा.

दरअसल चीन बौद्ध भिक्षुओं के प्रमुख के तौर पर खुद का आदमी रखना चाहता है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या चीन का व्यक्ति दलाई लामा का उत्तराधिकारी बन सकता है? इसका जवाब दलाई लामा ने अपनी किताब में दिया है. उन्होंने अपनी किताब ‘Voice for the voiceless’ में लिखा है कि उनके उत्तराधिकारी की पहचान करने का अधिकार सिर्फ भारत स्थित उनके कार्यालय “गदेन फोड्रांग ट्रस्ट” के पास है.

उनकी ये किताब साल 2025 में छपी है. इसमें उन्होंने आगे लिखा है कि उत्तराधिकारी का जन्म चीन के बाहर होगा. ताकि चीन सरकार उन्हें कठपुतली न बना सके. दलाई लामा ने कहा है कि उनके उत्तराधिकारी का जन्म एक स्वतंत्र देश में होगा.

अमेरिका का भी मिला साथ

भारत में एक लाख से ज्यादा तिब्बती बौद्ध रहते हैं. तिब्बत पर चीन के कब्जे के बाद भारत ने दलाई लामा को शरण दी थी. वह तिब्बती सरकार को धर्मशाला से काम करने की अनुमति भी देता है और हमेशा से सहयोग किया है. इस बीच अमेरिका ने भी तिब्बती लोगों की तरफ मदद का हाथ बढ़ाया है.

अमेरिका ने तिब्बती लोगों के मानवाधिकार के लिए प्रतिबद्धता दिखाई है और कहा कि वह चीन को उत्तराधिकारी चुनने की अनुमति नहीं देगा. 2024 में बाइडेन ने भी एक कानून पर हस्ताक्षर करते हुए चीन को तिब्बत से जुड़े विवाद को हल करने के लिए दबाव डाला था.

चीन को क्या दिक्कत है?

चीन का कहना है कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी को चुनने का अधिकार उसे विरासत में मिला है. दलाई लामा के पुनर्जन्म का फैसला राष्ट्रीय कानून के तहत किया जाना चाहिए. हालांकि चीन के इस चयन प्रकिया को तिब्बती लोग एक चाल मानते हैं.

हालांकि, तिब्बत पर अपनी मजबूत पकड़ के लिए चीन किसी भी तरह से दलाई लामा के चुने जाने का अधिकार अपने पास रखना चाहता है. इसको लेकर दलाई लामा ने अपनी किताब में कहा है कि तिब्बत के लोग किसी के द्वारा अपने फायदे के लिए चुने गए उम्मीदवार को स्वीकार न करें.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.